अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस : भारत में हर घंटे चार बच्चों को यौन शोषण का सामना करना पड़ता है

#MeToo के खुलासों के बीच इस देश की एक सच्चाई यह है कि भारत में हर घंटे चार बच्चों को यौन शोषण का सामना करना पड़ता है। ...

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस : भारत में हर घंटे चार बच्चों को यौन शोषण का सामना करना पड़ता है

नई दिल्ली, 11 अक्तूबर। क्या आप जानते हैं #MeToo के खुलासों के बीच इस देश की एक सच्चाई यह है कि भारत में हर घंटे चार बच्चों को यौन शोषण का सामना करना पड़ता है। हालाँकि यह संख्या इसकी कई गुना होगी, क्योंकि ‘बाल यौन शोषण के अधिकाँश मामलों का संज्ञान नहीं लिया जाता या बच्चे उसे अभिव्यक्त नहीं कर पाते।

आज अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया की मानवाधिकार शिक्षा टीम  ने बालिकाओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने के लिए एक मॉड्यूल तैयार किया है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया पिछले दो माह से 'हमारी सुरक्षा हमारे अधिकार' अभियान के जरिए बच्चों को सशक्त बनाकर यौन दुर्व्यवहार की पहचान और उसकी रिपोर्ट करने के लिए चुप्पी तोड़ने की कोशिश कर रहा है।

एक अपील के मुताबिक एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया ने चार भाषाओं में एक मॉड्यूल तैयार किया है। यह मॉड्यूल बच्चों को व्यक्तिगत सुरक्षा और 'सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श' पर शिक्षित करता है तथा इस मुद्दे से निपटने के लिए स्कूलों और हितधारकों को दिशा निर्देश प्रदान करता है।

यह मॉड्यूल बच्चों को व्यक्तिगत सुरक्षा तथा 'सुरक्षित स्पर्श और असुरक्षित स्पर्श' के विषय में शिक्षित करता है।

अपील के मुताबिक यह अभियान समूचे देश में ले जाया गया है।

मानवाधिकार शिक्षा टीम का दावा है कि उन्होंने तेलंगाना में हाल ही में 16 स्कूलों का दौरा किया और 650 छात्रों तथा 80 शिक्षकों के साथ बातचीत की।

कब मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस हर साल 11 अक्टूबर को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 19 दिसंबर वर्ष 2011 को प्रस्ताव पारित करके 11 अक्तूबर को अंतराष्ट्रीय बालिका दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। 11 अक्तूबर 2012 पहला अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस था।

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के मुख्य उद्देश्य

1. बालिकाओं द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियों को पहचानना और उनकी जरूरतों को उजागर करना

2. बालिकाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देना।

3. बालिकाओं के मानवाधिकारों को पूरा करने में सहायता करना

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