कांग्रेस और क्षेत्रीय विपक्षी दलों का आचरण पिछड़ा वर्ग विरोधी- भाजपा

भाजपा ने कहा है कि मोदी के नेतृत्व में भाजपा-नीत सरकार ने समाज के पिछड़े वर्ग के हितों को समर्पित वर्षों से लंबित कार्य को किया है तो ऐसे में कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों का रुख दुर्भाग्यपूर्ण है...

भाजपा का आरोप, कांग्रेस व विपक्ष का रुख पिछड़ा वर्ग विरोधी

भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा-नीत सरकार ने समाज के पिछड़े वर्ग के हितों को समर्पित वर्षों से लंबित कार्य को किया है तो ऐसे में कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों का रुख बेहद निराशाजनक एवं दुर्भाग्यपूर्ण है. कांग्रेस एवं विपक्षी दलों ने जिस तरह से राज्यसभा में राष्ट्रीय सामजिक एवंशैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग के आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने के फैसले का विरोध किया है, पिछड़े वर्ग को लेकर उसकी मूल मनोस्थिति को दिखाता है.

भुवनेश्वर में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस बावत एक प्रस्ताव पारित किया गया।

प्रस्ताव का मूल पाठ निम्नवत् है --

प्रस्ताव क्रमांक-2

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारतीय जनता पार्टी कीसरकार के लक्ष्यों को रेखांकित करते हुए लोकसभा में अपने पहले भाषण में कहा था, “ हम तो पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के आदर्शो से पले हुए लोग है. जिन्होंने हमें अन्त्योदय की शिक्षा दी थी. गरीब को गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने की ताकत दें. शासन की सारी व्यवस्थायें गरीब को सशक्त बनाने के लिए काम आनी चाहिए और सारी व्यवस्थाओं का अंतिम नतीजा उस आखिरी छोर पर बैठे हुए इन्सान के लिए काम आए, उस दिशा में प्रयास होगा, तब जाकर उसका कल्याण हम कर पाएंगे.” माननीय प्रधानमंत्री जी के अपने पहले संबोधनपरप्रतिबद्धता के साथ तीन साल के शासनकाल में मजबूती से इस दिशा में कदम बढ़ाये है.

भारतीयजनतापार्टीप्रधानमंत्रीश्रीनरेंद्रमोदीजी द्वारा राष्ट्रीय सामजिक एवंशैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग के आयोग को संवैधानिक दर्जा दिए जाने के फैसले का स्वागत और अभिन्दन करती है. आजादी के 70 साल बाद किसी सरकार द्वारा समाज के गरीब दूर-दराज के क्षेत्रों में जीवन यापन कर रहे पिछड़ा समाज के हितों में लिया गया एक ऐतिहासिक, दूरदर्शी और अभूतपूर्व निर्णय है.  समाज के कमजोर वर्गों की न्याय देने के लिए लम्बे समय से अपेक्षित मांग को पूरा किया गया है.

इस ऐतिहासिक कदम के लाभ:

इस ऐतिहासिक फैसले से समाज के सभी पिछड़े वर्ग के लोगों को न्याय मिलेगा. मौजूदा पिछड़ा वर्ग आयोग एक साधारण क़ानूनी निकाय है, जिसका कार्य सरकार को जातियों/समुदायों की सूचियों में शामिल करने अथवा निकालने के संबंध में सलाह देना है. अब इस आयोग को सांविधिक निकाय के रूप में एनसीएससी और एनसीएसटी के बराबर का दर्जा मिल जायेगा. यह आयोग पिछड़ा वर्ग के संरक्षण, कल्याण, और विकास तथा उन्नति से संबंधित अन्य कार्यों का भी निर्वहन करेगा.यह आयोग संविधान के अंतर्गत आने वाले अनुच्छेद 16-4 एवं 15-4 के निहित अधिकारों का प्रयोग करते हुए सामजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े हुए वर्ग को सशक्त करते हुए उनको न्याय देगा.

समतामूलक समाज निर्माण का लक्ष्य भाजपा की प्रतिबद्धता रही है और भाजपा सरकार ने इस फैसले से उस दिशा में एक कदम बढ़ाया गया है. एक न्यायपूर्ण भारत और समतामूलक समाज की परिकल्पना को मूर्त रूप देने की क्षमता माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा लिए गए इस अहम निर्णय में अंतर्निहित है.

कांग्रेस और क्षेत्रीय विपक्षी दलों का पिछड़ा वर्ग विरोधी आचरण:

आज माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा-नीत सरकार ने समाज के पिछड़े वर्ग के हितों को समर्पित वर्षों से लंबित इस कार्य को किया है तो ऐसे में कांग्रेसएवंअन्यविपक्षी दलों का रुख बेहद निराशाजनक एवं दुर्भाग्यपूर्ण है. कांग्रेस एवं विपक्षी दलों ने जिस तरह से राज्यसभा में इसका विरोध किया है, पिछड़े वर्ग को लेकर उसकी मूल मनोस्थिति को दिखाता है. यह सच है कि देश में लंवे समय तक शासन में रहने के बावजूद कांग्रेस पिछड़ा वर्ग के हितों का यह काम नहीं कर पाई. अब जब भाजपा को शासन का जनादेश मिला है तो भाजपा की सरकार ने वरीयता में रखकर इस कार्य को किया है. आजादी के बाद काका कालेकर कमीशन (1950) और मंडल आयोग (1979) की रिपोर्ट के बावजूद भी तत्कालीन कांग्रेस की सरकारों द्वारा इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया. विदित है कि इस अहम निर्णय को लागू करने के संबंध में ओबीसी संसदीय समिति की सिफारिश भी आई और सभी दलों के सांसदों ने व्यक्तिगत रूप से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से मुलाक़ात करके इस संबंध में संविधान में संशोधन करने का आग्रह किया था. इस दिशा में सरकार ने ठोस कदम उठाते हुए इसे लोकसभा में सर्वसम्मति पारित भी करा लिया. लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के पिछड़े तबके के लोगों को सशक्त बनाने और उन्हें न्यायिक रूप से और मजबूत करने की दिशा में उठाए गए इस कदम को राज्यसभा में विरोध करके रोक दिया गया है. राजनीति में राजनीतिक विरोध चलते हैं, आरोप-प्रत्यारोप भी होते हैं, लेकिन गरीब और हाशिये के समाज के लिए हो रहे किसी फैसले को अपनी राजनीति के लिए रोकना कहीं से भी उचित नहीं कहा जा सकता है. कांग्रेस एवं विपक्षी दलों द्वारा राजनीति में सिर्फ इस बात के लिए इस निर्णय का विरोध करना उचित नहीं कहा जा सकता है कि अमुक काम लंबे समय तक शासन में रहने के बावजूद वे इस काम को नहीं कर पाए और भाजपा की सरकार ने कर दिया. एकओर कांग्रेस व विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया वही भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष  श्री अमितशाहजी के नेतृत्व में सभी एनडीए दलों एवं मुख्यमंत्रीयोंने इसको समर्थन देकर माननीय प्रधानमंत्री जी का आभार व्यक्त किया. 

भारतीय जनता पार्टी सभी कार्यकर्ताओं एवं सामाजिक संस्थाओंसे आह्वान करती है कि समतामूलक समाज के निर्माण के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी के इस ऐतिहासिक फैसले के महत्त्व को दूरस्थ क्षेत्रों के गरीब एवं पिछड़े वर्गों तक पहुंचाए. पार्टी के सभी नेताओंकोगरीब वर्गों के संवैधानिक एवं क़ानूनी अधिकारों के जागरण का प्रयास करना चाहिए और इसके साथ-साथ विपक्षी दलों के पिछड़ा वर्ग विरोधी आचरण का पर्दाफाश भी करना चाहिए.भारतीय जनता पार्टी गरीबों को दिए गयेइस ऐतिहासिक संवैधानिक अधिकार पर माननीय प्रधानमंत्री जी हार्दिक अभिनंदन एवं स्वागत करती है.

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