नोटबंदी व जीएसटी के दुष्परिणामों के खिलाफ कल 'धिक्कार दिवस'

नोटबंदी का सच तो यह है कि काला धन सफ़ेद हो गया और नकली नोट असली, अर्थव्यवस्था गिरी और करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए. GST के साथ मिलकर इसने महंगाई को बढ़ाया और छोटे व्यापारियों, मजदूर-किसानों को तबाह कर दिया...

रायपुर। नोटबंदी व जीएसटी से अर्थव्यवस्था पर पड़े दुष्प्रभावों, संसदीय जनतंत्र की संस्थाओं, सांप्रदायिक शांति और सद्भाव की परंपरा पर हमला कर आम जनता की एकता तोड़ने की कोशिशों के खिलाफ, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार किसानों को लाभकारी समर्थन मूल्य देने व उनकी क़र्ज़ मुक्ति के वाडे से मुकरने तथा मनरेगा को निष्प्रभावी करने के खिलाफ कल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा (माले-लिबरेशन), एसयूसीआई(सी), छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन, मजदूर-किसान कार्यकर्ता समिति (छमुमो) मिलकर रायपुर सहित पूरे प्रदेश में 'धिक्कार दिवस' मनाएंगे.

 आज यहां जारी एक बयान में वाम पार्टियों ने कहा है कि नोटबंदी का सच तो यह है कि काला धन सफ़ेद हो गया और नकली नोट असली, अर्थव्यवस्था गिरी और करोड़ों लोग बेरोजगार हो गए. जीएसटी के साथ मिलकर इसने महंगाई को बढ़ाया और छोटे व्यापारियों, मजदूर-किसानों को तबाह कर दिया. इसका पूरा मकसद देश की 'औपचारिक' अर्थव्यवस्था को 'कैशलेस' बनाना है, ताकि कॉर्पोरेटों को मुनाफा पहुंचाया जा सके.यही कारण है कि इनकी काली संपत्ति पर कोई प्रहार नहीं किया गया और न ही विदेशों में जमा उनका काला धन देश में पहुंचा. पैराडाईज़ लीक्स, पनामा लीक्स, विकी लीक्स के खुलासों से पता चलता है कि किस तरह भाजपा नेताओं सहित इन कार्पोरेटों ने अपना काला धन विदेशों में छुपाकर कर-चोरी किया है.

 इन पार्टियों का कहना है कि आज जनता इनकी जनविरोधी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर रही है, उनकी एकता को तोड़ने के लिए संघ-भाजपा सांप्रदायिक चालें चल रही हैं और चुनाव आयोग सहित संसदीय जनतंत्र की संस्थाओं को नाकारा बनाने की कोशिश कर रही है. लोकसभा-विधानसभा का चुनाव एक साथ कराने की मुहिम भी इसी का हिस्सा है.

 इन संगठनों का कहना है कि भाजपा ने किसानों, मजदूरों, महिलाओं से जितने भी वादे किए थे, अब उनसे पलट गई है और 'कॉर्पोरेट सेवा' को उसने अपना ध्येय बना लिया है. इस देश के कार्पोरेटों ने बैंकों का 15 लाख करोड़ रूपये हड़प कर लिया है, लेकिन इसे वसूलने की जगह इन बैंकों को फिर खजाने से 2 लाख करोड़ रूपये दे दिए गए हैं, ताकि आगे वे और गबन कर सके. जबकि किसान कर्जे के फंदे में फंसकर आत्महत्या कर रहे हैं और उन्हें राहत देने की कोई योजना इस सरकार के पास नहीं है.

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