प्रगतिशील लेखक संघ की इंदौर इकाई का पुनर्गठन

हाइलाइट्स

यह वर्ष मुक्तिबोध जैसे हिंदी के महान कवि का शताब्दी वर्ष है और हाल में ही हिंदी कविता के ही एक अन्य अप्रतिम हस्ताक्षर श्री चंद्रकांत देवताले का भी निधन हो गया। दोनों का ही प्रगाढ़ सम्बन्ध मालवा से और इंदौर व् उज्जैन से रहा है। ये दोनों ही यशस्वी कवि प्रगतिशील लेखक संघ से अपने जीवन के अंत तक पूरी प्रतिबद्धता से जुड़े हुए थे।

प्रलेस के राज्य सम्मेलन में इंदौर से भी शामिल होगा लेखकों का प्रतिनिधिमंडल

इंदौर। मध्य प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेसं) का १२वां राज्य सम्मेलन 16 - 17 सितम्बर, 2017 को सतना में होने जा रहा है जिसमें प्रदेश भर की 30 से अधिक इकाइयों से चुने हुए करीब 150 लेखक भागीदारी करेंगे। इंदौर से भी लेखकों का बड़ा प्रतिनिधिमंडल इस सम्मेलन में शरीक होगा।

उल्लेखनीय है कि यह वर्ष मुक्तिबोध जैसे हिंदी के महान कवि का शताब्दी वर्ष है और हाल में ही हिंदी कविता के ही एक अन्य अप्रतिम हस्ताक्षर श्री चंद्रकांत देवताले का भी निधन हो गया। दोनों का ही प्रगाढ़ सम्बन्ध मालवा से और इंदौर व् उज्जैन से रहा है। ये दोनों ही यशस्वी कवि प्रगतिशील लेखक संघ से अपने जीवन के अंत तक पूरी प्रतिबद्धता से जुड़े हुए थे। इंदौर में तो प्रगतिशील लेखक संघ की इकाई पहली दफा 1940 के दशक में बनाने का श्रेय मुक्तिबोध को ही जाता है। वे इंदौर, उज्जैन और शुजालपुर रहे भी। इसी तरह चंद्रकांत देवताले भी पहले प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष मंडल में और बाद में संरक्षक मंडल में शरीक रहे। उनकी अध्यक्षता में इंदौर में प्रगतिशील लेखक संघ का 2004 में यादगार सम्मेलन हुआ था। इन तथ्यों के मद्देनज़र सतना में होने वाले राज्य सम्मेलन का केंद्रीय शीर्षक चंद्रकांत देवताले की प्रसिद्ध लम्बी कविता "भूखंड तप रहा है" को बनाया गया है और सम्मेलन को मुक्तिबोध को समर्पित किया गया है।

उन्होंने बताया कि 28-29 अक्टूबर, 2017 को चंडीगढ़ में होने वाले फ़ासीवाद विरोधी राष्ट्रीय लेखक सम्मेलन की जानकारी भी दी।

पिछले दिनों प्रगतिशील लेखक संघ की इंदौर इकाई के सदस्यों ने बैठक करके इंदौर से राज्य सम्मेलन में जाने वाले प्रतिनिधियों का चयन किया।

इस अवसर पर प्रगतिशील लेखक संघ की इंदौर इकाई का पुनर्गठन भी किया गया।

सतना सम्मेलन के बारे में प्रांतीय महासचिव विनीत तिवारी ने इकाई सदस्यों को बताया कि सम्मेलन का उद्घाटन करने हिंदी के वरिष्ठ आलोचक प्रोफेसर विश्वनाथ त्रिपाठी दिल्ली से आ रहे हैं। इसके साथ ही विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ इतिहासकार प्रो. गार्गी चक्रवर्ती (दिल्ली), प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव और वरिष्ठ लेखक श्री राजेंद्र राजन (बेगूसराय, बिहार), बिहार प्रगतिशील लेखक संघ के प्रांतीय महासचिव प्रोफेसर रवीन्द्रनाथ राय (आरा), वरिष्ठ कहानीकार और उपन्यासकार श्री पुन्नी सिंह (शिकोहाबाद, उत्तर प्रदेश), आलोचक एवं लेखक प्रोफेसर वेदप्रकाश (अलीगढ़), वरिष्ठ साहित्यकार एवं पत्रकार श्री प्रभाकर चौबे (रायपुर, छत्तीसगढ़) एवं उत्तर प्रदेश प्रलेस के महासचिव और प्रोफेसर संजय श्रीवास्तव (गाज़ीपुर) से विशिष्ट अतिथियों के रूप में आ रहे हैं।

प्रदेश के भी सभी प्रमुख रचनाकार सम्मेलन में शरीक होंगे। वरिष्ठ लेखक श्री देवीशरण ग्रामीण (सतना), वरिष्ठ कवि डॉ. मलय (जबलपुर), वरिष्ठ कहानीकार-उपन्यासकार श्री सुबोध श्रीवास्तव एवं श्री रमाकांत श्रीवास्तव, वरिष्ठ कवि एवं वसुधा के संपादक श्री राजेंद्र शर्मा, प्रसिद्ध कवि कुमार अम्बुज सहित अनेक युवतर लेखक, कवि, पत्रकार, कहानीकार, सम्मेलन में इकट्ठे हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि समविचारी सांस्कृतिक संगठनों से जनवाली लेखक संघ, मध्य प्रदेश के महासचिव श्री मनोज कुलकर्णी (भोपाल) और जन संस्कृति मंच की ओर से उत्तर प्रदेश जसम के महासचिव श्री प्रेमशंकर सम्मेलन में प्रलेस के साथ अपनी एकजुटता दर्शाने आएंगे।

सम्मेलन में साहित्य और राजनीति के अन्तर्सम्बन्धों पर भी एक सत्र होगा तथा कवि गोष्ठी भी होगी।

उन्होंने कहा कि जिस तरह के हमले अभिव्यक्ति पर बढ़ते जा रहे हैं, उस परिप्रेक्ष्य में संस्कृतिकर्मियों की और लेखकों की एकजुटता बहुत ज़रूरी है। प्रलेस के केंद्र में आमजन के प्रति प्रतिबद्ध साहित्य लेखन है इसलिए हम हमेशा उस सत्ता के निशाने हैं जो सवाल पूछे जाना बर्दाश्त नहीं कर सकती। प्रेमचंद, सज्जाद ज़हीर, बलराज साहनी, भीषम साहनी, परसाई और मुक्तिबोध की परंपरा के हम वारिस हैं और हमें देश और दुनिया में उभरते फासीवाद और साम्प्रदायिकतावाद को कड़ी चुनौती देनी है। साथ ही ये भी समझना है कि ऊपर दिखती इन नफरतों के पीछे किसके आर्थिक हित साधे जा रहे हैं।

इंदौर इकाई के महासचिव अभय ने पिछले पुनर्गठन से अब तक की इकाई की प्रमुख गतिविधियों का ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि इंदौर की प्रलेस इकाई ने अपने सदस्य साथियों के सहयोग से लगातार सक्रियता बनाये रखी है। वरिष्ठ रचनाकारों के रचनापाठ के साथ ही युवा रचनाकारों के रचनापाठ भी आयोजित किये हैं और विमुद्रीकरण जैसे पूरे समाज और अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के विषय पर वरिष्ठ अर्थशास्त्री जया मेहता का व्याख्यान भी रखा गया। साथ ही शहर में जितनी भी प्रगतिशील गतिविधियां अन्य संगठनों की हुई हैं, उनमे भी प्रलेस का सहभाग रहा है। इप्टा के राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन में, अमृतलाल नागर के जन्मशताब्दी वर्ष पर आयोजित कार्यक्रम में और हाल में एआईएसएफ और एआईवाईफ़ के लॉन्ग मार्च के इंदौर पहुँचने पर आयोजित कार्यक्रम में भी प्रलेस की सक्रिय भागीदारी रही।

बैठक में मौजूद वरिष्ठ साहित्यकार कृष्णकांत निलोसे ने अनुशंसा की कि इंदौर इकाई को रामविलास शर्मा और चंद्रकांत देवताले की स्मृति में वार्षिक कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए क्योंकि इंदौर इकाई को मजबूत बनाने में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। उपस्थित सदस्यों ने इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार किया।

प्रति माह एक नियमित कार्यक्रम करने का निर्णय भी चर्चा के बाद लिया गया। हर माह के कार्यक्रम की ज़िम्मेदारी केंद्रीय रूप से बारी बारी से एक एक कार्यकारिणी सदस्य की रहेगी। इसी बैठक में सतना सम्मेलन में जाने वाले प्रतिनिधियों के नाम भी तय किये गए। प्रतिनिधिमंडल में इकाई अध्यक्ष श्री एस. के. दुबे तथा इकाई महासचिव श्री अभय के साथ ही वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य श्री रामआसरे पांडे, सुश्री सुलभा लागू, सुश्री सारिका श्रीवास्तव, श्री अशोक दुबे, श्री विजय दलाल, श्री अरविन्द पोरवाल के साथ ही युवा साथी तौफ़ीक़ के नामों पर सहमति बनी। इकाई के संरक्षक मंडल को यथावत रखा गया। संरक्षक मंडल में सुश्री पेरिन दाजी, श्री आलोक खरे, श्री वसंत शिंत्रे, श्री अनंत श्रोत्रिय और श्री कृष्णकांत निलोसे हैं। इकाई अध्यक्ष पद पर श्री एस. के. दुबे और इकाई के महासचिव पद पर श्री अभय के नामों पर सबकी सहमति रही। अध्यक्ष मंडल में श्री ब्रजेश कानूनगो, उत्पल बनर्जी, और श्री रवींद्र व्यास हैं। श्री चुन्नीलाल वाधवानी और श्री सुरेश पटेल उपाध्यक्ष द्वय हैं। संयुक्त सचिव के पद पर सुश्री सुलभा लागू एवं सहसचिव के पद पर श्री भारत सक्सेना का नाम स्वीकार किया गया। कार्यकारिणी सदस्यों में विनीत तिवारी, सुश्री सारिका श्रीवास्तव, श्री रामआसरे पांडे, प्रोफेसर ज़ाकिर हुसैन, श्री विश्वनाथ कदम, श्री केसरी सिंह, श्री कृष्णार्जुन बर्वे, श्री मिलन, श्री तौफीक और श्री अरविन्द पोरवाल के नाम रखे गए और कुछ स्थान अध्यक्ष और महासचिव के विवेक पर खाली छोड़े गए ताकि जो महत्त्वपूर्ण सदस्य किसी वजह से उपस्थित नहीं हो सके, उनके नाम शामिल किये जा सकें।

बैठक में नए सदस्य श्री मुकेश तिवारी, श्री रवींद्र तिवारी, श्री कृष्णपाल राठौर, सुश्री अमरीन खान, श्री मृगेंद्र सिंह तथा वरिष्ठ सदस्य श्री तपन भट्टाचार्य, श्री गणेश रायबोले, श्री कृष्णार्जुन, आदि मौजूद थे। बैठक ओसीसी हाउस रुद्राक्ष भवन मीरा पथ धेनु मार्केट में संपन्न हुई।

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