देश भर में सैन्य गोशालाएं बंद करेगी गोभक्त मोदी सरकार, क्या होगा 20000 गायों का ?

इस फैसले से करीब 2,500 कर्मचारियों के रोजगार पर तलवार लटक गई है। साथ ही फेडरेशन ने कहा कि...इस फैसले से अब भारत की सबसे अच्छी नस्ल की गायों के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लग गया है...

Modi government's big decision on Gaushalas

गायों की सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में बने रहने वाली मोदी सरकार ने गोशालाओं पर बड़ा फैसला लिया है।

रक्षा मंत्रालय ने देश में 39 सैन्य फार्म बंद करने का आदेश दिया है, जिसके बाद इस फैसले पर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

सरकार के इस आदेश पर राजनीति भी गर्मा गई है। रक्षा मंत्रालय ने देशभर की 39 सैन्य फर्म को बंद करने का आदेश दिया है। कैबिनेट कमेटी ने आर्मी को निर्देश देते हुए कहा कि... तीन महीने के अंदर इन गोशालाओं को बंद किया जाए। कमेटी ने कहा कि...सेना के जवानों के लिए दूध डेयरी से खरीदा जाए।

सरकार के इस फैसले को निजी मिल्क और डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के रूप में देखा जा रहा है।

दूसरी तरफ सैन्य गोशालाओं में भ्रष्टाचार से जुड़े मामले सामने आने के बाद भी इस फैसले को मुख्य वजह माना जा रहा है। हालांकि ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ डिफेंस वर्कर ने इस पर चिंता जाहिर की है। क्योंकि गोशालाओं में काम रह रहे कर्मचारी अब बेरोजगार होने की कगार पर आ गए हैं।

फेडरेशन ने कहा कि सरकार के इस फैसले से करीब 2,500 कर्मचारियों के रोजगार पर तलवार लटक गई है। साथ ही फेडरेशन ने कहा कि...इस फैसले से अब भारत की सबसे अच्छी नस्ल की गायों के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। ये गाय सबसे ज्यादा दूध देती हैं। इन गोशालओं में करीब 20 हजार गाय पाली जाती हैं। वहीं दूसरी तरफ आईसीएआर के वैज्ञानिकों ने कहा कि...हमें नहीं पता सैन्य गोशालाएं बंद होने के बाद इन गायों का क्या होगा। क्योंकि देश में दूसरी ऐसी कोई फर्म नहीं है जहां बीस हजार गायों को पाला जा सके।

आपको बता दें इन सैन्य गोशालाओं की शुरुआत ब्रिटिश काल में हुई थी। सबसे पहली सैन्य गोशाला 1889 में इलाहबाद में खोली गई थी।

वर्तमान सैन्य गोशालाएं अंबाला, नोर्थ बंगाल, झांसी, कानपुर, लखनऊ, मेरठ, और रांची के साथ अन्य स्थानों पर हैं।

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