"मशाल" एक चराग था उन्होंने बुझा दिया, अब किसी और का "मशाल" न बुझने पाए

यूनिवर्सिटी शिक्षा का केंद्र है, वहाँ ज़ुल्म करने या ज़ुल्म सिखाने नहीं जाते हैं, वहाँ हम जाते हैं इंसान बनने, लेकिन मशाल को मारने वाले इंसान नहीं थे, दरिंदे थे।...

हाइलाइट्स
  • मशाल खान का उद्देश्य सबसे बड़ा पत्रकार बनना था।
  • उसने रूस से सिविल इंजीनियरिंग की थी।
  • वो कहता था, मेरा उद्देश्य गोल्ड मेडल नहीं है, मेरा उद्देश्य नोबल प्राइज़ लेना है।
  • फेसबुक ने भी मशाल खान के खाते को याद किया

भारत के रोहित वेमुला और पाकिस्तान के मशाल खान में क्या अंतर है ? सिर्फ यही कि रोहित वेमुला को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया जाता है और मशाल खान को भीड़ घेर कर मार देती है। इस ईशनिंदा से पता नहीं ईश्वर को कुछ बुरा लगता है या नहीं, लेकिन इन ईश रक्षकों की करतूतों से ईश्वर बार-बार शर्मिंदा होता है और इंसान की दरिंदगी पर हैरान होता है कि ये शैतानियत और हैवानियत तो उसने इंसान को न दी थी।

पाकिस्तान में ईश निंदा के कथित आरोप में घेर कर मार दिए गए मशाल खान के केस में अब नया मोड़ आ गया है। आरोप है कि मशाल खान की मरदान यूनिवर्सिटी प्रशासन से तनातनी थी, इसलिए साजिशन मशाल की हत्या कर दी गई। उधर मशाल खान के एक शिक्षक ने उन्हें न बचा पाने के अपराधबोध में इस्तीफा दे दिया है, जबकि पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस मियां साकिब खान ने भी नोटिस लिया है।

पाक मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक खैबर पख्तूनवा के आईजी ने भी कहा है कि मशाल खान के विरुद्ध ईश निंदा का कोई सुबूत नहीं मिलता है।

उधर एक पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक मशाल खान के दोस्त अब्दुल्ला ने अदालत में दिए अपने बयान में कहा कि मशाल ने कभी भी अल्लाह की शान में गुस्ताखी नहीं की, यूनिवर्सिटी प्रशासन मशाल खान के खिलाफ था। मशाल खान ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के गैर जिम्मेदार रवैये और बदइंतजामी के विरोध में यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं का बायकॉट भी किया था। जब मशाल दोस्तों के बुलाने पर यूनिवर्सिटी पहुंचा तो मालूम पड़ा पर कि उस पर ईशनिंदा का आरोप है।

रिपोर्ट के मुताबिक मशाल खान को फोन करके यूनिवर्सिटी बुलवाया गया था और उस पर ईशनिंदा का आरोप लगाया गया। उससे कलमा पढ़कर सुनाने को कहा गया तो मशाल ने कलमा पढ़कर सुनाया और उसका पश्तो व उर्दू में अनुवाद भी सुनाया।

अब्दुल्ला के मुताबिक मशाल खान यूनिवर्सिटी में हॉस्टल की बदइंतजामी को लेकर, परीक्षा व्यवस्था को लेकर और यूनिवर्सिटी प्रशासन के गैर जिम्मेदार रवैये को लेकर काफी टिप्पणियाँ करता था और उसने टीवी चैनलों को भी इस तरह के इंटरव्यू दिए थे।

खास बात यह है कि पिछले सेमेस्टर का मशाल खान ने इसलिए बायकॉट किया था क्योंकि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ऐसे छात्रों को परीक्षा में बैठने से रोक दिया था जो गरीब थे और अपनी गरीबी के चलते फीस जमा नहीं कर पाए थे। यूनिवर्सिटी के इस कदम के विरोध में मशाल खान ने भी परीक्षाओं का बहिष्कार किया था। इसके चलते वली खान यूनिवर्सिटी प्रशासन को झुकना पड़ा था और उन गरीब छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति देनी पड़ी थी।

मशाल के दोस्त अब्दुल्ला ने पुलिस को पेशकश की है कि वह सीसीटीवी फुटेज में दोषियों को पहचान सकता है और अपने दोस्त को इंसाफ दिलाने के लिए किसी भी तरह की मदद के लिए तैयार है।

एक अन्य चैनल को मशाल की बहन ने बताया कि मशाल बहुत प्रतिभाशाली था और उसने कई अवार्ड्स जीते थे, उसका पढ़ाई में रुझान था और किसी को पढ़ता देखकर उसे बहुत खुशी होती थी। मशाल बहुत खामोश रहता था। उसके हाथ में एक कलम होती थी, एक किताब होती थी और सामने लैपटॉप होता था।

चैनल ने मशाल खान के घर का वीडियो शूट करके भी दिखाया, जिसमें कुरआन शरीफ रखी हुई है। उनकी माँ ने बताया कि जाँ-नमाज़ भी वहीं रखी है। सूरःए-रहमान की एक तस्वीर भी मशाल के कमरे में टँगी हुई थी।

मशाल की बहन ने बताया कि मशाल ने कहा था कि यह तस्वीर उसके कमरे में ही लगी रहनी चाहिए, उसे उतारना नहीं है और मशाल इस तस्वीर को मरदान से ही अपने साथ लाया था।

मशाल की बहन ने बताया कि उसका उद्देश्य सबसे बड़ा पत्रकार बनना था। उसने रूस से सिविल इंजीनियरिंग की थी। वो कहता था, मेरा उद्देश्य गोल्ड मेडल नहीं है, मेरा उद्देश्य नोबल प्राइज़ लेना है।

मशाल न सिर्फ हमारे घर का सरमाया था बल्कि इस कौम का सरमाया था।

उनकी माँ ने लोगों से अपील की कि लोग बाहर आएं और मशाल खान की आवाज़ बुलंद करें, वो एक सच्चा इंसान था, फकीर था, मलंग इंसान था।

मशाल खान की बहन ने इमरान खान से अपील की कि वह इंसाफ दिलाएं क्योंकि आज तो हमारे घर का मशाल बुझ गया, लेकिन कल को किसी और के घर का मशाल न बुझे। यूनिवर्सिटी शिक्षा का केंद्र है, वहाँ ज़ुल्म करने या ज़ुल्म सिखाने नहीं जाते हैं, वहाँ हम जाते हैं इंसान बनने, लेकिन मशाल को मारने वाले इंसान नहीं थे, दरिंदे थे।

मशाल खान की बहन ने कहा

“मशाल का गुनाह क्या था, वह सिर्फ सच्चाई कहते थे, अमन-मोहब्बत के अलंबरदार थे।“

उन्होंने एक शेर के मार्फत अवाम को पैगाम दिया

हम सब ये जानते थे कि मंज़िल हमारी ये है/ तालीम तो बस थी मगर इंसान बनना था

We areeducated but still we are not educated”

martyrdom_of_Comrade_Mushal_Khanमशाल खान के एक शिक्षक ज़िया उल्लाह हमदर्द ने उन्हें न बचा पाने के अपराधबोध में इस्तीफा दे दिया था।

हमदर्द ने कहा मशाल एक चराग था और उन्होंने चराग बुझा दिया

सोमवार को फेसबुक ने भी मशाल खान के खाते को याद किया।

सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक ने मृतक को सम्मान देने के लिए यादगार खातों की शुरूआत की थी।

पाकिस्तान में भी मशाल खान की हत्या और ईश-निंदा कानून के गलत इस्तेमाल के खिलाफ जबर्दस्त विरोध देखने को मिल रहा है।

जामिया बिनोरिया के प्रमुख मुफ्ती नईम ने कहा कि सभी संप्रदाय के उलेमा को ईश-निंदा कानून के गलत इस्तेमाल की वजह से हो रहे हिंसक कृत्यों की एक आवाज में निंदा करनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि उलेमा को एक बयान जारी कर कहना चाहिए कि ईश-निंदा के आरोप पर किसी व्यक्ति की हत्या करना 'शरिया और पाकिस्तान के कानून के खिलाफ है।'

मुफ्ती ने कहा कि ईश-निंदा के नाम पर हिंसक घटनाओं के मामले आम होते जा रहे हैं। उन्होंने कहा,

'देश में ईश-निंदा कानून का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। लोग इस कानून की अहमियत खो रहे हैं।'

मुफ्ती का कहना है कि धार्मिक कट्टरवाद तभी खत्म किया जा सकता है जब देश की न्यायिक व्यवस्था मजबूत हो।

वह कहते हैं कि अगर व्यक्ति दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें सजा दी जाए ना कि कोर्ट में सालों घसीटा जाए। अगर वे निर्दोष हैं तो उन्हें आजाद किया जाए।

इस घटना पर पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस मियां साकिब खान ने भी नोटिस लिया है। उन्होंने खैबर पख्तूनवा के इंस्पेक्टर जनरल को 36 घंटे के अंदर मामले की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

इससे पहले धार्मिक मामलों के मंत्री सरदार मोहम्मद यूसफ ने कहा कि ईश-निंदा की अनदेखी नहीं की जा सकती और किसी को भी कानून अपने हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा। मंत्री ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ईश-निंदा कानून का गलत इस्तेमाल ना हो और जो भी ऐसा करे उसे सजा दी जाए।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भी इस घटना की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने कहा है,

'मैं भीड़ के इस नासमझ तमाशे से हैरान और निराश हूँ जिसने वली खान यूनिवर्सिटी के छात्र मशाल खान की जान ले ली। देश कानून हाथ में लेने वालों को बर्दाश्त नहीं करेगा।'

नवाज शरीफ ने कहा कि

'देश को इस अपराध की निंदा करने के लिए एक साथ खड़ा होना चाहिए और समाज में सहिष्णुता व कानून व्यवस्था का प्रचार करना चाहिए।'

Facebook memorialises Mashal Khans account


 

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