मेहनताने के 150 रूपये मांगने पर 6 सालों से सह रहा है पुलिसिया कहर, अब हुई दरोगा को सजा

कृष्ण कुमार के मुद्दे को लेकर संघर्ष करने वाले सामाजिक संगठन जन संघर्ष मंच हरियाणा के अध्यक्ष फूल सिंह कहते हैं, कृष्ण कुमार का मामला पुलिस तंत्र के क्रूर सत्य को नंगा करता है। ...

अतिथि लेखक

 

पिटाई करने वाले दरोगा को अदालत ने सुनाई डेढ़ साल की सजा

कविता विद्रोही

कुरुक्षेत्र। पुलिस जुल्म की तो बहुत सारी कहानियां हमने सुनी हैं लेकिन पुलिसिया तंत्र के इस जुल्म के विरुद्ध जद्दोजह्द करने वाले बहुत कम होते हैं। गरीब व पिछड़े वर्ग से संबंध् रखने वाला कृष्ण कुमार भी एक ऐसा नाम है जिसने पुलिस द्वारा की गयी ज्यादती का विरोध करने की जुर्रत दिखाई। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि उसने अपनी मेहनत के 150रूपये पुलिस कर्मचारी से मांग लिए थे। उसे मेहनताना तो न मिला लेकिन पुलिस कर्मचारी से पैसे मांगने की जुर्रत पर उसकी बुरी तरह पिटाई कर दी गई और जब उसने इस ज्यादती के विरुद्ध आवाज उठाई तो उसके उपर झूठे केसों का सिलसिला शुरू हो गया। लेकिन उसने हिम्मत न हारी और लगातार छह साल लड़ाई लड़ते हुए दोषी पुलिस कर्मचारी को अदालत में सजा दिलाई।

पेशे से धोबी, कृष्ण कुमार पुलिस चौकी पिहोवा के पास कपड़े प्रेस करने की दुकान करता था, उसके पास पुलिस की वर्दियां प्रैस करने के लिए आती थीं। 19 नवंबर 2010 को वह सरस्वती पुलिस चौकी में तैनात हवलदार नागेन्द्र सिंह से अपनी मजदूरी के 150 रूपये लेने के लिए पुलिस चौकी गया तो नगेन्द्र सिंह आग बबूला हो गया और उसके मुंह पर मुक्का मार कर दांत तोड़ दिया और उसे बुरी तरह पीटा।

उसके बाद मुंशी व सिपाही उसे एम्बुलैंस में सरकारी अस्पताल पिहोवा ले गए। डॉक्टरों ने पुलिस की मिलीभगत से मेडिकल बनाने से मना कर दिया। उसके बाद पीड़ित को एल.एन.जे.पी. अस्पताल कुरुक्षेत्र में इलाज के लिए आना पड़ा मगर यहां भी पुलिस अध्किारियों के प्रभाव में डॉक्टरों ने मेडिकल करने से मना कर दिया। फिर उसने एस.पी. कार्यालय में गुहार लगाई लेकिन यहां भी उसकी सुनवाई न हुई।

परेशान होकर कृष्ण कुमार ने पिहोवा कोर्ट में केस किया।

पिहोवा अदालत ने दोषी नागेन्द्र सिंह को अक्तूबर 2011 को अदालत में दिए तथ्यों के आधर पर सम्मन जारी कर दिए, उस समय नागेन्द्र सिंह पदोन्नत होकर पिहोवा में सहायक उपनिरीक्षण के पद पर तैनात हो चुका था।

कृष्ण कुमार अपनी आपबीती बताता हुआ कहता है, “ इसके बाद तो मेरे ऊपर पुलिसिया जुल्म का दौर शुरू हो गया। पुलिस वाले मुझे धमकियां देते रहे। मेरे ऊपर केस वापिस लेने का दबाब बनाते रहे, मुझे सबक सिखाने के लिए गंभीर मामलों में फंसाने की धमकियां दी गईं। सिंतबर 2012 में तो मेरे खिलाफ तीन मामले दर्ज कर दिए गए, इनमें शराब पीकर हुडदंग करने का केस, कार चोरी करने का केस, एन.डी.पी.एस. का केस दर्ज किया।

यह झूठे केस बनाने का सिलसिला यहीं नहीं रूका, 2013 में तीन और मामले, पिहोवा के एक मंदिर में चोरी का केस, गैस सिलेंडर चोरी का मामला और साईकिल चोरी का मामला दर्ज किया गया। साईकिल चोरी का मामला छोड़कर, जोकि अभी अदालत में विचाराधीन है, बाकि सभी पांच मामलों में अदालत ने मुझे बरी कर दिया है।“

पीड़ित की वकील सुदेश कुमारी का कहना है, कुरुक्षेत्र न्यायधीश अरविंद कुमार बसंल की अदालत ने विचाराधीन उक्त मामले में एएसआई नागेन्द्र को दोषी करार दिया गया है। अदालत ने एएसआई नागेन्द्र को आईपीसी की धरा 325 में डेढ़ साल की सजा और 10 हजार रूपये जुर्माना, धरा 323 में छह माह की कैद व एक हजार रूपये जुर्माना किया है। पीड़ित को निचली अदालत से तो इन्सापफ मिल गया अब आशा करते हैं आगे भी उसे न्याय मिलेगा।

कृष्ण कुमार के मुद्दे को लेकर संघर्ष करने वाले सामाजिक संगठन जन संघर्ष मंच हरियाणा के अध्यक्ष फूल सिंह कहते हैं, कृष्ण कुमार का मामला पुलिस तंत्र के क्रूर सत्य को नंगा करता है। इस लड़ाई को लड़ते समय एक ओर जहां कृष्ण और उसके परिवार को मानसिक और शारीरिक पीड़ा से गुजरना पड़ा है वहीं लोगों ने भी उसका डट कर साथ दिया है। कृष्ण कुमार को एनडीपीएस के मामले में झूठा फंसा कर गिरपफ्तार किए जाने के विरोध में लोगों द्वारा कुरुक्षेत्र पुलिस का डट कर विरोध् किया गया।

कृष्ण कुमार की मां रोशनी देवी को उसके बेटे के खिलाफ अदालत में विचाराधीन छठे केस की चिंता भी सता रही है। वह रोकर कहती है, देश में गरीबों की कोई सुनवाई नहीं। यदि लोगों का साथ न होता हममें भी इस लड़ाई को लड़ने का हौसला नहीं होता। छह साल लगातार हमने पुलिसिया आतंक झेला है, यहां तक कि पुलिस ने मुझे भी नहीं बख्शा, न्याय की गुहार लगाने पर मुझ पर भी झूठा केस बना दिया गया था। कुछ संतोष है कि इंसाफ की उम्मीद बंधी है पर जिस पीड़ा से हम छह साल से गुजर रहे हैं वह असहनीय है।

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