तनाव, बीपी बढ़ा रहा है स्ट्रोक के खतरे

स्ट्रोक दुनिया में मौतों और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है और विश्व स्ट्रोक संगठन के मुताबिक हर वर्ष स्ट्रोक की वजह से 65 लाख लोग मौत की नींद सो जाते हैं। ...

देशबन्धु

नई दिल्ली, 26 अक्टूबर। स्ट्रोक दुनिया में मौतों और विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है और विश्व स्ट्रोक संगठन के मुताबिक हर वर्ष स्ट्रोक की वजह से 65 लाख लोग मौत की नींद सो जाते हैं। छह में से एक व्यक्ति के स्ट्रोक का सामना करने की संभावनाएं रहती हैं व प्रत्येक चार मिनट में एक व्यक्ति को स्ट्रोक होता है, फिलहाल एक अनुमान के मुताबिक 2.6 करोड़ लोग स्ट्रोक से पीडि़त हैं। दुनिया भर में स्ट्रोक के प्रति जागरूकता के लिए 29 अक्टूबर को विश्व स्ट्रोक दिवस का आयोजन किया जाता है।

स्ट्रोक पर बातचीत में फोर्टिस अस्पताल की न्यूरोलॉजी सलाहकार डॉ. रीमा खन्ना बताती हैं कि स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के एक हिस्से को खून की आपूर्ति बंद हो जाती है। खून के बिना मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान होगा और वे मृत हो जाएंगी। स्ट्रोक की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि मस्तिष्क का कौन सा हिस्सा प्रभावित है और पीडि़त व्यक्ति को कितनी जल्दी उपचार मिलता है। स्ट्रोक व्यक्ति के चलने-फिरने की क्षमता, बोलने की क्षमता, सोचने की शक्ति, महसूस करने और विश्लेष्ण करने की शक्ति को प्रभावित कर सकता है। स्ट्रोक की चेतावनी देने वाले कारक और लक्षणों में चिकित्सक मानते हैं कि अचानक संदेह होना, बोलने समझने में परेशानी, अचानक शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, एक या दोनों आंखों से देखने में परेशानी आलस्य, अचानक चक्कर आना या बेहोश होना व शरीर के एक हिस्से में संवेदनशीलता में बदलाव प्रमुख हैं।

वरिष्ठ चिकित्सक मानते हैं कि हेमरैजिक स्ट्रोक: एक आर्टरी में टूट हो जाती है और इसकी वजह से मस्तिष्क में रक्तस्स्राव होता है। इसे सेरेब्रल हैमरेज भी कहते हैं। एथेरोस्केलेरॉसिस की वजह से आर्टरी ब्लॉक हो सकती है। उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन की वजह से स्ट्रोक का जोखिम दोगुना तक बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह खून की नलियों को संकरा कर देता है जिसकी वजह से इसमें टूट या लीकेज होती है। इसके परिणामस्वरूप खून का थक्का भी जम सकता है जिससे स्ट्रोक का जोखिम और भी बढ़ जाता है। धूम्रपान, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा भी समस्या की एक जड़ है।

जनरल फिजिशियन डा. बीवी सिंह इसके कारकों में शारीरिक गतिविधि की कमी और मोटापा को बताते हुए कहते हैं कि तनावमुक्त जीवन जरूरी है। वहीं स्ट्रोक में ‘‘गोल्डेन ऑवर’’ यानी पहले तीन से साढ़े चार घंटों में रोगी को अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। 

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।