भीड़ द्वारा हत्याएं और किसान आत्महत्याएं :15 को वामपंथी पार्टियों का 'नागरिक प्रतिवाद'

सांप्रदायिक भीड़ द्वारा आत्महत्याएं और किसान आत्महत्याएं : 15 को वामपंथी पार्टियां अन्य संगठनों के साथ मिलकर आयोजित करेगी 'नागरिक प्रतिवाद' ...

सांप्रदायिक भीड़ द्वारा आत्महत्याएं और किसान आत्महत्याएं : 15 को वामपंथी पार्टियां अन्य संगठनों के साथ मिलकर आयोजित करेगी 'नागरिक प्रतिवाद'

रायपुर, 09 जुलाई। सांप्रदयिक भीड़ डरा की जा रही हत्याओं और किसान आत्महत्याओं के खिलाफ प्रदेश की पांच वामपंथी पार्टियों ने अन्य संगठनों के साथ मिलकर 15 जुलाई को आंबेडकर प्रतिमा पर 'नागरिक प्रतिवाद' आयोजित करने का फैसला किया है.

आज यहां जारी एक बयान में माकपा, भाकपा, भाकपा(माले)-लिबेरशन, एसयूसीआई(सी) तथा भाकपा(माले)-रेड स्टार समाज के अंदर लगातार पैठ रही सांप्रदयिक मनोवृत्ति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के संजय पराते, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के आरडीसीपी राव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले)-लिबेरशन के बृजेन्द्र तिवारी, सोशलिस्ट यूनिटी सेन्टर ऑफ इंडिया (सी) के विश्वजीत हरोड़े, व भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले)-रेड स्टार के सौरा यादव ने एक संयुक्त वक्तव्य में आरोप लगाया है कि भाजपा और संघी गिरोह द्वारा अपने 'हिन्दुत्व' के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए जिन उपायों का सहारा लिया जा रहा है, उससे समाज का सांप्रदयिक ध्रुवीकरण हो रहा है और यह संगठित भीड़ द्वारा दलितों व अल्पसंख्यकों पर हमलों के रूप में अभिव्यक्त हो रहा है. मात्र अफवाहों या पूर्व धारणाओं के आधार पर हत्याएं की जा रही हैं, हत्यारे खुलेआम सड़कों पर घूम रहे हैं और पीड़ित पक्ष पर ही फ़र्ज़ी मुकदमे थोपे जा रहे हैं. अपनी इन करतूतों को वैधता देने के लिए सत्ता का भी दुरूपयोग किया जा रहा है.

वामपंथी पार्टियों ने प्रदेश में बढ़ रहे कृषि संकट के खिलाफ, जिसकी अभिव्यक्ति किसान आत्महत्याओं में हो रही है, भी गंभीर चिंता व्यक्त की है.

उन्होंने मांग की है कि लागत मूल्य का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में सुनिश्चित किया जाए और किसानों को सरकारी और महाजनी कर्ज़े से मुक्ति के लिए कदम उठाए जाएं, जिसका वादा भाजपा ने चुनावों के दौरान किया था.

वामपंथी पार्टियों ने केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में मवेशियों की खरीदी-बिक्री पर लगाये गए प्रतिबंधों की भी यह कहकर आलोचना की है कि इससे न केवल कृषि अर्थ-व्यवस्था बर्बाद होगी, बल्कि यह दलितों व अल्पसंख्यकों की आजीविका और आम जनता के खानपान की आदतों पर भी हमला है, जिसकी संविधान इज़ाज़त नहीं देता. इस तरह के कानूनों से 'गौ-रक्षा' के नाम पर आम जनता पर हमला करने वाले स्वयंभू सांप्रदायिक गिरोहों की करतूतों को ही वैधता मिलेगी.

वामपंथी पार्टियों ने सभी सामाजिक-नागरिक संगठनों और व्यक्तियों से भी अपील की है कि अपने-अपने बैनरों के साथ 15 जुलाई को घड़ी चौक स्थित अंबेडकर प्रतिमा पर दोपहर 1 बजे इस 'नागरिक प्रतिवाद' में शामिल हों.

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