किसान संसद : 20 नवंबर को समर्थन मूल्य और क़र्ज़ मुक्ति का वादा पूरा करने की मांग करेंगेकिसान

आदिवासियों को वनभूमि से विस्थापित किया जा रहा है. किसानों को खेती के लिए पानी लेने से रोका जा रहा है, लेकिन बड़े पूंजीपति अपने कारखानों के लिए जलस्रोतों का अवैध दोहन कर रहे हैं ...

'किसान संसद' में हिस्सा लेने सैंकड़ों किसानों ने दिल्ली किया कूच

समर्थन मूल्य और क़र्ज़ मुक्ति का वादा पूरा करने की करेंगे मांग

देश के किसानों, आदिवासियों, भू-विस्थापितों के बीच कार्य कर रहे 180 से ज्यादा संगठनों के आह्वान पर छत्तीसगढ़ से सैंकड़ों किसानों ने आज राजनांदगांव, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, चांपा-जांजगीर, सरगुजा और सूरजपुर जिले से दिल्ली के लिए कूच किया. ये किसान अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा, राजनांदगांव जिला किसान संघ और छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन से जुड़े हुए हैं. ये किसान 20 नवम्बर को आयोजित 'किसान संसद' में हिस्सा लेंगे और मोदी सरकार से स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप लाभकारी समर्थन मूल्य देने, किसानों को सरकारी और साहूकारी कर्जे से मुक्त करने का चुनावी वादा पूरा करने की मांग करेंगे.

आज यहां जारी एक बयान में छतीसगढ़ किसान सभा के महासचिव ऋषि गुप्ता ने बताया कि   इस 'किसान संसद' में हिस्सा लेने के लिए छत्तीसगढ़ किसान सभा द्वारा 7 सूत्रीय मांगपत्र पर पूरे प्रदेश में व्यापक अभियान चलाया गया. केन्द्र व छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार जिन कृषि व किसान विरोधी नीतियों को लागू कर रही हैं, उसका नतीजा लगातार हो रही किसान आत्महत्याओं के रूप में सामने आ रहा है. जल-जंगल-जमीन-खनिज व अन्य प्राकृतिक संसाधनों की लूट के कारण आदिवासियों को वनभूमि से विस्थापित किया जा रहा है. किसानों को खेती के लिए पानी लेने से रोका जा रहा है, लेकिन बड़े पूंजीपति अपने कारखानों के लिए जलस्रोतों का अवैध दोहन कर रहे हैं और मुनाफा कमा रहे हैं. सूखे के वक़्त में भी किसानों को मनरेगा का सहारा नहीं मिल रहा है. पूरे छतीसगढ़ की खेती-किसानी संकट में है. इन नीतियों के खिलाफ लड़ने की जरूरत है.

किसान सभा नेता ने कहा कि छत्तीसगढ़ के किसान अपनी पीड़ा को पूरे देश की जनता के सामने रखेंगे. वे बतायेंगे कि किस तरह यहां आदिवासियों को जल-जंगल-जमीन के अधिकार से वंचित किया जा रहा है और जिन्हें वन भूमि के आधे-अधूरे पट्टे दिए भी गए हैं, उसे छीना जा रहा है. धान यहां की मुख्य खेती है, लेकिन रबी सीजन में उसकी पैदावार लेने में रोक लगा दी गई है, जबकि उद्योग जल संसाधनों का अवैध दोहन कर रहे हैं.

उन्होंने बताया कि प्रदेश के इन किसानों का नेतृत्व किसान सभा नेता राकेश चौहान, सोनकुंवर, अनिल  द्विवेदी, विशाल बाकड़े और सुदेश टीकम आदि नेता कर रहे हैं. 'किसान संसद' में ही किसानों के संघर्ष के अगले कार्यक्रम की घोषणा की जायेगी.

          

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