कारपोरेट घरानों और भूमाफियाओं की चारागाह बन गया है मध्यप्रदेश

सम्मेलन में नर्मदा विस्थापितों के पूर्ण पुनर्वास के बिना कॉपोरेट के मुनाफे के लिये घाटी में की जाने वाली जल ह्त्या जैसी स्थिति पर भी विचार कर एक तात्कालिक आंदोलन की घोषणा को मंजूरी दी...

हाइलाइट्स

सम्मेलन ने देश भर में सक्रिय एक सैकड़ां किसान आन्दोलनों के संयुक्त मंच "भूमि अधिकार आंदोलन" की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी एक मंच का गठन किया। जो हर विस्थापन प्रभावित इलाके तक जाकर पहले तहसील तथा जिला स्तरीय जेल भरो सत्याग्रह करेगा उसके बाद राजधानी में अनिश्चितकालीन घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन किया जाएगा।

नर्मदा सहित सारे विस्थापन के विरुद्ध साझी लड़ाई का एलान : भू अधिकार आंदोलन गठित

भोपाल। मध्यप्रदेश के किसान संगठनों, खेत मजदूर , विस्थापन के शिकार गाँव-शहर के नागरिकों-गरीबों-कामगारों, सामाजिक आन्दोलनों का साझा सम्मेलन आज गांधी भवन में संपन्न हुआ।

सम्मेलन ने नोट किया कि मध्यप्रदेश पूरी तरह से कारपोरेट घरानों और भूमाफियाओं की चारागाह बन गया है। केंद्र की नरेंद्र मोदी तथा प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार द्वारा चंद औद्योगिक घरानों और भूमाफियाओं के हितों को संरक्षण देने के लिए प्रदेश के किसानों, ग्रामीण गरीबों, विशेषकर दलितों और आदिवासियों को उनकी पीढिय़ों से काबिज जमीनों से बेदखल किया जा रहा है। सम्मेलन में शामिल करीब चालीस से अधिक संगठनों ने इस जबरिया विस्थापन-जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की लूट के खिलाफ लड़ने तथा सभी आन्दोलनों में समन्वय बनाने के निर्णय लिये। पुनर्वासविहीन विस्थापन के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर चर्चा कर भूमि सम्बन्धी सवालों पर साझे आंदोलन के लिए कार्यनीति बनाई गयी।

सम्मेलन में नर्मदा विस्थापितों के पूर्ण पुनर्वास के बिना कॉपोरेट के मुनाफे के लिये घाटी में की जाने वाली जल ह्त्या जैसी स्थिति पर भी विचार कर एक तात्कालिक आंदोलन की घोषणा को मंजूरी दी - इसके तहत 15 -16 सितम्बर को प्रदेश भर में मशाल जलूस निकालकर तथा 17 सितम्बर को धरने तथा विरोध प्रदर्शन करके प्रधानमंत्री मोदी के जन्म दिन पर बिना पुनर्वास किये सरदार सरोवर बाँध के लोकार्पण को न किये जाने की मांग की जाएगी। इसी के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी मांग की जाएगी कि मध्यप्रदेश की जनता की जल समाधि पर होने वाले इस नीरो जैसे विद्रूप आयोजन में वे न जाएँ।

सम्मेलन ने देश भर में सक्रिय एक सैकड़ां किसान आन्दोलनों के संयुक्त मंच "भूमि अधिकार आंदोलन" की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी एक मंच का गठन किया। जो हर विस्थापन प्रभावित इलाके तक जाकर पहले तहसील तथा जिला स्तरीय जेल भरो सत्याग्रह करेगा उसके बाद राजधानी में अनिश्चितकालीन घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन किया जाएगा।

सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे संगठनो में प्रमुख रूप से अखिल भारतीय किसान सभा, एनएपीएम, नर्मदा बचाओ आन्दोलन,अखिल भारतीय किसान सभा, आल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन, अखिल भारतीय किसान महासभा, अखिल भारतीय क्रांतिकारी किसान सभा, आदिवासी एकता महासभा, किसान संघर्ष समिति, खेत मजदूर युनियन, बरगी बाँध विस्थापित एवं प्रभावित संघ, चुटका परमाणु संयंत्र संघर्ष समिति, मध्यप्रदेश सूचना के अधिकार का जन अभियान, रोको-टोको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा, भू-अधिकार आन्दोलन मध्यप्रदेश, किसान संघर्ष समिति झांसीघाट नरसिंहपुर, भारतीय गोंडवाना पार्टी, आम आदमी पार्टी, किसान जाग्रति संगठन तथा दलित अधिकार मंच सहित अन्य अनेक किसान-खेतमजदूर-आदिवासी संगठन शामिल थे।

किसान सभा के अध्यक्ष जसविंदर सिंह के संचालन में हुए सम्मेलन को सम्बोधित करने वालों में मेधा पाटकर, बादल सरोज, राजकुमार सिन्हा, अशोक तिवारी (चम्बल), उमेश तिवारी (सीधी-सिंगरौली), श्यामा बहन (नर्मदा बचाओ आंदोलन), प्रह्लाद वैरागी (किसान सभा), राजेश तिवारी (बरगी बाँध), नवरत्न दुबे (चुटका संघर्ष समिति),पोह पटेल (झांसीघाट),बद्रीप्रसाद (क्रांतिकारी किसान सभा), पंकज सिंह (आम आदमी पार्टी), गुलजार सिंह मरकाम (भारतीय गोंडवाना पार्टी),मनीष श्रीवास्तव(अ भा किसान मजदूर संगठन), के के शुक्ला (लिलजी बाँध), प्रेमनारायण माहोर (बेसली बाँध), अरुण चौहान (महू), रामजीत सिंह (सीमेंट विस्थापन),बलराज सिंह (आदिवासी विस्थापन), शैलेन्द्र कुमार शैली (स्मार्ट सिटी -शहरी विस्थापन) शामिल थे।

वरिष्ठ पत्रकार लज्जा शंकर हरदेनिया जी ने नर्मदा विस्थापन पर जांच के लिए गए दल की रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि नर्मदा घाटी में सारी शर्म-हया छोड़कर खुद सरकार गैरकानूनी कामों में जुटी है ताकि कुछ कारपोरेट कंपनियों को फ़ायदा पहुंचाया जा सके।

सम्मेलन के अध्यक्ष मंडल में अशोक तिवारी (किसान सभा),उमा प्रसाद विश्वास (अ भा किसान मजदूर संगठन), उमेश तिवारी (रोको-टोको-ठोंको क्रांतिकारी मोर्चा) देवाराम (एनबीए) एवं प्रह्लाद पटेल शामिल थे।

बाद में सभी प्रतिनिधियों ने नर्मदा विकास प्राधिकरण के समक्ष जाकर प्रदर्शन किया। कल 14 सितम्बर को भी प्रातः 9 से 12 बजे तक नीलम पार्क में धरने की घोषणा की गयी है।

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