अनुवादकों की आवश्‍यकता को पूरा करेगा अनुवाद अध्‍ययन विभाग

शैक्षणिक सत्र 2016-17 से कुछ नए डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किए गए है। सामान्य बी.ए. और बी.ए. आनर्स पाठ्यक्रम में भी अनुवाद को एक विषय के रूप में रखने का प्रस्ताव है...

हाइलाइट्स
  • विभागाध्‍यक्ष डॉ. अन्‍नपूर्णा के साथ विशेष बातचीत
  • मेक इन इंडिया अभियान में हिंदी विश्‍वविद्यालय की पहल

 वर्धा, 11 मई 2017 : महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय में अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ के तहत संचालित अनुवाद अध्ययन विभाग देश के चुनिंदा शैक्षिक संस्थानों में से एक है जहाँ अनुवाद एवं निर्वचन की विधा में नियमित पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इस पाठ्यक्रम का प्रचलन पिछले कुछ वर्षों में बढ़ गया है। प्रतिष्ठित संस्थाओं में अनुवादकों और दुभाषिए की आज अत्यंत आवश्यकता है। भारत सरकार के “मेक इन इंडिया” अभियान के तहत विदेशी कम्पनियों के भारत में आगमन से देश में अनुवादकों और निर्वचकों की माँग और भी बढ़ गई है जिससे अनुवादकों एवं निर्वचकों की पूर्ति हेतु अनुवाद अध्ययन विभाग तत्पर है, यह जानकारी अनुवाद अध्ययन विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ अन्नपूर्णा सी. ने दी।

साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2016-17 से कुछ नए डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू किए गए है। सामान्य बी.ए. और बी.ए. आनर्स पाठ्यक्रम में भी अनुवाद को एक विषय के रूप में रखने का प्रस्ताव है।

उन्होंने यह भी बताया कि यह देश का एकमात्र विभाग है और यहाँ सूचना एवं प्रौद्योगिकी के सहयोग से अनुवाद कार्य को आसान बनाने वाले नई  टूल्स (Tools) का अभ्यास कराया  जाता है। एम.ए. अनुवाद अध्ययन पाठ्यक्रम में एक विदेशी भाषा सीखना अनिवार्य है , जिससे वे वैश्विक परिप्रेक्ष्य से जुड़े। यही कारण है कि विभाग के विद्यार्थी देश के प्रतिष्ठित संस्थाओं जैसे ईसीआईएल, रेलवे, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, बैंक, सी-डैक, पुणे, एलआईसी, राजभाषा विभाग, आईआईटी, नवोदय विद्यालय, प्रिंट मीडिया, अनुवाद संस्थानों आदि में रोज़गार पा रहे हैं। कई विद्यार्थी देश के विश्‍वविद्यालयों और महाविद्यालयों में अध्यापक, सरकारी संस्थानों में परियोजना प्रबंधक, सहायक पर्यवेक्षक के पद पर नियुक्त हुए हैं। विभाग के विदेशी विद्यार्थी ने थाईलैंड के सिल्पाकोर्न विश्‍वविद्यालय में भी अध्यापक का पद प्राप्त किया है।

एम.ए. अनुवाद अध्ययन, एम.फिल. अनुवाद अध्ययन, पी.एच.डी. अनुवाद अध्ययन, हिंदी अनुवाद में एक वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा, प्रयोजनमूलक हिंदी और अनुवाद में एक वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा, निर्वचन में एक वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा, मराठी अनुवाद में पी.जी. डिप्लोमा आदि पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।

डॉ. अन्नपूर्णा डॉ. अन्नपूर्णा ने बताया कि वैश्‍वीकरण के इस दौर में दिन प्रतिदिन अनुवाद की महत्ता बढ़ती जा रही है। इसे बहुआयामी एवं स्वायत्त अनुशासन के रूप में पहचान मिल चुकी है, इसीलिए इस विश्‍वविद्यालय में अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ प्रारंभ हुआ। विद्यापीठ समस्त विश्‍वविद्यालयों में अद्वितीय है और इसके अंतर्गत कार्यरत अनुवाद अध्ययन विभाग देश का एकमात्र ऐसा विभाग है, जो अनुवाद की तकनीकी, प्रणालीगत और रोजगारपरक संभावनाओं को यथार्थ में परिणत करने के लिए सतत प्रयासरत हैं। विभाग के उद्देश्यों को लेकर उनका कहना है कि हिंदी को अनुवाद के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक समृद्ध भाषा बनाए। हिंदी में मशीनी अनुवाद प्रणाली का विकास करना, अनुवाद को अंतर अनुशासनिक बोध पाठ्यक्रम के रूप में विकसित करते हुए इसे आधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र के अनुरूप बनाना, अनुवाद को भाषा शिक्षण की विधा के रूप में विकसित करना तुलनात्मक एवं अंतर अनुशासनिक शोध हेतु ज्ञान आधारित पाठ एवं साहित्य उपलब्ध कराना, अनुवादकों एवं निर्वचकों की कुशलता के विकास हेतु प्रशिक्षण की व्यवस्था करना, अनुवाद के लिए उपयोगी विविध प्रकार के शब्दकोशों का निर्माण करना आदि इस विभाग के महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं।

डॉ अन्नपूर्णा का कहना है कि अनुवादकों की आवश्‍यकताओं को पूरा करते हुए अनुवाद अध्‍ययन विभाग  राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी और भारतीय भाषाओं को मजबूत करने के प्रयास में लगा हुआ है।    

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।