हज सब्सिडी, सरकार द्वारा भारत को साम्प्रदायिक आधार पर बाँटने का प्रयास

भारत में धार्मिक सरकारी खर्च पर श्वेत पत्र जारी हो

अहमदाबाद। माइनॉरिटी कोआर्डिनेशन कमिटी गुजरात नें भारत के गृह मंत्री को पत्र लिख कर धार्मिक सब्सिडी पर श्वेत पत्र लाने की मांग की है।

बता दें भारत सरकार नें हज यात्रा पर दी जा रही सब्सिडी को खत्म कर दिया है, वैसे भी गत 5 वर्षो में ये सब्सिडी लगभग 700 करोड़ से घटकर लगभग 225 करोड़ ही थी।

कमेटी केसंयोजक मुजाहिद नफ़ीस ने कहा कि इसको ऐसे प्रचारित किया जा रहा है कि भारत का सबसे बड़ा खर्च ही यही हो रहा था जो कि चिंताजनक ही नहीं देश को साम्प्रदायिक आधार पर बाँटने का माध्यम भी बनता जा रहा है।

मुजाहिद नफ़ीस ने कहा कि हम जानते हैं कि पवित्र अमरनाथ यात्रा पर वर्ष 2012-13 में 1256.49 लाख रूपये का बजट था। वहीं 2014 इलाहाबाद में हुए कुम्भ मेले में केन्द्रीय सरकार नें 1150 करोड़ व उत्तर प्रदेश सरकार नें 11 करोड़ रूपये खर्च किये वहीँ विपक्षी दलों द्वारा 800 करोड़ के दुरपयोग का आरोप भी लगाया था।

मुजाहिद नफ़ीस ने कहा कि गत वर्ष मध्य प्रदेश में हुए सिंहस्थ महाकुम्भ में राज्य सरकार ने 3400 करोड़ व केंद्र सरकार नें 100 करोड़ खर्च किये थे, जिसमे, राज्य सरकार द्वारा 5000 करोड़ खर्च करने की योजना थी। वहीँ अन्य तीर्थ स्थानों में बद्रीनाथ, केदारनाथ, कैलाश मानसरोवर आदि तीर्थ स्थानों के लिए सरकार बजट का प्रावधान करती है।

मध्य प्रदेश की सरकार नें कैलाश मानसरोवर यात्रा की सब्सिडी प्रति यात्री 50000 कर दी है।

वहीँ गुजरात सरकार नें पवित्र यात्राधाम विकास बोर्ड बनाया हुआ है जिसमे 338 गुजरात के स्थानों का विवरण है जहाँ के लिए सरकार पैसा खर्च करती है जो कि सभी मंदिर हैं। 

इस वर्ष का गुजरात सरकार के पवित्र यात्राधाम विकास बोर्ड का बजट 10669 लाख रूपये है। 

गुजरात सरकार हिन्दू धर्म के कर्मकांड सिखाने का कोर्स चलाती है। जिस पर भी सरकार का पैसा खर्च होता है।

उत्तर प्रदेश की वर्तमान सरकार नें काशी, अयोध्या और अन्य जगहों पर तीर्थयात्रा के लिए 800 करोड़ रुपये का पुनर्वास और आध्यात्मिकता बढ़ाने कार्यक्रम प्रदान किया है।

मुजाहिद नफ़ीस ने कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट नें एक आदेश में कहा कि "मनुष्य और ईश्वर के बीच का रिश्ता एक व्यक्तिगत पसंद है, धर्म के साथ राज्य मिश्रण करना संवैधानिक रूप से अनुमत नहीं है। 

वहीँ संविधान का आर्टिकल 27 स्पष्ट कहता है कि राज्य के नागरिको से लिए गए कर (टैक्स) का इस्तेमाल किसी धर्म विशेष के प्रोत्साहन के लिए उचित नहीं है। 

वहीँ 2011 में Prafull Goradia v. The Union of India के केस में माननीय सुप्रीम कोर्ट नें कहा था कि धार्मिक गतिविधियों में सरकारी पैसे का इस्तेमाल गलत है। 

मुजाहिद नफ़ीस ने कहा कि सवाल ये उठता है कि सरकार क्या सिर्फ हज यात्रा पर ही खर्च कर रही थी, या अन्य धर्मो के तीर्थों पर भी खर्च करती हैं।

मुजाहिद नफ़ीस ने मांग की कि सरकार अपना पक्ष रखे जिससे धार्मिक तौर पर बंटवारा ना हो व केंद्र की सरकार देश में समस्त प्रकार के धार्मिक यात्रा, आयोजन, मेलो, केन्द्रों, स्थानों, धार्मिक बोर्डो पर किये जाने वाले खर्च पर श्वेत पत्र लाये जिससे देश को पता चल सके कि किस धर्म के प्रमोशन पर सरकार कितना खर्च कर रही है।

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