मोदी सरकार ने जनता को धोखा दिया : दीपंकर भट्टाचार्य

फासीवाद से लड़ने के संकल्प के साथ भाकपा (माले) का 12वां उत्तर प्रदेश राज्य सम्मेलन सम्पन्न...

मोदी सरकार ने जनता को धोखा दिया : दीपंकर भट्टाचार्य

फासीवाद से लड़ने के संकल्प के साथ भाकपा (माले) का 12वां उत्तर प्रदेश राज्य सम्मेलन सम्पन्न

सुधाकर यादव पुनः राज्य सचिव चुने गये

लखनऊ, 9 अक्टूबर। भाकपा (माले) का 12वां उत्तर प्रदेश राज्य सम्मेलन बीते 6 व 7 अक्टूबर को पीलीभीत के बैंकेट हाल (काशीराम बारात घर) में सम्पन्न हुआ।

पहले दिन दोपहर में खुले उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए पार्टी महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि मोदी सरकार ने देश को बांटा है, बर्बाद किया है और देश की जनता को धोखा दिया है। यह सरकार डिस्ट्रॉय एंड रूल, डिसिव एंड रूल और डाइवर्ट एंड रूल की विनाशकारी नीति पर चल रही है। देश की जनता मोदी सरकार से हिसाब बराबर करने के लिए तैयार है। उत्तर प्रदेश और बिहार जिसने 2014 के चुनाव में 100 से अधिक सीट बीजेपी को दी थी, 2019 में भाजपा को जीरो पर आउट कर अपने साथ हुए डबल धोखे का हिसाब चुकायेगी।

महासचिव के अलावा, उदघाटन सत्र को पार्टी की केंद्रीय समिति सदस्य कृष्णा अधिकारी व पीलीभीत के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय शमसा ने भी संबोधित किया।

अध्यक्षता वयोवृद्ध नेता अल्लाउद्दीन शास्त्री व संचालन जिला सचिव देवाशीष रॉय ने किया। शुरुआत में, आये हुए प्रतिनिधियों, पर्यवेक्षकों व अतिथियों का स्वागत पार्टी नेता व पीलीभीत बार एसोसिएशन के अध्यक्ष किशन लाल एडवोकेट ने किया। इस मौके पर पार्टी के पोलित ब्यूरो के सदस्य स्वदेश भट्टाचार्य, पार्टी के उत्तर प्रदेश के प्रभारी व पोलित ब्यूरो के सदस्य रामजी राय, राज्य सम्मेलन के केंद्रीय पर्यवेक्षक व सेन्ट्रल कमेटी के सदस्य राजेन्द्र प्रथोली, यूपी के निवर्तमान पार्टी राज्य सचिव सुधाकर यादव व अन्य नेता उपस्थित थे। सम्मेलन के लिये पीलीभीत शहर के मुख मार्गों को लाल झंडों-बैनरों से सजाया गया था।

शाम को शुरू हुए प्रतिनिधि सत्र में सबसे पहले बिरादराना वाम दलों से आये अतिथियों - भाकपा के उत्तर प्रदेश राज्य सहसचिव अरविंदराज स्वरूप और माकपा के राज्य सचिव मंडल के सदस्य बृजलाल भारती ने संबोधित किया। इसके बाद बिदाई राज्य कमेटी की ओर से राज्य सचिव ने पिछले तीन साल के कामकाज पर आधारित 36 पृष्ठों की राजनीतिक-सांगठनिक रिपोर्ट, जिसमें अगले तीन साल का पार्टी लक्ष्य भी था, पेश की।

रिपोर्ट में मुख्य रूप से देश और प्रदेश में संघ-भाजपा के फासीवाद से लड़ने को मुख्य चुनौती बताया गया था और इसके मद्देनजर 2019 के संसदीय चुनाव का सामना करने को जरूरी तैयारी करने की बात कही गयी थी। इसमें आदित्यनाथ योगी सरकार को प्रदेश के लिये दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा गया था कि इसके आने के बाद सामंती-दबंग ताकतों का मनोबल बढ़ा है और महिलाओं-बच्चियों के साथ रेप की घटनाओं व दलितों-अल्पसंख्यकों पर हमले में बेतहाशा इजाफा हुआ है। प्रदेश में योगी सरकार का एनकाउंटर राज चल रहा है, जिसमें निर्दोषों का फर्जी एनकाउंटर कर सरकार अपनी उपलब्धियों में गिनाती है। योगी सरकार की बहुप्रचारित किसान कर्जमाफी छलावा साबित हुई। सरकार अन्य वादों पर भी खरी नहीं उतरी है। योगी सरकार डेढ़ साल में ही धुर साम्प्रदायिक और दलित-अल्पसंख्यक-महिला विरोधी साबित हुई है। रिपोर्ट पर दो दिनों तक चले बहस-मुबाहिसे में 47 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। महत्वपूर्ण सुझावों व संसोधनों को स्वीकार करने के बाद सदन ने रिपोर्ट को सर्वसम्मति से पारित कर दिया।

अंत में, 45 सदस्यीय नई राज्य कमेटी चुनी गई, जिसमें 5 महिलाएं हैं। केंद्रीय पर्यवेक्षक की देखरेख में गुप्त मतदान से हुए इस चुनाव में 281 उपस्थित प्रतिनिधयों में से 269 ने मताधिकार का प्रयोग किया। नई राज्य कमेटी ने सर्वसम्मति से सुधाकर यादव को फिर से राज्य सचिव चुन लिया।

सम्मेलन में 38 जिलों से 38 महिला प्रतिनिधियों व 4 महिला पर्यवेक्षकों समेत कुल 302 प्रतिनिधियों, पर्यवेक्षकों व अतिथियों ने हिस्सा लिया।

सम्मेलन में राजनीतिक प्रस्ताव पारित कर योगी सरकार में हुए सभी एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए सभी एनकाउंटर की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में न्यायिक जांच कराने, फर्जी मुठभेड़ में मारे गए सभी लोगों के परिजनों को 50-50 लाख मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी और बच्चों-किशोरों की शिक्षा का पूरा प्रबंध करने की मांग की गई । मुठभेड़ में घायलों को 25-25 लाख मुआवजा और इलाज का पूरा इंतजाम भी करने की मांग प्रस्ताव में की गई है। इस प्रस्ताव में कहा गया है कि योगी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा कानून का दुरुपयोग कर रही है। योगी सरकार अपने राजनीतिक विरोधियों के अलावा मुसलमानों, पिछड़ों और दलितों को इस कानून के तहत गिरफ्तार कर रही है। प्रस्ताव में रासुका के तहत सभी गिरफ्तार लोगों को रिहा करने की मांग करते हुए इस काले कानून को खत्म करने की मांग की गई है।

प्रस्ताव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ दर्ज साम्प्रदायिक हिंसा, हत्या, धार्मिक विद्वेष फैलाने के केस की सुनवाई के लिए विशेष अदालत गठित करने, भर्ती परीक्षाओं में हुए भ्रष्टाचार की जांच कराने, पूर्व में हुए भर्ती परीक्षाओं के परिणाम घोषित करने, गंगा एक्सप्रेस वे, फ्रेट कॉरिडोर, फोर लेन, गैस पाइप लाइन योजना के तहत उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगाने, अधिग्रहित भूमि का बाजार दर से चार गुना अधिक मुआवजा देने, भूमिहीनों का सर्वे कराकर उन्हें आवास और खेती के लिए जमीन देने, पट्टे पर दी गई जमीनों पर गरीबों को कब्जा दिलाने, रिजर्व फारेस्ट, बफर जोन के नाम पर जंगल के किनारे के गांवों को उजाड़ने पर रोक लगाने, आंगनबाड़ी, आशा, रसोइयों, ए एन एम, शिक्षा मित्रों, संविदा व ठेके पर कार्य करने वाले सभी कर्मचारियो को समान कार्य के लिए समान वेतन देने और उन्हें रिक्त पदों पर समायोजित करने की मांग की गई है।

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