न्यूनतम समर्थन मूल्य : घोषणा शरारतपूर्ण, चुनावी चालबाजी और किसानों के साथ धोखाधड़ी

आधे से ज्यादा किसान क़र्ज़ के फंदे में फंसे हैं और इसका एक बड़ा कारण उन्हें लाभकारी समर्थन मूल्य से वंचित करना ही है. मोदी सरकार जिस तरह जुमलेबाजी कर रही है उससे किसानों की आत्महत्या नहीं रुकने वाली...

न्यूनतम समर्थन मूल्य : घोषणा शरारतपूर्ण, चुनावी चालबाजी और किसानों के साथ धोखाधड़ी

रायपुर, 06 जुलाई। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न फसलों के लिए की गई न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा को शरारतपूर्ण, चुनावी चालबाजी और किसानों के साथ धोखाधड़ी करार दिया है. माकपा ने कहा है कि इसके खिलाफ विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर वह किसानों को लामबंद करेगी.

आज यहां जारी एक बयान में माकपा राज्य सचिवमंडल ने कहा है कि चुनावों में भाजपा ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर समर्थन मूल्य देने का वादा किया था. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश सी-2 फार्मूले पर उत्पादन लागत के आधार पर डेढ़ गुना मूल्य देने की थी, जिसमें कृषि जमीन का किराया व कृषि में स्वयं किसान परिवार द्वारा की जा रही मेहनत-मजदूरी भी शामिल है. लेकिन कल मोदी सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य सी-2 फार्मूले के आधार पर न होकर ए-2+एफएल फार्मूले पर आधारित है, जिसमें इन दोनों महत्वपूर्ण कारकों की गणना नहीं की जाती.

माकपा ने सी-2 फार्मूले के आधार पर विभिन्न फसलों के समर्थन मूल्य की गणना का चार्ट भी अपने बयान के साथ नत्थी किया है. इस चार्ट के अनुसार धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2340 रूपये, ज्वर का 3275 रूपये, रागी का 3555 रूपये, मक्का का 2220 रूपये, अरहर का 7472 रूपये, उड़द का 7484 रूपये, मूंग का 9242 रूपये, मूंगफल्ली का 6279 रूपये, सोयाबीन का 4458 रूपये प्रति क्विंटल होना चाहिए. माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा है कि मोदी सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य कृषि मूल्य निर्धारण आयोग द्वारा तय वास्तविक उत्पादन लागत से तथा इस वर्ष भाजपा राज्य सरकारों द्वारा समर्थन मूल्य के लिए भेजी गई सिफारिशों से भी नीचे है और यह अंतर 18% से 31% तक है. पार्टी ने कहा है कि जो थोड़ी-बहुत कीमतें बढ़ी है, उस पर सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की भी कोई गारंटी नहीं की गई है.

माकपा ने कहा है कि देश के आधे से ज्यादा किसान क़र्ज़ के फंदे में फंसे हैं और इसका एक बड़ा कारण उन्हें लाभकारी समर्थन मूल्य से वंचित करना ही है. मोदी सरकार जिस तरह किसानों को लागत मूल्य का डेढ़ गुना मूल्य देने की जुमलेबाजी कर रही है, उससे न तो कृषि संकट हल होने वाला है और न ही किसानों की आत्महत्या रूकने वाली है. किसानों की बदहाली और बर्बादी तथा विनाशकारी कृषि विरोधी नीतियों के खिलाफ माकपा पूरे प्रदेश के किसानों को लामबंद करेगी.

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