उत्पीड़ित समाजों के लोगों से उर्मिलेश की अपील, मनुवादी प्रवचन या कीर्तन आदि में न जाएं

भजन ही सुनना है तो कबीर, रैदास, नानक आदि को सुनिए। आप फुले, अंबेडकर, पेरियार और नारायण गुरु के विचारों‌ को पढ़ें और सुनें।‌ ...

उत्पीड़ित समाजों के लोगों से उर्मिलेश की अपील, मनुवादी प्रवचन या कीर्तन आदि में न जाएं

नई दिल्ली, 10 सितंबर। वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने दलित-आदिवासी और अन्य सभी उत्पीड़ित समाजों के लोगों से अपील की है कि वे मनुवादी प्रवचन या कीर्तन आदि में न जाएं।

अपनी फेसबुक पोस्ट में उर्मिलेश ने लिखा,

“आपने अच्छी तरह देखा कि किस तरह मनुवादी-प्रवचन करने वाले एक खास तरह के लोग संविधान के तहत आपको मिले 'सकारात्मक कार्रवाई' के कतिपय प्रावधानों (आरक्षण सहित) का खुलेआम विरोध कर रहे हैं!”

उन्होंने लिखा,

“अब तो आपकी आंख खुलनी चाहिए। तो आइए तय कीजिए कि अबसे आप और आपके परिवार के लोग किसी मनुवादी प्रवचन या कीर्तन आदि में नहीं जायेंगे! यकीन कीजिए, ज्यादातर प्रवचन और कीर्तन एक खास मनुवादी विचारधारा के प्रचार के हथकंडे हैं! यह महज संयोग नहीं कि हाल के बीसेक वर्षों में प्रवचन और कीर्तन करने वालों की संख्या बेतहाशा बढ़ी है!”

श्री उर्मिलेश ने अपील की कि वर्ण-व्यवस्था आधारित धार्मिक आचारों और विचारों के प्रचार के किसी मंच, बाबा या स्वामी को अपने निजी, सामाजिक या धार्मिक जीवन में दाखिल नहीं होने दें! भजन ही सुनना है तो कबीर, रैदास, नानक आदि को सुनिए। देश के अनेक अच्छे गायकों ने उन्हें गाया है! आप फुले, अंबेडकर, पेरियार और नारायण गुरु के विचारों‌ को पढ़ें और सुनें।‌ आपको इस तरह के अनेक वीडियो मिल जायेंगे! ऐसे वीडियो बनायें भी!

उन्होंने कहा कि

“आप अपने 'श्रदधेय' या किसी 'आराध्य' की पूजा करते हैं, कीजिए। पर अपने 'भगवान' और अपने बीच किसी 'डीलर' या 'एजेंट' को मत आने दीजिए। आपने आयोजनों में भी इसी व्यवहार को लागू कीजिए। सब कुछ अपने कीजिए या अपने समाज के किसी व्यक्ति से कराइये! जो आपके दमन-उत्पीड़न को बरकरार रखने के पैरोकार हैं, उन्हीं को आप माला-माल क्यों कर रहे हैं? उनकी दकियानूसी और संविधान से उलट बातें क्यों सुन रहे हैं!

बंद कीजिए, यह सिलसिला! कबीर, रैदास, फुले, नारायण गुरु, अंबेडकर और पेरियार आदि की महान् विरासत को आगे बढ़ाइये!!”

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