अच्छे दिन : विद्युत् वितरण में बड़े घोटाले की तैयारी, दो दिवसीय हड़ताल पर जाएंगे बिजली इंजीनियर

बिजली उत्पादन में हुए घोटाले के बाद अब विद्युत् वितरण में बड़े घोटाले की तैयारी...

अच्छे दिन : विद्युत् वितरण में बड़े घोटाले की तैयारी, दो दिवसीय हड़ताल पर जाएंगे बिजली इंजीनियर

इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट ) बिल एवं निजीकरण के विरोध में 8 एवं 9 जनवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल

बिल पहले पारित करने की कोशिश हुई तो लाइटनिंग हड़ताल होगी

नई दिल्ली, 30 सितंबर। नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्पलॉईस एंड इन्जीनियर्स ( एनसीसीओईईई ) ने निर्णय लिया गया है कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट ) बिल 2014 एवं केंद्र व् राज्य स्तर पर चल रही निजीकरण की कार्यवाही के विरोध में देश के लगभग 15 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर आगामी 8 व 9 जनवरी को दो दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल करेंगे। हड़ताल का निर्णय देश भर की सभी ट्रेड यूनियनों की संयुक्त बैठक में लिया गया जिसकी अध्यक्षता ऑल इण्डिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने की।

नेशनल कोआर्डिनेशन कमीटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्पलॉईस एंड इन्जीनियर्स ने यह भी एलान किया है कि यदि इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट ) बिल 2014 को संसद के शीतकालीन सत्र में पहले पारित कराने की कोशिश हुई तो बिना और कोई नोटिस दिए देश भर के बिजली कर्मचारी व् इंजीनियर उसी समय लाइटनिंग हड़ताल पर चले जाएंगे। एनसीसीओईईई की 29 सितम्बर को दिल्ली में हुई मीटिंग में यह भी निर्णय लिया गया कि राष्ट्रीय टेड यूनियनों के आह्वान पर देश के सभी सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में निजीकरण के विरोध में 8 व् 9 जनवरी को होने वाली हड़ताल का बिजली कर्मी पूरा समर्थन करते हैं।

बिजली उत्पादन में हुए घोटाले के बाद अब विद्युत् वितरण में बड़े घोटाले की तैयारी

एनसीसीओईईई ने कहा है कि बिजली उत्पादन के क्षेत्र में निजी घरानों के घोटाले से बैंकों का ढाई लाख करोड़ रुपया पहले ही फंसा हुआ है किन्तु निजी घरानों पर कोई कठोर कार्यवाही करने के बजाय केंद्र सरकार नए बिल के जरिये बिजली आपूर्ति निजी घरानों को सौंप कर और बड़े घोटाले की तैयारी कर रही है।

ऑल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने बताया कि नेशनल कोआर्डिनेशन कमीटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्पलॉईस एंड इन्जीनियर्स की समन्वय समिति में ऑल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन, ऑल इण्डिया फेडरेशन ऑफ़ पॉवर डिप्लोमा इंजीनियर्स, इलेक्ट्रिसिटी इम्पलॉईस फेडरेशन ऑफ़ इण्डिया (सीटू), ऑल इन्डिया फेडरेशन ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्पलॉईस (एटक ),इण्डियन नेशनल इलेक्ट्रिसिटी वर्कर्स फेडरेशन (इन्टक ), ऑल इन्डिया पावरमेन्स फेडरेशन तथा राज्यों की अनेक बिजली कर्मचारी यूनियन सम्मिलित हैं।

शैलेन्द्र दुबे की अध्यक्षता में दिल्ली में हुई मीटिंग में के ओ हबीब, मोहन शर्मा, पी एन चौधरी, एस एम सिंह, के अशोक राव, समर सिन्हा, जी के मिश्र, राजीव सिंह, सदरुद्दीन राना, कुलदीप कुमार और अन्य प्रमुख पदाधिकारी सम्मिलित हुए।

शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट ) बिल के जनविरोधी प्रतिगामी प्राविधानों का एनसीसीओईईई और ऑल इण्डिया पॉवर इन्जीनियर्स फेडरेशन प्रारम्भ से ही विरोध करता रहा है और इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार को लिखित तौर पर कई बार दिया जा चुका है। एनसीसीओईईई और पूर्व विद्युत् मंत्री पीयूष गोयल के मध्य कई बार हुई वार्ता में पूर्व विद्युत् मंत्री बिल के कई प्राविधानों में बदलाव करने या उन्हें हटाने पर सहमत हो गए थे किन्तु इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार द्वारा जारी किये गए संशोधित ड्राफ्ट में बिजली कर्मियों के साथ सहमति के बिंदुओं का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।  

एनसीसीओईईई ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि इसके पहले बिल पारित कराने की कोशिश की गयी तो उसी दिन विरोध स्वरुप देश भर के बिजली कर्मी लाइटनिंग हड़ताल करेंगे।

क्या है इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट ) बिल

बिल के अनुसार बिजली वितरण और विद्युत् आपूर्ति के लाइसेंस अलग अलग करने तथा एक ही क्षेत्र में कई विद्युत् आपूर्ति कम्पनियाँ बनाने का प्राविधान है। बिल के अनुसार सरकारी कंपनी को सबको बिजली देने (यूनिवर्सल पावर सप्लाई ऑब्लिगेशन ) की अनिवार्यता होगी जबकि निजी कंपनियों पर ऐसा कोई बंधन नहीं होगा। स्वाभाविक है कि निजी आपूर्ति कम्पनियाँ मुनाफे वाले बड़े वाणिज्यिक और औद्योगिक घरानों को बिजली आपूर्ति करेंगी जबकि सरकारी क्षेत्र की बिजली आपूर्ति कंपनी निजी नलकूप, गरीबी रेखा से नीचे के उपभोक्ताओं और लागत से कम मूल्य पर बिजली टैरिफ के घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति करने को विवश होगी और घाटा उठाएगी ।

श्री दुबे ने कहा कि घाटे के नाम पर बिजली बोर्डों के विघटन का प्रयोग पूरी तरह असफल साबित हुआ है। एनसीसीओईईई की मुख्य माँग इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट ) बिल को वापस लेना, इलेक्ट्रिसिटी ऐक्ट 2003 की पुनर्समीक्षा और राज्यों में विघटित कर बनाई गयी बिजली कंपनियों का एकीकरण कर बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण का केरल और हिमाचल प्रदेश की तरह एक निगम बनाना है। उल्लेखनीय है कि केरल में बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण का एक निगम केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड और हिमाचल प्रदेश में हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड लिमिटेड कार्य कर रहा है।

बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की अन्य मांगें विद्युत् परिषद् के विघटन के बाद भर्ती हुए कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली, समान कार्य के लिए समान वेतन, ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर नियमित प्रकृति के कार्यों हेतु संविदा कर्मियों को वरीयता देते हुए तेलंगाना की तरह नियमित करना, बिजली का निजीकरण पूरी तरह बंद करना और प्राकृतिक संसाधनों को निजी घरानों को सौंपना बंद करना मुख्य हैं।

उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी संविधान की समवर्ती सूची में है और राज्य का विषय है किन्तु यदि इलेक्ट्रिसिटी (अमेण्डमेंट ) बिल पारित हो गया तो बिजली के मामले में केंद्र का वर्चस्व बढ़ेगा और राज्यों की शक्ति कम होगी इस दृष्टि से भी जल्दबाजी करने के बजाये संशोधन बिल पर राज्य सरकारों, बिजली उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों की राय ली जानी चाहिए।

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