मानवता का ब्रह्मांड में एक ही ठिकाना है- हमारी पृथ्वी... भविष्य में आर्थिक महाशक्ति होगा चीन

चीन की सकल घरेलू आय का 7 फीसद हिस्सा शिक्षा पर व्यय किया जाता है जो आने वाले समय मे 10 प्रतिशत तक ले जाने के प्रयास जारी हैं। कक्षा 9 तक सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त होती है। ...

हाइलाइट्स

सम्भव है कि आने वाले समय मे साम्राज्यवाद के बरअक्स राजनीतिक धुरी रूस बने परंतु आर्थिक महाशक्ति चीन होगा।

यात्राओं से हुआ विचारधारा के विस्तार का अंदाज़ा

सत्यम सत्येंद्र पांडेय 

भोपाल। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य परिषद की बैठक के दौरान आयोजित किये गए विशेष सत्र में विगत दिनों अंतरराष्ट्रीय महत्व के आयोजनों में चीन और रूस की यात्रा करके लौटे कॉमरेड अरविन्द श्रीवास्तव, कॉमरेड विनीत तिवारी और कॉमरेड राहुल भाईजी ने अपने संस्मरण सुनाए। 

सर्वप्रथम प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिवमण्डल के सदस्य साथी विनीत तिवारी ने अपने अनुभव साझा किए, जो विगत दिनों रूस के सोची शहर में आयोजित विश्व युवा एवं विद्यार्थी महोत्सव में भाग लेकर लौटे हैं।

विनीत तिवारी ने कहा कि 2017 का साल महान रूसी समाजवादी क्रांति का शताब्दी वर्ष है। आज भी यह क्रांति हमे भरोसा दिलाती है कि असमानता और शोषण पर आधारित इस पूंजीवादी व्यवस्था को बदला जा सकता है और जनता का असली निज़ाम स्थापित किया जा सकता है जैसा कि सोवियत रूस में हुआ था। उन्होंने वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ डेमोक्रेटिक यूथ के शानदार इतिहास पर रोशनी डाली जो कि दुनिया भर के मुक्तिकामी युवाओं और विद्यार्थियों के संगठनों का एक वैश्विक मंच बनकर उभरा है। हमारे लिये खुशी की बात ये है कि देश की आज़ादी की लड़ाई में शामिल भारत का एकमात्र विद्यार्थी संगठन यानी हमारा ए आई एस एफ इसके संस्थापक संगठनों में से एक है। इसी वैश्विक मंच के माध्यम से प्रत्येक चार वर्षों में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थी युवा महोत्सव आयोजित किया जाता है जो इस बार शीतकालीन ओलंपिक और कॉमरेड स्टालिन के ग्रीष्मकालीन आवास के लिये चर्चित सोची शहर में आयोजित हुआ जो काला सागर के किनारे स्थित है।

विनीत तिवारी ने कहा कि महोत्सव में भारत से वामपंथी और जनवादी संगठनों से करीब 600 प्रतिनिधियों ने हिस्सेदारी की। दुःख की बात ये थी कि रूसी सरकार के अवांछित दखल की वजह से कई दक्षिणपंथी लोग भी इसमे पहुंच गए थे। ऐसा ही इजरायल के मामले भी हुआ जहां से पहली बार प्रतिनिधिमंडल महोत्सव में आमंत्रित किया गया जबकि वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ डेमोक्रेटिक यूथ की असंदिग्ध प्रतिबद्धता फिलिस्तीन की जनता के साथ सदैव रही है। दुनिया के 185 देशों से करीब 25 हज़ार प्रतिनिधि इस महोत्सव में शामिल होने के लिये सोची पहुंचे थे। जिनकी सहायता के लिये 7000 वोलेंटियर भी थे। इतनी विशाल संख्या में दुनिया भर के मुक्तिकामी विद्यार्थियों और  युवाओं को एक साथ बैठकर मानवता की बेहतरी के लिये विचार करते देखकर हमे अपनी विचारधारा की व्यापकता का अहसास हुआ। महान क्रांतिकारी चे ग्वेरा की बेटी इलीडा ग्वेरा से मुलाकात करना भी हमारे लिये एक अविस्मरणीय क्षण था। 

उन्होंने एशिया दिवस के आयोजन के अवसर पर खासतौर पर दक्षिण एशिया में अभिव्यक्ति की आज़ादी पर लगातार बढ़ते खतरों के प्रतिरोध स्वरूप कार्यक्रम का उल्लेख भी किया।

उन्होंने बताया कि पूंजीवादी संकट के इस दौर में लोग सोवियत दौर को याद करते हैं। रूस में इस समय समृद्धि के बावजूद बेरोजगारी तेजी से बढ़ रही है क्योंकि रोजगार विहीन पूंजीवादी विकास का रास्ता ही वहां भी कायम है। रूस के पुराने लोग भारत के साथ दोस्ती को बहुत महत्व देते हैं यह हम लोगों के साथ उनकी गर्मजोशी भरी मुलाकातों से साबित होता रहा। 

उन्होंने रूसी कम्युनिस्ट पार्टी तथा युवा कम्युनिस्ट लीग के साथ अपनी बैठकों का उल्लेख करते हुए बताया कि रूस में पार्टी की सदस्यता और जनाधार में वृध्दि हो रही है। ड्यूमा में भी उनकी उपस्थिति बढ़ी है। 

उन्होंने कहा कि रूस के लोगों को भरोसा है कि इन दुनिया को एकध्रुवीय होने से रूस ही बचा सकता है। उनके इस भरोसे के कारण भी हैं। शायद इसीलिए ही जब रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन इस महोत्सव का उद्घाटन करने आये तो उन्होंने अपने संक्षिप्त भाषण में अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ अपनी भूमिका को स्पष्ट किया। 

इसके पश्चात सीपीआई के राज्य सचिव कॉमरेड अरविन्द श्रीवास्तव ने अपना वक्तव्य दिया, जो इसी माह चीन में आयोजित दुनिया के साझे भविष्य पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भारतीय दल के नेता थे।

अरविन्द श्रीवास्तव ने बताया कि यह सम्मेलन उस सतत प्रक्रिया की शुरुआत था जो चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने दुनिया की बेहतरी और सतत विकास में सबकी सहभागिता को लेकर आरम्भ की है। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में 120 देशों की 300 राजनीतिक पार्टियों के 600 से भी अधिक नेतृत्वकारी लोग उपस्थित हुए जिसमें म्यांमार की विश्वचर्चित नेत्री आँग सान सू की सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और राजनयिक शामिल थे। सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव शी जिनपिंग ने कहा कि चीन अभी समाजवाद की मंजिल तक पंहुचा नहीं है बल्कि हम 2050 तक समृद्धि के साथ समाजवादी समाज बनाने के लिये प्रयास कर रहे हैं। उनका यह भी कहना था कि मानवता का ब्रह्मांड में एक ही ठिकाना है- हमारी पृथ्वी। तो क्यों न दुनिया के सभी विचार, सभी दल और सभी लोग मिलकर परस्पर सहयोग और सहमति से इस दुनिया के विकास के लिये मिलकर कार्य करें ताकि पूरी मानव जाति के लिये समृद्धि लाई जा सके और संसाधनों व पर्यावरण को भी आने वाली पीढ़ियों के लिये बचाया जा सके। उन्होंने स्वीकार किया कि चीन में गरीबी है पर इसके खात्मे के लिये निरंतर प्रयास जारी हैं। किसानों को उनकी उपज का पर्याप्त मूल्य और उनके बच्चों की शिक्षा सरकार की प्राथमिकता में हैं। चीन की सकल घरेलू आय का 7 फीसद हिस्सा शिक्षा पर व्यय किया जाता है जो आने वाले समय मे 10 प्रतिशत तक ले जाने के प्रयास जारी हैं। कक्षा 9 तक सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त होती है। देश के प्रत्येक व्यक्ति का स्वास्थ्य बीमा है। चीन में 56 जनजातीय समूह हैं जिनके लिए  सरकार ने विशिष्ट सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। 

उन्होंने चीन में विज्ञान और तकनीक के विकास की सराहना करते हुए कहा कि उसे बिना देखे अनुभव किया जाना मुश्किल है। लेकिन फिर भी पर्यावरण संरक्षण उनकी पहली प्राथमिकता है। एक समय बीजिंग बहुत प्रदूषित शहर था परंतु उन्होंने सभी शहरों को उद्योग मुक्त करते हुए शहरों को सच मे सुंदर बना लिया है। 

कॉमरेड अरविन्द ने कहा कि सम्भव है कि आने वाले समय मे साम्राज्यवाद के बरअक्स राजनीतिक धुरी रूस बने परंतु आर्थिक महाशक्ति चीन होगा। हालांकि उन्होंने चीन सरकार के इस महत्त्वाकांक्षी प्रयोग की सफलता और योजना पर भी अपने संदेह व्यक्त किये, जिसमें चीन की ऒर से यह अपेक्षा की जा रही है कि सब राजनीतिक दल मिलकर एक साझे भविष्य के लिये काम करें। क्योंकि राजनीतिक भविष्य समाज की राजनीतिक अर्थव्यवस्था से तय होता है जिसमे पूंजीवादी और वामपंथी दलों में मूलभूत भिन्नता है। जब सभी के बीच समन्वय हो सकता है तो फिर मार्क्सवाद की बुनियादी वर्गीय समझ ही गलत साबित हो जाएगी।  इसके अलावा दक्षिणपंथी सम्प्रदायिकता और आतंकवाद के उभार के प्रश्न तो हैं ही। 

गोष्ठी में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक औए युवा साथी शामिल थे जिन्होंने वक्ताओं से सवाल भी किये। गोष्ठी की अध्यक्षता हरिद्वार सिंह व संचालन शैलेंद्र शैली ने किया।

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