उद्योगपतियों ने लगाया मोदी को चूना

जपा ने बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए एलईडी बल्ब लगाने के लिए एक मुहिम चलाई थी। लेकिन आज तीन साल बाद सरकार की इस मुहिम पर पलीता लगता दिख रहा है...

76 per cent of_LED_bulbs sold in India are not safe

डीबी लाइव

केंद्र की सत्ता में आने के बाद भाजपा ने बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए एलईडी बल्ब लगाने के लिए एक मुहिम चलाई थी। लेकिन आज तीन साल बाद सरकार की इस मुहिम पर पलीता लगता दिख रहा है। हम ऐसा इस लिए कह रहे हैं क्योंकि एलईडी बल्बों को लेकर एक चौकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक बाज़ार में बिकने वाले 76 फीसदी बल्ब खतरनाक औऱ नकली हैं।

बतादें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से कहा था कि उनकी सरकार के हस्तक्षेप से उर्जा के किफायती इस्तेमाल वाले एलईडी बल्ब की दर 350 रपये प्रति इकाई से घट कर 50 रपये पर आ गयी है और देश भर में 77 करोड़ एलईडी बल्ब लगा कर सालाना 1.25 लाख करोड़ रपये की बचत का लक्ष्य रखा गया है।

लाल किले की प्राचीर से अपने तीसरे स्वतंत्रता दिवस संबोधन में उन्होंने कहा था कि लाइट इमिटिंग डायोड (एलईडी) बल्बौं से न केवल बिजली की बचत होती है बल्कि सीओ..2 उत्सर्जन में भी कमी आती है और यह पर्यावरण एवं अर्थव्यवस्था में योगदान देता है।

अब भारत में एलईडी बल्ब का कारोबार बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहा है। लेकिन सर्वेक्षण एजेंसी नील्सन रिपोर्ट में जो बाते सामंने आई है वो बेहद हैरान करने वाली है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि देश में बिकने वाले करीब तीन चौथाई यानी 76 फीसदी बल्ब सुरक्षा मानकों के अनुरूप नहीं हैं।

इसके साथ यह भी बात सामने आयी है कि करीब 48 फीसदी एलईडी बल्ब पर निर्माता का पता नहीं है और 31 फीसदी पर निर्माता का नाम ही नहीं है।

जुलाई महीने में मुम्बई, नयी दिल्ली, अहमदाबाद और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों के 200 इलेक्ट्रिक खुदरा आउटलेट पर सर्वेक्षण करके यह रिपोर्ट तैयार की गयी है।

रिपोर्ट के मुताबिक जाली और बिना ब्रांड वाले एलईडी बल्ब न सिर्फ संगठित बाजार के लिए खतरा हैं बल्कि इनसे सरकार के मेक इन इंडिया पहल पर भी खतरा मंडरा रहा है।

दरअसल भारतीय बाजार में चीन से तस्करी के रास्ते लाये गये उत्पादों का काफी बोलबाला है और इसी कारण एलईडी निर्माताओं को बीआईएस पंजीकरण के आदेश जारी किये गये थे। सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि जाली उत्पादों से सरकार खजाने को काफी चूना लगता है। जाली उत्पाद निवेश लक्ष्य के उद्देश्य के प्रतिकूल हैं।

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