यूपी में अनिवार्य सेवानिवृत्ति : मजदूरों ने बताया तुगलकी फरमान

यूपी वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने कहा है कि योगी सरकार के मुख्य सचिव द्वारा उ. प्र. में अनिवार्य सेवानिवृत्ति का फैसला तुगलकी फरमान है जिसे वापस लिया जाना चाहिए।...

अनिवार्य सेवानिवृत्ति तुगलकी फरमान - वर्कर्स फ्रंट

लखनऊ, 7 जुलाई 2017। यूपी वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने कहा है कि योगी सरकार के मुख्य सचिव द्वारा उ. प्र. में अनिवार्य सेवानिवृत्ति का फैसला तुगलकी फरमान है जिसे वापस लिया जाना चाहिए।

आज प्रेस को जारी अपने बयान में दिनकर कपूर ने कहा कि सरकार ने सेवाओं में गति व दक्षता सुनिश्चित करने के नाम पर सरकारी कर्मचारियों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति करने का फैसला लिया है। इस आदेश में जिन पूववर्ती शासनादेशों का जिक्र किया गया है उसकी भाषा इसके निहितार्थ को सामने लाती है।

उन्होंने कहा कि शासनादेश कहता है कि ‘50 वर्ष की आयु प्राप्त किसी सरकारी सेवक को उसके नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा बिना कोई कारण बताये तीन मास की नोटिस अथवा तीन मास का वेतन देकर जनहित में अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया जा सकता है।‘ इससे स्पष्ट है कि ‘गति‘ व ‘दक्षता‘ की चाश्नी में लपेट कर असली काम कार्यरत कर्मचारियों की छटंनी कर उन्हें पहले से मौजूद बेरोजगारों की फौज में शामिल होने के लिए मजबूर करना है। यदि गति और दक्षता की बात ही है और कोई कर्मचारी इसे नहीं पूरा कर रहा तो दण्ड देने के और भी तरीके कर्मचारी सेवा नियमावली में है जैसे पदोन्नति रोकना, वेतन वृद्धि पर रोक लगाना, चेतावनी देने, प्रतिकूल प्रविष्टि देना आदि-आदि और यह भी कि जब भाजपा की केन्द्र सरकार पूरे देश में कौशल विकास के नाम पर ढिढ़ोरा पीट रही है तो कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाने के लिए उन्हें प्रशिक्षण भी तो दिया जा सकता है। पर यह न करके कर्मचारियों को जिदंगी की उम्र के उस पड़ाव में जब वह अपनी ऊर्जावान नौजवानी सरकार की सेवा में खपा चुके हो और उनकी परिवारिक जिम्मेदारियां उनके सर पर हो सरकार द्वारा सीधे उन्हें नौकरी से बाहर करना तुगलकी फरमान है।

यूपी वर्कर्स फ्रंट ने सरकार से अपने इस तुगलकी फरमान पर पुनर्विचार करने और इसे अविलम्ब वापस लेने की मांग की है।

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