मोदी सरकार का दावा ! मनमोहन सिंह के कार्यकाल में गोदामों में खाद्यान्न सड़ने की ख़बरें थीं जुमलेबाजी !

जी हाँ डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भी अनाज सड़ने की ख़बरें सिर्फ जुमला थीं और ये हम नहीं कह रहे बल्कि PM मोदी के यशस्वी नेतृत्व में चल रहा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय कह रहा...

हाइलाइट्स

जी हाँ डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भी अनाज सड़ने की ख़बरें सिर्फ जुमला थीं और ये हम नहीं कह रहे बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यशस्वी निर्देशन में चल रहा केंद्र सरकार का उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग कह रहा है।

नई दिल्ली। जब 2010 में कांग्रेस सरकार थी और डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे तब देश भर में स्थित एफसीआई के गोदामों में बड़ी मात्रा में खाद्यान्न अनाज सड़ने की ख़बरें आई थीं। एक आरटीआई कानून के तहत इसका खुलासा हुआ था। इस साल पहली जनवरी को एफसीआई के गोदामों में 10,688 लाख टन अनाज सड़ा हुआ पाया गया। ख़बरें आई थीं कि पहली जनवरी 2010 को एफसीआई के गोदामों में 10,688 लाख टन अनाज सड़ा हुआ पाया गया। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल की एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान 12 अगस्त 2010 को कहा था कि सरकार गोदामों में अनाज को सड़ने देने के बजाए इसे भूखे और ग़रीब लोगों में मुफ़्त बाँट दे। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अनाज सड़ने की ख़बरें सिर्फ जुमला थीं ? जी हाँ डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में भी अनाज सड़ने की ख़बरें सिर्फ जुमला थीं और ये हम नहीं कह रहे बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यशस्वी निर्देशन में चल रहा केंद्र सरकार का उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग कह रहा है।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग अपनी वेब साइट पर एक प्रश्न “यह अवधारणा क्यों हैं कि सम्पूर्ण देश में खाद्यान्नों की बहुत बड़े पैमाने पर क्षति होती है अथवा वे सड़ते हैं? क्या यह सच है?” के उत्तर में कहता है कि

“यह सच नहीं है कि खाद्यान्नों की बहुत बड़े पैमाने पर क्षति होती है। मीडिया द्वारा ऐसा प्रभाव पैदा किया गया है कि खाद्यान्नों की काफी मात्रा क्षतिग्रस्त होती है। भंडारण के दौरान कीटों के हमले, गोदामों में लीकेज, खाद्यान्नोंक की गुणवत्ताक के स्टाकक की खरीदारी, स्टाहक के संचलन के दौरान वर्षा में भीगने, बाढ़ आने, संबंधित अधिकारियों की ओर से लापरवाही होने आदि जैसे विभिन्न कारणों से गोदामों में भंडारित खाद्यान्नों की कुछ मात्रा क्षतिग्रस्ता हो जाती है।“

News of food rotting in warehousesखाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने 2009-10 से पिछले 5 वर्षों के लिए भारतीय खाद्य निगम के स्टाक से हुए उठान की तुलना में क्षतिग्रस्त खाद्यान्नो का प्रतिशत सारणी में दिया गया है जिसके मुताबिक मीडिया द्वारा ऐसा प्रभाव पैदा किया गया है कि खाद्यान्नों की काफी मात्रा क्षतिग्रस्त होती है।

यानी जुमलेबाजी 2010 से मीडिया के जरिए जारी थी।

मद

2009-10

2010-11

2011-12

2012-13

2013-14

2014-15 31.10.2014 तक

विकेन्द्रीकृत खरीद योजना वाले राज्‍यों को छोड़कर भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से स्‍टाक (गेहूँ और चावल) का कुल उठान (लाख टन में)

371.06

432.10

473.59

281.61

523.16

275.04

क्षतिग्रस्‍त/जारी न करने योग्‍य हुई मात्रा(लाख टन में)

0.070

0.060

0.033

0.031

0.247

0.115

उठान की तुलना में जारी न करने योग्‍य स्‍टाक का प्रतिशत

0.019

0.014

0.007

0.006

0.047

0.042

 

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