भांगर - सिंगुर और नंदीग्राम से भी बदतर रूप में दमन

दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर क्षेत्र में बनाये जा रहे 400 किलोवाट के पावर ग्रिड के खिलाफ संघर्ष कर रहे गरीब किसानों पर सिंगुर और नंदीग्राम से भी बदतर रूप में दमन को दोहराया जा रहा है...

अतिथि लेखक
हाइलाइट्स
  • बहु-फसली जमीन पर पावर ग्रिड सब-स्टेशन का निर्माण
  • हजारों किसानों को सता रहा अपनी जमीन और आजीविका छीने जाने का डर
  • जमीन, जीविका एवं पर्यावरण रक्षा समिति बलपूर्वक भूमि अधिग्रहण करने और उपजाऊ, बहु-फसली जमीन पर पावर ग्रिड सब-स्टेशन का निर्माण करने का विरोध करते हुए 11 जनवरी 2017 को भांगर में अनिश्चितकालीन रास्ता रोको आंदोलन किया गया, क्योंकि उस परियोजना से पर्यावरण और परिवेश को जो क्षति होगी उसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता है और उसकी भरपाई भी नहीं की जा सकती है। साथ ही इससे असंख्य किसानों और उनके परिवारों की जिन्दगी और आजीविका तहस-नहस हो जायेगी।

- सौरा यादव

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली मौजूदा तृणमूल कांग्रेस की सरकार 34 साल लंबे वाममोर्चा सरकार के खिलाफ सिंगुर और नंदीग्राम में किसानों का विस्थापन का मुद्दा उठाकर सत्ता में आई हैं।

तब सिंगुर में टाटा और नंदीग्राम में सलेम ग्रुप को जमीन देने के लिए किसानों का बड़े पैमाने पर विस्थापन किया जा रहा था और जबरिया भूमि अधिग्रहण करने के लिए राजकीय दमन का सहारा लिया गया था, जिसमें कई किसानों को अपनी जान गंवानी पड़ी, सैकड़ो घायल हुए थे।

उस समय सत्तासीन वाममोर्चा सरकार को अपने निर्णय को वापस लेते हुए विस्थापन की कार्रवाई को रोकना पड़ा था। लेकिन आज ममता सरकार के नेतृत्व में दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर क्षेत्र में बनाये जा रहे 400 किलोवाट के पावर ग्रिड के खिलाफ संघर्ष कर रहे गरीब किसानों पर सिंगुर और नंदीग्राम से भी बदतर रूप में दमन को दोहराया जा रहा है। 17 जनवरी को हुई पुलिस फायरिंग में दो ग्रामीण मोफीज्जुल शेख और आलमगीर मोल्ला मारे गए, कई लोग घायल हो गए और कुछ लोगों का आज तक पता नहीं चल पाया है।

तृणमूली गुण्डों पर कोई कार्रवाई नहीं

पावर ग्रिड का विरोध करने के लिए बनाई गई 'जमीन, जीविका और पर्यावरण रक्षा समिति’ के नेतृत्वकारियों व भाकपा (माले) रेड स्टार के शीर्ष नेताओं कां. प्रदीप सिंह ठाकुर और कां. शर्मिष्ठा चौधरी, शहनवाज मोल्ला सहित कई अन्य लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया हैं, जबकि अन्य कई नेताओं की गिरफ्तारी के प्रयास किया जा रहा है।

समिति के नेताओं पर हत्या, लूट, आगजनी जैसे गंभीर आरोपों के तहत कार्रवाई की जा रही है, जबकि 17 जनवरी के हमले में पुलिस तथा पुलिस वर्दी में बाहर से आये तृणमूली गुण्डों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

क्षेत्र के हजारों गरीब किसानों द्वारा पुलिस और तृणमूल कांग्रेस के गुण्डों द्वारा किये जा रहे हमलों और दमन के खिलाफ संघर्ष करते हुए अपने नेताओं की रिहाई की मांग कर रहे हैं।

यह मामला तब प्रकाश में आया जब पावर ग्रिड के लिए किसानों से सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस के स्थानीय विधायक के गुण्डों और पुलिस द्वारा जबरन और कई जगहों पर बंदूक की नोक पर करीब 16 एकड़ उपजाऊ कृषि योग्य बहु फसली भूमि अधिग्रहण की गई थी।

बहुत ही कम मुआवजा दिया गया

इस अधिग्रहण के बदले में किसानों को बाजार के रेट के मुकाबले बहुत ही कम मुआवजा दिया गया था। तब यह कहा गया था कि यह बिजली सब-स्टेशन के नाम के लिए है। लेकिन जब कुछ महीने पहले निर्माण शुरू किया गया तो यह स्पष्ट हो गया है कि केन्द्रीय पावर ग्रिड कार्पोरेशन की परियोजना है जो मौजूदा कानूनों, जिसमें घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पावर ग्रिड का निर्माण नहीं किया जाना चाहिए, का उल्लंघन करके जबरिया बनाया जा रहा है।

परियोजना के चलते भांगर, देगंगा और राजारहाट गांव सहित 14 गांवों के लगभग 40000 गरीब किसानों को न केवल भूमि और अपनी आजीविका से हाथ धोना पड़ेगा, बल्कि ग्रिड लाइन राज्य के जिन 6 जिलों से जाएगी, वहां भी हजारों किसानों को अपनी जमीन और आजीविका छीने जाने का डर सता रहा है।

जमीन, जीविका एवं पर्यावरण रक्षा समिति बलपूर्वक भूमि अधिग्रहण करने और उपजाऊ, बहु-फसली जमीन पर पावर ग्रिड सब-स्टेशन का निर्माण करने का विरोध करते हुए 11 जनवरी 2017 को भांगर में अनिश्चितकालीन रास्ता रोको आंदोलन किया गया, क्योंकि उस परियोजना से पर्यावरण और परिवेश को जो क्षति होगी उसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता है और उसकी भरपाई भी नहीं की जा सकती है। साथ ही इससे असंख्य किसानों और उनके परिवारों की जिन्दगी और आजीविका तहस-नहस हो जायेगी।

पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड (जो कि भारत सरकार का उपक्रम है और इसके नवरत्नों में गिना जाता है) द्वारा राजारहाट 400/220 किलोवाट, एस.एफ-6 (सल्फर हेक्साक्लोराइड-6) गैस से इन्सुलेटेड सब-स्टेशन का निर्माण कर रही है। इसके अलावा 953 किलोमीटर लंबी 400 किलोवाट डबल सर्किट,450 मेगावाट पारेषण लाइन बिछाई जायेगी जिसमें 480 किलोमीटर पश्चिम बंगाल से होकर गुजरेगा। जहां से ये लाइन जायेगी वहां के अनेक गांव इससे प्रभावित होंगे। विडम्बना यह है कि पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ने इसे 'राजारहाट सब-स्टेशन’ का नाम दिया है, मगर यह एकदम से दूसरे इलाके में भांगर में बनाई जा रही है जो एक अलग जिले में है।

बंगाल के सात जिलों के लोग होंगे प्रभावित

People of seven districts of Bengal will be affected

पावर ग्रिड कार्पोरेशन की अधिसूचना के मुताबिक इस सब-स्टेशन से जाने वाली पारेषण लाइन बंगाल के सात जिलों यानी कि दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना, नादिया, हुगली, बर्दमान, मुर्शिदाबाद और बीरभूम के 80 गांवों से होकर गुजरेगी। यहां से यह झारखण्ड में प्रवेश करेगी। राजारहाट ग्रिड से निकलने वाली नौ से बारह पारेषण लाइन से अकेले दक्षिण 24 परगना जिले के ही 30,000 लोग प्रभावित होंगे।

सब-स्टेशन एस.एफ-6 (सल्फर हेक्साक्लोराइड-6) गैस का इस्तेमाल होगा जो कि एक अत्यन्त नुकसानदेह ग्रीन हाउस गैस है। साथ ही पारेषण लाइन चालू हो जाने पर इलेक्ट्रो-मैगनेटिक क्षेत्र पैदा होगा। हालांकि एस.एफ-6 गैस के विकल्प के बारे में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी शोध कार्य हो रहा है, मगर पावर ग्रिड के अधिकारी इस गैस का जनता और पर्यावरण पर पडऩे वाले खतरनाक असर से बेफिक्र हैं और इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी तरह पारेषण लाइन बन जाने के बाद किसान अपनी जमीन, फसल और पेड़-पौधों पर अपने अधिकार से वंचित हो जायेंगे।

'फ्लैश ओवर’ से होने वाली क्षति को रोकने तथा पावर लाइन के रख-रखाव के नाम पर पावर लाइन बिछाने वाली कम्पनी विशाल वृक्षों की कटाई कर रही है, खेतों में घुस रही है औेर खड़ी फसलों को साल-दर-साल नुकसान पहुंचा रही है।

वर्ष 2015 से, जब बलपूर्वक भूमि अधिग्रहण का काम शुरू हुआ था तब जनता को पहले यह भरोसा दिलाया गया था कि यहां स्थानीय मांग की पूर्ति के लिए एक छोटा पावर हाउस बनाया जायेगा। लेकिन बाद में लोगों को पता चला कि परियोजना का खाका बड़े स्तर पर तैयार किया गया है और यह पावर हाउस नहीं है, जैसा कि उनको कहा गया था, बल्कि 400 किलोवाट पावर ग्रिड है। हालात उस समय गंभीर हो गये जब पावर ग्रिड कार्पोरेशन ने किसानों की सहमति लिए बगैर उनके खेतों में पारेषण लाइन सपोर्ट ढांचा (टावर) का निर्माण आरम्भ कर दिया। इसके लिए भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय द्वारा जारी मुआवजा भुगतान के दिशानिर्देशों का पालन भी नहीं किया गया।

स्थानीय प्रशासन और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं की पावर ग्रिड कार्पोरेशन के साथ मिलीभगत

Local administration and Trinamool Congress affiliates with power grid corporation

जब जनता ने अपने खेतों में इस प्रकार के निर्माण कार्य का विरोध करना शुरू किया तो पावर ग्रिड कार्पोरेशन ने उपरोक्त दिशानिर्देश की अनदेखी करते हुए कुछ लोगों का नाममात्र का मुआवजा देना शुरू किया। इस मामले में स्थानीय प्रशासन और शासक राजनीतिक दल (तृणमूल कांग्रेस) के नेताओं का पावर ग्रिड कार्पोरेशन के साथ मिलीभगत थी।

इलाके की जनता, जो न केवल अपनी जमीन और आजीविका से वंचित हैं, उन्होंने पावर ग्रिड कार्पोरेशन और प्रशासन के खिलाफ खुद को 'जमीन, जीविका और पर्यावरण रक्षा समिति’ के तहत संगठित किया है। वे विरोध में सड़कों पर उतरे हैं। उन्होंने उपजाऊ कृषि भूमि पर पावर ग्रिड कार्पोरेशन के निर्माण कार्य का विरोध करते हुए तहसीलदार को ज्ञापन दिया। पावर ग्रिड कार्पोरेशन के अधिकारियों ने उनसे मिलने और उनकी शिकायतें सुनने का आश्वासन दिया। लेकिन तय तारीख को, जब इलाके के जनता पावर ग्रिड कार्पोरेशन के कार्यालय पर पहुंची, तो जनता से मिलने के डर से अधिकारी कार्यालय में ताला लगाकर जा चुके थे।

परियोजना को तानाशाही ढंग से बना रहा है पावर ग्रिड कार्पोरेशन

Power Grid Corp. is building the project with authoritarian

जैसा कि स्पष्ट है, पावर ग्रिड कार्पोरेशन इस परियोजना को एकदम तानाशाही ढंग से बना रहा है। वह प्रभावित किसानों से बातचीत करने के लिए भी तैयार नहीं है और एकदम अपारदर्शी तरीका अपना रहा है। सरकार और प्रशासन ने भी किसानों के शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया है।

उद्योग के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण नहीं करने की सरकार की नीति के बावजूद, जिसकी वह बहुत डिंग मारती है, सब-स्टेशन और पावर लाइन के लिए भांगर के गांवों में अत्यन्त उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया है।

मांगपत्र के आधार पर भूमि, आजीविका और पर्यावरण को बचाने के लिए और परियोजना का विरोध करने के लिए क्षेत्र के सभी प्रगतिशील जनवादी ताकतों को शामिल करते हुए समिति का गठन किया गया, जिसके नेतृत्व में व्यापक जन आंदोलन शुरू हुआ। जमीन, आजीविका और पर्यावरण रक्षा समिति के नेतृत्व में 22 दिसम्बर 2016 को राजभवन मार्च और 11 जनवरी 2017 को चक्काजाम किया गया, जिसमें 1 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया।

मगर समिति के साथ चर्चा करने के बजाय, ममता सरकार ने बड़े पैमाने पर पुलिस बल और स्थानीय गुण्डों के साथ मिलकर नाकाबंदी कर आन्दोलन का दमन करने की कोशिश की।

दमन के बावजूद दिन--दिन ताकतवर होता रहा आन्दोलन

दमन के बावजूद आन्दोलन दिन-ब-दिन ताकतवर होता रहा, तब केन्द्र की भाजपा सरकार के समर्थन से राज्य सरकार ने आन्दोलन के नेताओं को निशाना बनाना शुरू किया। क्षेत्र में आयोजित सभा को संबोधित करने और भांगर आन्दोलन में शहीद हुए दो व्यक्तियों के परिवार वालों से मिलने जा रहे भाकपा (माले) रेड स्टार के महासचिव कामरेड केएन रामचंद्रन को कोलकाता रेल्वे स्टेशन से 22 जनवरी को अपहरण किया गया। उन्हें 26 घण्टे गैरकानूनी हिरासत में रखने के बाद आन्दोलनकारियों और राज्य के पार्टी नेताओं समेत शहीदों के परिवार वालों से न मिलने देने के उद्देश्य से जबरिया उनसे मोबाईल एवं 3000 रुपए छिन लिया गया, और गलत रेल टिकिट दिलाकर दिल्ली निर्वासित किया गया।

25 जनवरी को तृणमूल कांग्रेस की गुण्डा वाहिनी और सशस्त्र पुलिस बल द्वारा शांति बहाली के नाम पर ग्रामीणों के बनाये गये बैरिकेट्स को हटा दिया गया। लेकिन स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब शांति बहाली की आड़ में पुलिस ने कई आन्दोलनकारी नेताओं की गिरफ्तारी शुरू कर दी।

हालांकि इस भयावह दमन की कार्रवाई के बावजूद सरकार ग्रामीणों से नेताओं को अलग करने में नाकाम रही है। स्थानीय ग्रामीण मजबूती और आत्मविश्वास के साथ इस तानाशाही कृत्य के खिलाफ खड़े हैं और अपने नेताओं की तत्काल बिना शर्त रिहाई की मांग कर रहे हैं।

इस क्रूर राजकीय आतंक के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में लोगों ने फिर से नाकेबंदी शुरू कर दी है और बड़े पैमाने में तृणमूल कांग्रेस को प्रतिरोध का सामना करना पड़ रहा है।

 

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