केरल को वित्तीय सहायता प्रदान करने के साथ-साथ बचाव अभियान भी चलाया आईएमए ने

सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर आईएमए स्टेट रिसर्च सेल, लोगों के स्वास्थ्य पर बाढ़ के प्रभाव और इसे प्रबंधित करने के संभावित मार्गों पर एक दस्तावेज तैयार कर रहा है

हस्तक्षेप डेस्क
Updated on : 2018-08-22 20:56:35

केरल को वित्तीय सहायता प्रदान करने के साथ-साथ बचाव अभियान भी चलाया आईएमए ने

नई दिल्ली, अगस्त। केरल में अकल्पनीय बाढ़ के बाद, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए बड़े पैमाने पर व्यवस्था की है। आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने संकट की इस घड़ी में पीड़ित राज्य को सभी प्रकार की सहायता प्रदान करने का फैसला किया है। आईएमए ने समय-समय पर राज्य को सौंपी जाने वाली वित्तीय और भौतिक सहायता दोनों को बढ़ा दिया है। अब तक राज्य को 1 करोड़ रुपये से ज्यादा सौंप दिया गया है और क्षेत्रीय शाखाओं से समय-समय पर राहत सामग्री भी भेजी जाती रही है।

आईएमए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विनय अग्रवाल के नेतृत्व में एक राष्ट्रीय समन्वय समिति का गठन किया गया है, और आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रवि वानखेडकर के द्वारा बचाव और राहत कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की जा रही है।

आईएमए के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रवि वानखेडकर ने कहा,

“समिति का ध्यान बाढ़ वाले क्षेत्रों से बचाए गए लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान करने पर है। इस उद्देष्य के लिए चिकित्सा कर्मियों के साथ 500 से अधिक बचाव शिविरों को तैनात किया गया है और आईएमए ने बाढ़ प्रभावित लोगों को निःशुल्क परामर्श सेवाएं प्रदान करने के लिए सभी निजी अस्पतालों को निर्देश दिया है। उन्हें बचाने के लिए, हमने पूरे राज्य में निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा की व्यवस्था की है और 50 लाख रुपये से अधिक की दवाएं वितरित की गई हैं।’’

सरकारी एजेंसियों के साथ मिलकर आईएमए स्टेट रिसर्च सेल, लोगों के स्वास्थ्य पर बाढ़ के प्रभाव और इसे प्रबंधित करने के संभावित मार्गों पर एक दस्तावेज तैयार कर रहा है, जिसे सितंबर के पहले सप्ताह तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

आईएमए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विनय अग्रवाल कहते हैं,

“हमें लगता है कि बचाव कार्य जल्द ही पूरा हो जाएगा और अगला ध्यान राहत और पुनर्वास पर होगा। चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कार्य के तौर पर 1800 से अधिक बचाव शिविरों में लोगों को संगठित किया जाएगा और एम्बुलेंस नेटवर्क अपनी निः शुल्क सेवाएं प्रदान करेगा। 1000 से अधिक चिकित्सा छात्रों ने चिकित्सा सेवाओं में स्वैच्छिक रूप से अपनी सेवा प्रदान की है। यहां तक कि अब सामानों की आपूर्ति बहुतायत स्तर पर की जा रही है, फिर भी आईएमए मांगों के अनुसार विभिन्न राज्यों से आगे की आपूर्ति की निगरानी और व्यवस्था कर रहा है।’’

इसके अलावा समिति ने अपने रोकथाम अभियानों के माध्यम से संक्रामक बीमारियों के खतरे को कम करने के लिए सुरक्षित पेयजल, हाथों की उचित स्वच्छता और कचरे के प्रबंधन को सुनिश्चित किया है।

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