मोदी के संसदीय क्षेत्र में BHU में मरीजों के लिए इस्तेमाल होती है जहरीली गैस

मरीजों को बेहोश करने के लिए इंडस्ट्रियल गैस का इस्तेमाल किया जाता है। जिसका आमतौर पर मरीजों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता। इस गैस को मेडिकल में इस्तेमाल करने की इजाजत भी नहीं है।...

देशबन्धु
हाइलाइट्स

मरीजों को बेहोश करने के लिए इंडस्ट्रियल गैस का इस्तेमाल किया जाता है। जिसका आमतौर पर मरीजों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता। इस गैस को मेडिकल में इस्तेमाल करने की इजाजत भी नहीं है।

पिछले दिनों छात्राओं की सुरक्षा को लेकर काफी चर्चा में रहा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय अब एक बार फिर यह सुर्खियों में है। बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पातल में तीन दिनों में सामान्य से ज्यादा मरीजों की मौत से हड़कंप मच गया है और इसकी वजह जान कर आप भी चौंक जाएंगे, कि अस्पताल में मरीजों की जिंदगी के साथ किस कदर खिलवाड़ किया जा रहा है।

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक बीएचयू के मेडिकल कॉलेज में हुई असामान्य मौतों की जांच करने वाली केंद्र और यूपी सरकार के एक संयुक्त जांच दल ने रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आये हैं।

टीम ने खुलासा किया है कि मरीजों को बेहोश करने के लिए इंडस्ट्रियल गैस का इस्तेमाल किया जाता है। जिसका आमतौर पर मरीजों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता। इस गैस को मेडिकल में इस्तेमाल करने की इजाजत भी नहीं है।

दरअसल, मामला इसी साल 6 से 8 जून का है। बीएचयू परिसर में स्थित सुंदर लाल अस्पताल में सर्जरी के लिए भर्ती हुए 14 मरीजों की मौत हो गई थी। जिसे लेकर अस्पताल परिसर में काफी हंगामा मचा था। मामले को संज्ञान में लेते हुए इलाहाबाद होईकोर्ट ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए थे। देश के नामी अस्पतालों में एक बीएचयू मेडिकल कॉलेज में असामान्य मौतों के लिए संयुक्त जांच दल ने अब अपनी रिपोर्ट सौंपी है।

अखबार के मुताबिक जांच रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अस्पताल में नॉन-फार्मास्यूटिकल नाइट्रस आक्साइड का प्रयोग किया जा रहा था। जिसका इस्तेमाल मेडिकल कॉलेज में नहीं किया जाता है।

18 जुलाई को दी गयी इस रिपोर्ट को उत्तर प्रदेश फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने तैयार किया है। हालांकि जांच में ये नहीं कहा गया है कि क्या सामान्य से ज्यादा संख्या में हुई मौतों के लिए नाइट्रस आक्साइड (एन2ओ) जिम्मेदार है या नहीं?

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