आंखों का भी रखें ख्याल पटाखे जलाते समय

साधारण सी चोट भी नजरों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. प्रारंभिक देखभाल से संबंधित आधारभूत जानकारी इलाज को आसान और तेज बनाएगी....

एजेंसी
हाइलाइट्स

आंखों में चोट लगने के बाद घटती हुई दृष्टि, आंखों में लाली, लगातार पानी आने तथा आंखों को खोलने में असमर्थ हो जाने जैसी शिकायतें हो सकती हैं. चोट की वजह से कंजैक्टिवा में आंसू, आंखों में उभार के साथ श्वेतपटल में आंसू या आंखों में खून आ सकता है. पटाखों की वजह से ओक्युलर ट्रॉमा विभिन्न रूपों में नजर आ सकता है

दीपावली पर विशेष

डा. रितिका सचदेव

दिवाली का मौसम खुशी और मौज मस्ती का होता है. यह आशीर्वाद एवं एक दूसरे का शुक्रिया अदा करने वाला भी समय है. इस समय परिवार, रिश्तेदार, दोस्त और पड़ोसी साथ मिलकर दिवाली मनाने के लिए इकऋे होते हैं. लेकिन हम खुशी मनाना चाहते हैं, दुख बटोरना नहीं. यह शुभकामना है कि रोशनी का यह पर्व आपके जीवन में अंधकार नहीं ला पाए. किसी भी दिन उपाय से बेहतर है रोकथाम.

दीपावली और पटाखे एक तरह से एक दूसरे के पर्याय बन चुके हैं. पटाखे आंखों को बहुत ही खुशी देते हैं और निश्चित रूप से सौंदर्य शास्त्रीय निगाहों से उनकी सराहना की जा सकती है. पटाखे हमारे उत्सवों में चमक और खुशी का समावेश करते हैं.

लेकिन इस सच्चाई की अनदेखी नहीं की जा सकती है कि अगर पटाखों का प्रयोग सावधानी से नहीं किया जाए तो वे अपने संपर्क में आने वाले में से बहुतों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन सकते हैं. यही वजह है कि हर वर्ष इस त्योहार के दौरान देश भर में बहुत से लोग अपनी आंखों की दृष्टि खो देते हैं और जल जाते हैं. ये मौज-मस्ती करने वालों के लिए अनकही मुसीबत ला सकते हैं और उनके दीपावली उत्सव का मजा खराब कर सकते हैं. इसलिए सुरक्षित राह अपनाना जरुरी है. इससे आप की खुशहाल और सुरक्षित दीपावली सुनिश्चित हो पाएगी.

आंखें शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में एक हैं और उनमें लगने वाली चोट कितनी भी छोटी क्यों न हो चिंता की बात है और डाक्टरी सहायता हासिल करने में देरी चोटग्रस्त स्थान की स्थिति और अधिक घातक कर सकती है जिसके परिणामस्वरूप दिखाई देने में कमी आ सकती है या अंधापन हो सकता है. हर वर्ष सभी से सावधानी बरतने की अपील करने के बावजूद हमारे पास बड़ी संख्या में आंखों की चोट के शिकार मरीज आते हैं.

आंखों में चोट लगने के बाद घटती हुई दृष्टि, आंखों में लाली, लगातार पानी आने तथा आंखों को खोलने में असमर्थ हो जाने जैसी शिकायतें हो सकती हैं. चोट की वजह से कंजैक्टिवा में आंसू, आंखों में उभार के साथ श्वेतपटल में आंसू या आंखों में खून आ सकता है. पटाखों की वजह से ओक्युलर ट्रॉमा विभिन्न रूपों में नजर आ सकता है : -

आंखों में किसी बाहरी तत्व का प्रवेश

>      चेहरे का जलना

>      कुंद चोट

>      छिद्रित चोट

चोट चाहे किसी भी रूप में हों, इनकी वजह से रेटाइनल इडेमा, रेटाइनल, डिटैचमेंट, संक्रमण या आंखों के पूरी तरह विरूपित हो जाने की शिकायत हो सकती है.

हमने इन त्योहारों के दौरान आंखों को चोट पहुंचने की वजह से आंखों की दृष्टि ठीक समय पर पूरा इलाज शुरू किए जाने के बावजूद खत्म हो जाते हुए देखी है. न सिर्फ दृष्टि बल्कि कई बार आई बॉल विरूपित हो जाती है और इलाज के बावजूद लोगों की आई बॉल धंस जाती है जो कि चेहरे को बदसूरत बना देती है.

डा. रितिका सचदेव
Dr. Ritika Sachdev

Dr. Ritika Sachdev, holds a bachelor’s degree in medicine and surgery from Lady Hardinge Medical College, University of Delhi, a master’s degree in surgery from Maulana Azad Medical College, University of Delhi and senior residency from R. P. Centre, All India Institute of Medical Sciences. She has over seven years of experience in the field of ophthalmology. She has been on the Board since the incorporation of our Company. Dr. Ritika Sachdev has been awarded the Dr. Krishna Sohan Trophy and a Gold Medal from the Intra Ocular and Refractive Society, India in 2013. (Info from सेंटर फॉर साइट,)

चोट लगने के बाद सावधानी 

>             आंखों को चोटग्रस्त होने से बचाने के लिए पटाखे जलाते वक्त गॉगल्स यानी ‘रंगीन चश्मा’ पहनना चाहिए.

>             आंखों को तत्काल पानी से धो डालना चाहिए. आंखों को शावर या बेसिन के पानी के नीचे रखें या फिर एक साफ वर्तन से आंखों में पानी डालें. पानी डालते वक्त आंखें खुली रखें या जितना संभव हो फैलाकर रखें. कम से कम 15 मिनट तक पानी डालना जारी रखें.

>             अगर आंखों पर लेंस हो तो तत्काल ही पानी की फुहार डालना शुरू कर दें. इससे लेंस बह सकता है

>             अकेले पटाखा जलाने से बचें और यह कार्य समूह में करें

>             अगर चोट लगी हुई हो तो जितनी जल्दी संभव हो, नेेत्र विशेषज्ञ तक पहुंचें. डाक्टरी सलाह तब भी लें अगर आंखों में लाली हो या पानी आ रहा हो.

>             जलती हुई चिनगारियों को शरीर से दूर रखें.

>             पटाखा जलाने के लिए मोमबत्ती या अगरबत्ती का इस्तेमाल करें. वे बिना खुली लपट के जलते हैं और आप को हाथों तथा पटाखे के बीच सुरक्षित दूरी कायम रखते हैं.

 सावधान रहें, यह सब नहीं करना है

>             चोटग्रस्त भाग को छेड़े नहीं. आंखों को मलें नहीं.

>             अगर कट गया हो तो आंखों को धोएं नहीं.

>             आंखों में पड़ा कोई कचरा हटाने की कोशिश न करें.

>             अगर स्टेराइल पैड उपलब्ध नहीं हो तब कोई भी बैंडेज न लगा लें.

>             आंखों के मलहम का इस्तेमाल न करें.

>             सिंथेटिक कपड़ों को पहनने से बचें और सूती वस्त्रों का प्रयोग करें.

>             टिन या ग्लास में पटाखे न जलाएं

>             छोटे बच्चों के हाथों में कभी भी पटाखे न दें.

>             हवा में उडने वाले पटाखे वहां नहीं जलाएं जहां सिर के ऊपर पेड़ों, तारों जैसी रूकावटें हों

>             कभी भी उस पटाखे को फिर से जलाने की कोशिश न करें जो ठीक से जल नहीं पाया हो. 15 से 20 मिनट तक इंतजार करें और फिर उसे पानी से भरी एक बाल्टी में डाल दें.

>             किसी पर भी पटाखे को नहीं फेंकें

>             पटाखे को हाथों में पकडकर नहीं जलाएं. उन्हें नीचे रखें, जलाएं और फिर वहां से हट जाएं.

‘करने’ या ‘ना करने’ की हिदायतों पर अमल दीपावली उत्सव के दौरान आंखों की दृष्टि जाने या अन्य दुर्घटनाओं को रोक सकती हैं. किसी भी तरह की चोट को हानिरहित नहीं समझना चाहिए. साधारण सी चोट भी नजरों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. प्रारंभिक देखभाल से संबंधित आधारभूत जानकारी इलाज को आसान और तेज बनाएगी.

डा. रितिका सचदेव, एडिशनल, डायरेक्टर, सेंटर फॉर साइट, नई दिल्ली

(संप्रेषण)

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