झारखंड की रघुवर सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ 24 अक्टूबर को पदयात्रा

''जान जमीन रोजगार बचाओ' नारे के साथ 24 अक्टूबर को पदयात्रा...

झारखंड की रघुवर सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ 24 अक्टूबर को पदयात्रा

''जान जमीन रोजगार बचाओ' नारे के साथ 24 अक्टूबर को पदयात्रा

•             विशद कुमार

झारखंड अलग राज्य गठन के बाद ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी संगठन द्वारा सरकार की तमाम तरह की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ एक विशाल खाका तैयार करके जनप्रतिरोध की जोरदार तैयारी की जा रही है। शायद इसकी वजह यह हो सकती है कि इस कार्यक्रम के आयोजन कर्ता दीपक रंजीत एवं बीरेंद्र कुमार देश के शैक्षणिक संस्थानों में नंबर वन पर माना जाने वाला जेएनयू से शिक्षा हासिल कर लौटे हैं।

झारखण्ड़ जनतांत्रिक महासभा ने देश भर में हो रहे मॉब लिंचिंग के खिलाफ, भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 में संशोधन के खिलाफ, दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, ट्रांसजेंडर और अन्य वंचितों जनों पर बढ़ते हमले तथा आम नागरिकों के संवैधानिक व लोकतांत्रिक अधिकारों पर बढ़ते हमले के खिलाफ, झारखंड में ST, SC, EBC/MBC, OBC का आरक्षण 50% से बढ़ाकर 73% करवाने के लिए, झारखंड में कार्यरत सभी अनुबंधकर्मी (पारा शिक्षक, पारा स्वास्थ्यकर्मी, मनरेगाकर्मी, आँगनबाड़ी सेविका, सहिया, जलसहिया, बिजलीकर्मी, रसोइया एवं अन्य अनुबन्धकर्मी) के स्थायीकरण करवाने के लिए, आगामी 24 अक्टूबर से 30 अक्टूबर 2018 तक, घाटशिला से जमशेदपुर होते हुए राँची तक "झारखंड बचाओ देश बचाओ'', ''जान जमीन रोजगार बचाओ'' एवं ''संघ्-भाजपा मुक्त देश बनाओ'' के नारों और पोस्टरों के साथ पदयात्रा शुरू करने की पूरी तैयारी की जा रही है। उक्त पदयात्रा के लिए आयोजकों द्वारा लगातार बैठकें करके काफी जोर शोर से तैयारी की जा रही है।

यह कार्यक्रम झारखंड अलग राज्य गठन के बाद अपने तरह का पहला कार्यक्रम है जिसकी धमक से रघुवर सरकार में बेचैनी बढ़ गई है। आयोजन कर्ता दीपक रंजीत एवं बीरेंद्र कुमार कहते हैं कि उक्त पदयात्रा में लगभग 2000 लोगों की भागीदारी होगी जिसमें राज्य के पांच प्रमंडल के लोग शामिल होंगे। उन्होंने रघुवर सरकार पर कारपोरेट परस्ती का आरोप लगाते हुए कहा कि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार से कदमताल करते हुए झारखंड की रघुवर सरकार ने झारखंड के अस्तित्व पर ही हमला बोल दिया है। जनता के संवैधानिक लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला तेज कर दिया है। सरकार कॉरपोरेटों द्वारा जल-जंगल-जमीन की खुल्लम-खुल्ला लूट का रास्ता आसान बनाने के लिए सबकुछ कर रही है। जनता के लोकतांत्रिक अधिकार कुचले जा रहे हैं। जनता की एकता तोड़ने के लिए झारखंड की अमन-चैन से जीने की संस्कृति को बर्बाद किया जा रहा है।

भूख से मौतें

देश और झारखण्ड में हाल के दिनों में दर्जन से ज्यादा भूख से मौतें हो चुकी है। जरूरतमंदों को राशन तक नहीं मिल रहा है। गरीबी-बेरोजगारी-पलायन-विस्थापन का दायरा बढ़ता जा रहा है। शिक्षा-चिकित्सा बदहाल है। स्वच्छ पेयजल भी सबको उपलब्ध नहीं है। वहीं दूसरी तरफ देश भर में लगातार दलित समुदाय के ऊपर हमले बढ़े हैं तथा बर्बर तरीके से प्रताड़ित करने की घटनाओं में काफी वृद्धि हुई है। देश भर में महिलाओं के ऊपर अत्याचार, बलात्कार तथा बर्बरतम तरीके से उनकी की हत्या किए जाने की घटनाओं में भी लगातार वृद्धि हो रही है। देश में जनविरोधी किसानविरोधी सरकारी नीतियों की वजह से तथा कृषि क्षेत्र को बिल्कुल भी खत्म करने की सरकारी साजिश की वजह से देश के अंदर हजारों किसान आत्महत्या कर चुके हैं।

भाजपा नेतृत्व वाली झारखण्ड सरकार कॉरपोरेटों के फायदे के लिए जल-जंगल-जमीन की लूट को अधिकतम आसान बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण कानून 2013 में संशोधन कर चुकी है। इस संशोधित कानून के माध्यम से बिना किसी रोक टोक के तथा ग्रामसभा के बिना कोई निर्णायक भूमिका दिये मनमाना अधिग्रहण होगा। लंबे संघर्ष से हासिल अधिकार और खासतौर पर आदिवासियों को हासिल कानूनी सुरक्षा कवच भी खत्म किया जा रहे है। कृषि योग्य जमीन की बेपनाह लूट का रास्ता खोल दिया गया है। खाद्य सुरक्षा भी खतरे में हैं नतीजा भूख का भूगोल बढ़ेगा। पर्यावरण बर्बाद होगां बेरोजगारी-विस्थापन और पलायन बढ़ेगा। कहिए तो झारखंड के अस्तित्व पर संकट बढ़ेगा।

जारी है जमीन लूट

पिछले दिनों सीएनटी-एसपीटी एक्ट को खत्म करने के खिलाफ निर्णायक लड़ाई हुई थी। सरकार को पीछे हटना पड़ा। लेकिन दूसरे रास्ते से लैंड बैंक के जरिए लगभग 21 लाख एकड़ गैरमजरुआ जमीन लूट ली गयी। हाल ही में 210 एमओयू के जरिए 3.10 लाख एकड़ जमीन का सौदा हुआ है।

रघुवर सरकार कॉरपोरेट हित में और भी कदम उठा रही है। ग्रामसभा की भूमिका खत्म कर देने के लिए नौकरशाही के नेतृत्व में ग्राम विकास समिति/आदिवासी विकास समिति के नाम से गैरकानूनी-गैरसंवैधानिक संस्थाओ का निर्माण किया गया है।

इसी बीच ग्राम स्वायत्त सभा की स्वायत्तता की भावना से शुरु हुए पत्थलगड़ी आंदोलन को विवादास्पद गैंगरेप सहित अन्य बहाने से कुचल दिया गया है। यह आंदोलन ग्राम सभा के कानूनी व संवैधानिक अधिकार को बुलंद करने के साथ सचमुच में कॉरपोरेट लूट के खिलाफ जाता है। इस आंदोलन के पक्ष में सोशल मीडिया में लिखने वाले 20 सामाजिक कार्यकर्ताओं-बुद्धिजीवियों पर देशद्रोह का मुकदमा लाद दिया गया है। तथा देश भर में से सामाजिक सरोकार रखने वाले मानवाधिकार कर्मियों-बुद्धिजीवियों को अर्बन नक्सल के नाम से गिरफ्तार कर प्रताड़ित किया जा रह है।

कॉरपोरेट हित में आरएसएस एवं भाजपा के द्वारा जनता की एकता और आंदोलन को तोड़ने व कमजोर करने के लिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के साथ ही आदिवासियों के बीच क्रिश्चन और गैर क्रिश्चन के नाम से विभाजन एवं झारखंडियों के बीच आदिवासी और मूलवासी के बीच विवाद पैदा करने की कोशिश चल रही है। झारखंड के अमन-चैन की संस्कृति में सांप्रदायिक जहर घोलने की योजनाबद्ध कोशिश मॉब लिंचिंग के रूप में सामने आ रही है। दर्जन से भी ज्यादा मॉब लिंचिंग की घटनाओं में मुसलमानों - आदिवासियों एवं अन्य लोगों को गौरक्षा-गौमांस के बहाने क्रूरतापूर्वक मार दिया गया है। आकड़ों की मानें तो मॉब लिंचिंग की घटनाओ में झारखण्ड पहले नंबर पर है। इन हत्यारों को सत्ताधारी भाजपा के विधायक, सांसद एवं मंत्री सम्मानित कर रहे हैं, माला पहना कर साथ में फोटो भी खिचवा रहे हैं। पाकुड़ में आदिवासियों के कार्यक्रम में बोलने गये देश के चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश के ऊपर जान लेवा हमला किया गया, कितना दुर्भाग्यपूर्ण है।

आयोजकों ने आह्वान किया कि ST, SC, EBC/MBC, OBC को मिलने वाले आरक्षण और सामाजिक न्याय पर केन्द्र सरकार हमला कर रही है। आज जरुरी हो गया है कि इस मोर्चे पर भी संघर्ष तेज होना चाहिए। डेढ़ दशक पहले झारखंड कैबिनेट ने एसटी, एससी, इबीसी/एमबीसी व ओबीसी आरक्षण के दायरे को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 73 प्रतिशत करने का फैसला लिया था। हाईकोर्ट के स्टे के बाद जाती-आती सरकार चुप है। सरकार को चाहिए कि 73 प्रतिशत आरक्षण को विधानसभा से पारित कराकर केन्द्र सरकार को भेजे और केन्द्र सरकार 9वीं अनुसूची में डाले। तथा साथ में प्राइवेट क्षेत्र के नौकरियों में भी तथा सभी तरह के ठेका पट्टा में भी ST, SC, EBC/MBC, OBC के लिए आरक्षण लागू करवाने के लिए भी संघर्ष करने की जरूरत है। और इसी कड़ी में हमलोगों को झारखंड राज्य में महिलाओं को हरेक वर्ग के अंदर 50% आरक्षण को लागू करवाने और ट्रांसजेंडर के लिए भी आरक्षण लागू करवाने के लिए एक लंबी लड़ाई लड़ने की जरूरत है।

सब कुछ लुटाया जा रहा है कॉरपोरेटों के ऊपर

कॉरपोरेटों के ऊपर सब कुछ लुटाया जा रहा है। लेकिन लाखों अनुबंधकर्मी (पारा शिक्षक, पारा स्वास्थ्यकर्मी, मनरेगाकर्मी, आँगनबाड़ी सेविका, सहिया, जलसहिया, बिजलीकर्मी, रसोइया एवं अन्य अनुबन्धकर्मी) भूख-फटेहाली झेल रहे हैं। झारखण्ड के अंदर बहुत ही कम मानदेय पर काम करने वाले अनुबंधकर्मियों की संख्या लाखो में हैं, जिन्हें यह मामूली मानदेय भी नियमित रूप से नहीं दिया जा रहा है। अनुबंधकर्मियों की तंगहाली और बीमार होने की स्थिति में ईलाज न हो पाने के कारण दर्दनाक मौतों की खबरें आती रही हैं। सभी अनुबंधकर्मियों का अविलंब नियमितीकरण/सरकारीकरण होना चाहिए, उन्हें सम्माजनक वेतन की गारंटी होनी चाहिए। इन अनुबंधों में आरक्षण के प्रावधानों का पालन नहीं हुआ है। यहां भी आरक्षण के प्रावधानों का कढ़ाई से पालन हो। निजी नौकरियों में भी आरक्षण हो।

फेल हो गया स्किल इंडिया

सरकार रोजगार वृद्धि के नाम पर स्किल इंडिया का जो कार्यक्रम चला रही है, उसको सच में रोजगार नहीं मिल रहा है। पुराने रोजगार प्राप्त लोगों को हटाकर उनकी जगह सस्ते दर पर इन कथित दक्ष लोगों को रखा जा रहा है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्थिति पहले से खराब है। रघुवर सरकार स्कूलों का विलय करके और भी भयावह स्थिति पैदा कर दी गयी है। अब तो उच्च शिक्षा में दिया जाने वाला स्कॉलरशिप को भी बंद करके छात्रों भविष्य बर्बाद कर दिया गया है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी वही हाल है। छोटे से छोटे बीमारी में ग्रामीण जन बेमौत मरते हैं। सरकारी अस्पतालों की हालत खस्ता है। कई जगह 2008 के आसपास प्रखंड स्तर पर स्वास्थ्य केंद्र और उप स्वास्थ्य केंद्र बनकर खड़ा हो गया है। लेकिन उनमें से 99 % प्रतिशत स्वास्थ्य केंद्र डॉक्टरों के अभाव में बंद पड़े हैं और गरीब जनता प्राइवेट हॉस्पिटलों में पैसा लुटाने को मजबूर है।

कार्यक्रम के आयोजन कर्ता अपील करते हुये कहते हैं कि झारखंड का इतिहास प्रतिरोध, संघर्ष और आन्दोलन का इतिहास रहा है। आजादी के पहले से और बाद में भी लगातार हम लड़ रहे हैं। आज जब हमारे अस्तित्व पर चौतरफा व अधिकतम हमला बोल दिया गया है। हमें अधिकतम ताकत संगठित कर प्रतिरोध करना होगा। झारखंड की जनता सत्ता के इर्द-गिर्द चलने वाली विपक्षी राजनीतिक शक्तियों की भी मोहताज नहीं है। वह लड़ रही है। जमीनी स्तर पर प्रतिरोध की शक्तियां मौजूद हैं। स्वतंत्र सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और संघर्षरत संगठन- आंदोलनकारी समूह मैदान में डटे हुए हैं।

झारखंड की संघर्षरत जनता को और बड़ी लड़ाई लड़नी होगी। मौजूदा खतरे को पूरी तरह पहचानना होगा। झारखंड और देश की राजनीति से भाजपा एवं उनसे सहयोगियों पार्टियों को उखाड़ फेंकने की रणनीति बनानी होगी। समाज से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की साम्प्रदायिक राजनीति को बेदखल करना होगा। बाकी पारंपरिक राजनीतिक दलों के मोह से मुक्त रहकर नयी राजनीति धारा विकसित करनी होगी।

आयोजन कर्ताओं ने उपरोक्त मांगो को मुक्कमल अंजाम तक पहुंचाने, एक सही और नयी जन राजनीति बनाने के मकसद से यह पदयात्रा आयोजित किया जा रहा है। इस

पदयात्रा को एक नयी बड़ी एकजुटता का जरिया बनायें, ब्राह्मणवादी, सामंती, पूँजीवादी, साम्प्रदायिक ताकतें RSS-भाजपा तथा मौजूदा केन्द्र और राज्य सरकार के खिलाफ जनता की आवाज को बुलन्द करने और जनआंदोलनों को मजबूत करने के लिए इस पदयात्रा में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने और समर्थन व सहयोग करने की अपील की गई है ।

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