कैसी मजिस्टीरियल जांच किसी को बुलाया नहीं और कोई गया तो मजिस्ट्रेट साहब ही नदारद

फोन रिकार्डों से निकलेगा फर्जी मुठभेड़ों का सच, 100 नंबर और एसएसपी को अधिकतर परिजनों ने फोन पर दी थी सूचना...

कैसी मजिस्टीरियल जांच किसी को बुलाया नहीं और कोई गया तो मजिस्ट्रेट साहब ही नदारद

लखनऊ/आजमगढ़ 4 जुलाई 2018। रिहाई मंच ने पीयूसीएल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा योगी सरकार से एनकाउंटर के मामलों में जवाब तलब किए जाने का स्वागत किया है। जवाब तलब किए जाने बाद डीजीपी ओपी सिंह के बयान की मुठभेड़ों की रणनीति में कोई बदलाव नहीं, पर मंच ने कहा कि डीजीपी योगी सरकार में फर्जी मुठभेड़ों में मारे गए लोगों की जाति को सार्वजनिक कर दें, सब रणनीति सबके सामने आ जाएगी। एडीजी कानून व्यवस्था आनंद कुमार के बयान कि मुठभेड़ में मारे गए 59 मामलों में 25 की न्यायिक जांच पूरी और 23 मामलों में पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाई है जिसमें से 16 को कोर्ट स्वीकार भी कर चुकी है पर मंच ने सवाल खड़े किए हैं।

मंच ने आजमगढ़ के फर्जी मुठभेड़ों मे मारे गए छह लोगों के केसों की स्थिति जारी करते हुए इस जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाया है। पुलिस की फाइनल रिपोर्टों पर सवाल करते हुए कहा कि जो पुलिस एफआईआर की कापी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दे रही है वो फाइनल रिपोर्ट में क्या रिपोर्ट लगाएगी यह तो योगी जी को ही मालूम होगा जिन्होंने ‘ठोक देने’ वाले बयान देकर अपराधी पुलिस वालों के मनोबल को बढ़ाया और अपराधी के नाम पर दलित, पिछड़ों और मुसलमानों की हत्याएं की गई। फर्जी मुठभेड़, रासुका और भारत बंद के नाम पर किए जा रहे उत्पीड़न को लेकर रिहाई मंच ने आजमगढ़ का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल में मसीहुद्दीन संजरी, तारिक शफीक, शाहआलम शेरवानी, सालिम दाउदी के साथ लक्ष्मण प्रसाद, अनिल यादव और राजीव यादव शामिल थे।

डीजीपी योगी सरकार में फर्जी मुठभेड़ों में मारे गए लोगों की जाति को सार्वजनिक कर दें

मानवाधिकार आयोग की जांच के संबन्ध में पूछे जाने पर मुकेश राजभर के भाई सर्वेश राजभर बताते हैं कि उन्हें किसी भी जांच की कोई सूचना नहीं मिली और न ही उन्होंने कोई बयान ही दर्ज करवाया है। जांच के संबन्ध में ठीक यही बात जय हिंद यादव के पिता शिवपूजन यादव बताते हैं कि उनका कोई बयान नहीं दर्ज किया गया है। न तो उन्हें अब तक एफआईआर की कापी ही दी गई है और न ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट। वे बताते हैं कि इसके लिए उन्होंने काफी प्रयास किया पर उन्हें अब तक नहीं मिल सका। वहीं फर्जी मुठभेड़ में मारे गए मोहन पासी के पिता की पहले ही मृत्यु हो चुकी है जिसके चलते उनकी मां गांव में नहीं रहती हैं।

छन्नू सोनकर के भाई झब्बू सोनकर ने एसडीएम सदर आजमगढ़ की अनुपस्थिति में उनके निर्देशानुसार उनके कार्यालय में लिखित बयान दिया। राम जी पासी के भाई दिनेश सरोज ने बताया कि मजिस्ट्रेट के सामने उन्होंने अपना बयान दर्ज करवाया है। राज्य मानवाधिकार आयोग से सूचनार्थ पत्र प्राप्त हुआ पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई या जांच के बारे में उन्हें नहीं मालूम।

एडीजी कानून व्यवस्था आनंद कुमार बताए कि फाइनल रिपोर्ट देने वाली उनकी पुलिस एफआईआर-पोस्टमार्टम की कॉपी क्यों नहीं देती

यहां गौरतलब है कि मानवाधिकार आयोग आजमगढ़ के जय हिंद यादव, राम जी पासी, मुकेश राजभर और इटावा के आदेश यादव की फर्जी मुठभेड़ की जांच कर रहा है। पर जिनके मामलों की जांच हो रही है उन्हें ही इसके बारे में कुछ नहीं मालूम।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा फर्जी मुठभेड़ों पर की जा रही जांचों की स्थिति को जानने के लिए रिहाई मंच प्रतिनिधिमंडल मेहनगर थाने के पास के हटवा खालसा गांव पहुंचा। रामवृक्ष यादव, जिनके दो लड़कों विनोद यादव और पंकज यादव को अन्य युवकों के साथ अलग-अलग जगहों से उठाया गया था और सवाल उठने पर विनोद यादव को पुलिस ने छोड़ दिया और पंकज के पैरों में गोली मारकर फर्जी मुठभेड़ दिखाई थी, को 24 जून को बयान दर्ज कराने के लिए एसएसपी कार्यालय बुलाया गया था। जहां उन्होंने जाकर अपना बयान दर्ज करवाया। उन्होंने अपने बेटों की अवैध हिरासत और फर्जी मुठभेड़ के सवाल को अपने बयान में दर्ज करावाया है। पंकज की मां आज भी 100 नंबर का हवाला देते हुए कहती हैं कि लगातार फोन किया गया पर पुलिस वाले बताए नहीं और सुबह हमारे लड़के के पैर में गोली मारकर बदमाश कह रहे हैं। हमारे लड़के पर कोई मुकदमा नहीं है। वहीं पूर्व में जिला पंचायत सदस्य रह चुके रामवृक्ष यादव कहते हैं बेटे की राजनीतिक पहचान के वजह से वह पुलिस के निशाने पर आ गया।

आज भी पंकज यादव, अजय यादव, राजतिलक सिंह, सुनील यादव जैसे कई लड़के जिनके पैर में पुलिस ने बोरी बांधकर फर्जी मुठभेड़ दिखाकर गोली मारी जेल में कैद हैं। जहां उनका सही से इलाज नहीं हो पा रहा है। गौरतलब है कि पुलिस ने बड़े पैमाने पर फर्जी मुठभेड़ों में लोगों के पैरों में बोरी बांधकर गोली मारी जिसकी वजह से उनके घुटने खराब हो गए हैं।

फोन रिकार्डों से निकलेगा फर्जी मुठभेड़ों का सच, 100 नंबर और एसएसपी को अधिकतर परिजनों ने फोन पर दी थी सूचना

सरायमीर आजमगढ़ के पास पवई लाडपुर गांव के रहने वाले अजय यादव जिन्हें पिछले दिनों फर्जी मुठभेड़ में पैर में गोली मारी गई थी की मां कहती हैं कि बहुत मुश्किल हो गई है। उनके पास इतना पैसा नहीं कि वो जेल में हाल-चाल लेने जा सकें इलाज तो बहुत बड़ा सवाल है। ऐसे में इन लड़कों का ईलाज एक गंभीर सवाल बन गया है।

वहीं परिजनों का पूर्व में आजमगढ़ के एसएसपी रहे अजय साहनी पर आरोप है कि इलाज सही से न हो पाए वे इसकी लगातार कोषिष करते थे जिससे लोगों को पीड़ा हो और इनफेक्षन से उनका पैर काटना पड़ जाए। यह पुलिस के आपराधिक और अमानवीय क्रूर चेहरे को सामने लाता है।

एसओजी के अरविंद यादव की फर्जी मुठभेड़ों में सबसे अधिक आपराधिक भूमिका रही है। अरविंद ने कन्धरापुर थाने पर रहते हुए संजरपुर के आफताब और मोनू को उठाया पर सूचना सार्वजनिक होने के बाद उन्हें छोड़ा। आजमगढ़ में अरविंद को खास तौर पर मुठभेड़ के नाम पर हत्याएं करने के लिए रखा गया है। इसीलिए मीडिया में आई रिपोर्टों में राकेष पासी की फर्जी मुठभेड़ में हत्या की वारदात में बयान एसओजी की तरफ से अरविंद का ही आया जबकि उन्हें कुछ ही दिनों पहले कंधरापुर थाने का चार्ज दिया गया था।

इस फर्जी मुठभेड़ों के खेल में बड़े पैमाने पर जान के बदले धन उगाही की गई। आज तक जयहिंद यादव, राकेश पासी और कई ऐसे परिवार है जिनमें से कई के पास एफआईआर तो किसी के पास पोस्टमार्टम तक की रिपोर्ट नहीं है। जबकि उसको पाने का उन्हें अधिकार है। जो एडीजी के उस बयान पर सवाल उठाता है कि पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी। फाइनल रिपोर्ट लगाने वाली पुलिस अगर सच्ची है तो एफआईआर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने में उसे क्यों डर लग रहा है।

 

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