तापमान में वृद्धि को दो के बजाय डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने से दुनिया को होगा स्वास्थ्य संबंधी लाभ

तापमान में वृद्धि को दो के बजाय डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने से मानव स्‍वास्‍थ्‍य को आमतौर पर बड़े लाभ होंगे, खासकर विकासशील देशों के लोगों को इसका फायदा मिलेगा।...

तापमान में वृद्धि को दो के बजाय डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने से दुनिया को होगा स्वास्थ्य संबंधी लाभ

नई दिल्ली, 06 अक्तूबर। जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की छठी बैठक बीती 1 अक्तूबर को कोरिया में शुरू हो गई। इस बैठक में आईपीसीसी 1.5 ºC की ग्लोबल वार्मिंग पर अपनी विशेष रिपोर्ट पर विचार करेगी। आकलन रिपोर्ट आगामी 7 अक्‍टूबर को यानी कल कोरिया में जारी होनी है। इस रिपोर्ट में हर किसी के लिये कुछ न कुछ मौजूद है। इसमें वे सभी बातें हैं जिनका सभी से कोई न कोई सरोकार जुड़ा हुआ है। पांच शोध इकाइयों ने ऐसी गैर-ब्रांडेड रपट तथा विज्ञान सम्‍बन्‍धी उपयोगी पत्र तैयार किये हैं, जो पिछले साल की आईपीसीसी रिपोर्ट और इस रिपोर्ट के बीच के अंतर को दर्शाती हैं।

तापमान में वृद्धि को दो के बजाय डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने से स्‍वास्‍थ्‍य सम्‍बन्‍धी लाभ

यदि 3.7 डिग्री तापीकरण वाली किसी ऐसी परिस्थिति के बारे में बात करें, जिसमें तापमान न्‍यूनीकरण की कोई नीति ही न हो, तो तापमान में वृद्धि को दो के बजाय डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने से लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई द्वीप समूह में डेंगू के करीब 33 लाख मामलों को टाला जा सकता है। (यह दो डिग्री वाली परिस्थितियों के मुकाबले एक साल में डेंगू के मामलों का आंकड़ा पांच लाख कम होगा)

तापमान में वृद्धि को 2-3 डिग्री सेल्सियस से कम तक सीमित रखने से दुनिया में मलेरिया के मामलों में 15 करोड़ तक की कमी लाई जा सकती है। एक अनुमान के अनुसार मलेरिया के कारण अकेले अफ्रीका में ही 12 अरब डॉलर की स्‍वास्‍थ्‍य लागतों की क्षति होती है। इनमें स्‍वास्‍थ्‍य पर खर्च, वर्क तथा स्‍कूल कवर और निवेश तथा पर्यटन क्षेत्र को होने वाले नुकसान शामिल हैं।

तापमान में वृद्धि को दो के बजाय डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने से मानव स्‍वास्‍थ्‍य को आमतौर पर बड़े लाभ होंगे, खासकर विकासशील देशों के लोगों को इसका फायदा मिलेगा।

तापमान में वृद्धि का स्‍तर कम रखने से गरीब देशों में लोगों पर कुपोषण का खतरा कम होगा।

तापमान में वृद्धि को दो के बजाय डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने से भोजन की प्रति व्‍यक्ति खपत में बढ़ोत्‍तरी होने का अनुमान है। इस सदी के अंत तक दुनिया में कुपोषित लोगों की संख्‍या में 25 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।

तापमान में वृद्धि को दो के बजाय डेढ़ डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने से नाईजीरिया के लागोस तथा चीन के शंघाई जैसे शहरों में गर्मी के दुष्‍प्रभाव की घटनाओं को आधे से भी कम किया जा सकता है। इससे 35 करोड़ से ज्‍यादा लोगों (मेक्सिको और ब्राजील की कुल आबादी से अधिक) को जानलेवा गर्मी से बचाया जा सकेगा।

क्या है आईपीसीसी

जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी) जलवायु परिवर्तन से संबंधित विज्ञान का आकलन करने के लिए संयुक्त राष्ट्र निकाय है। इसका गठन 1988 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएन पर्यावरण) और विश्व मौसम संगठन (डब्लूएमओ) ने जलवायु परिवर्तन, इसके प्रभाव और संभावित भविष्य के जोखिमों के साथ-साथ अनुकूलन और शमन को आगे बढ़ाने के लिए नियमित वैज्ञानिक आकलन के साथ नीति निर्माताओं को प्रदान करने के लिए किया था। इसमें 119 सदस्य देश हैं।

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