RSS को सरकारी सुविधाओं पर नफरत के बीज बोने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिये: मायावती

पेट भरे लोगों पर ही मोदी सरकार का ध्यान.... योग जैसे कार्यक्रमों में धन और समय खर्च करना सरकार का काम नहीं : मायावती...

हाइलाइट्स

पेट भरे लोगों पर ही मोदी सरकार का ध्यान : मायावती

योग जैसे कार्यक्रमों में धन और समय खर्च करना सरकार का काम नहीं

लखनऊ, 20 जून: बहुजन समाज पार्टी - बसपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आज यहाँ कहा कि देश के करोड़ों मेहनतकश बेसहारा ग़रीबों, मज़दूरों, किसानों व बेरोजगारों को रोजगार दिलाकर उनके परिवार का पेट भरने की असली ज्वलन्त समस्या का समाधान करने में केन्द्र व प्रदेश सरकारों की शक्ति, संसाधन व समय का इस्तेमाल करने की वास्तविक संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने के बजाय बीजेपी की मोदी सरकार सरकारी धन व संसाधन का इस्तेमाल ’पेट भरे’ लोगों पर ही ज्यादा केन्द्रित कर रही है और इस कारण ख़ासकर किसान वर्ग का इस गरीब व किसान-विरोधी नीति व कार्यक्रम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन उचित व स्वाभाविक है।

मायावती ने कहा कि वैसे तो देश के ग़रीबों व मज़दूरों व अन्य मेहनतकश लोगों को हर दिन मेहनत- मजदूरी की तलाश करके अपना पेट पालने से ही मुक्ति नहीं है, परन्तु किसानों की गहराती समस्या व उस कारण आत्महत्या करने तक की जर्बदस्त मजबूरी वास्तव में रोजगार की भी बहुत बड़ी समस्या है, जो दिन-प्रतिदिन बीजेपी की वर्तमान सरकार की गलत नीतियों व कार्यकलापों के कारण लगातार गहराती ही जा रही है जिसकी तरफ सरकार का ध्यान आकृष्ट करने के लिये अब शान्ति प्रिय किसान अगले महीने दिल्ली में ’’नीति आयोग’’ का घेराव करने व जन्तर-मन्तर पर धरना देने जा रहे हैं।

बसपा अध्यक्ष ने कहा कि इसके अलावा भी अब तो आई.टी. सेक्टर में भी बड़े पैमाने पर छंटनी व बेरोजगारी की बड़ी समस्या देश के लोगों को सताने लगी है। यह सब बीजेपी सरकार के दौरान ’रोजगार-बिना विकास’ अर्थात रोजगार का सृजन नहीं कर पाने वाले विकास का ही दुष्परिणाम माना जा रहा है। इतना ही नहीं बल्कि बीजेपी सरकार में ’रोजगार-बिना विकास’ होने के कारण देश में रोजगार के अवसर अन्य क्षेत्रों में भी लगातार कम होते जा रहे हैं, परन्तु संकट के ऐसे गंभीर समय में भी बीजेपी की केन्द्र व राज्य सरकारें लापरवाह होकर केवल ’योग’ जैसे कार्यक्रमों पर सरकारी धन, संसाधन व समय खर्च कर रही हैं, जबकि ऐसे लोक कार्यक्रमों के लिये बीजेपी सरकार को नहीं बल्कि आर.एस.एस. जैसी संस्थाओं को उत्तरदायी बनाया जाना चाहिये।

उन्होंने सवाल किया आखिर आर.एस.एस. को मिलने वाली अनेकों प्रकार की सरकारी सुविधायें व छूट आदि का लाभ समाज के सही निर्माण के कार्य में करने के बजाय केवल नफरत के बीज बोने की इजाजत क्यों दी जानी चाहिये?

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