भगवान भरोसे है छात्रों का भविष्य- दिनकर कपूर

ओबरा डिग्री कालेज के धरनारत छात्रों से मिले स्वराज अभियान के नेता...

भगवान भरोसे है छात्रों का भविष्य- दिनकर कपूर

ओबरा डिग्री कालेज के धरनारत छात्रों से मिले स्वराज अभियान के नेता

जर्जर छात्रावास का किया निरीक्षण, सीएम को करायेंगे अवगत

ओबरा, सोनभद्र, 14 अगस्त 2018, ओबरा डिग्री कालेज में अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान और जीव विज्ञान के अध्यापक तक नहीं है, महाविद्यालय में आवश्यक अध्यापकों की तुलना में महज चौदह अध्यापक हैं, विद्यालय में पिछड़े वर्ग के लिए बने छात्रावास का भवन बुरी तक जर्जर है उसमें पीने के पानी तक का इंतजाम नहीं है, छात्राओं के लिए गृह विज्ञान जैसा महत्वपूर्ण विषय विद्यालय में पढ़ाया ही नहीं जाता, विद्यालय में बह रहे नाले के कारण आए दिन छात्र बीमारियों का शिकार हो रहे है। कुल मिलाकर छात्रों का भविष्य भगवान भरोसे है। इन जायज सवालों को हल करने की जगह जिला प्रशासन छात्रों के लोकतांत्रिक आंदोलन को ही विफल करने में लगा है। इसलिए ओबरा डिग्री कालेज की दुर्व्यवस्था से सीएम को अवगत कराया जायेगा और छात्रों के आंदोलन की हर सम्भव मदद की जायेगी।

यह बातें आज ओबरा में धरनारत छात्रों के समर्थन में धरनास्थल पर पहुंचे स्वराज अभियान के नेता व वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने कहीं।

उन्होंने जिलाधिकारी से आग्रह किया कि वह अतिशीध्र एसडीएम स्तर की समिति बनाकर डिग्री कालेज की दुर्व्यवस्थाओं की जांच करा लें और समस्याओं को हल कराएं।

इसके पूर्व दिनकर कपूर ने छात्रसंघ अध्यक्ष अमरेश यादव, छात्रनेता मुकेश जायसवाल, राका यादव, ठेका मजदूर यूनियन के जिला संयुक्त मंत्री मोहन प्रसाद और दर्जनों छात्रों के साथ पिछड़े वर्ग के लिए बने छात्रावास का निरीक्षण किया और महाविद्यालय का हाल देखा।

उन्होंने कहा कि छात्रावास का हाल उसके दुर्दशा की कहानी खुद कह रहा है। महज पांच साल पहले पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए बने छात्रावास की दिवारें चटक गयी है, खिडकिया टूटी पड़ी है और छत व दिवारों पर घास जमी हुई है। छात्रावास में एक हैण्ड़पम्प है जो खराब पड़ा हुआ है परिणामस्वरूप दूषित पानी पीने को छात्र मजबूर है। कभी भी यहां कोई बड़ी दुर्धटना हो सकती है। 23 एकड़ में फैले इस जनपद के प्रतिष्ठित इस महाविद्यालय में कचड़ा युक्त नाला बह रहा है इसको व्यवस्थित करने का न्यूनतम काम भी नहीं कराया गया। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि कई सासंद और विधायक व जन प्रतिनिधि इस विद्यालय ने दिए, यहां तक की वर्तमान ओबरा के विधायक यहीं से पढ़े है इनके पास विद्यालयों के जीर्णोघार के लिए धन भी आता है। यहीं नहीं इतने कारपोरेट घराने और औद्योगिक प्रतिष्ठान है जिनके सीएसआर फण्ड़ को समाज के हित में खर्च करने की बड़ी बातें होती है बावजूद इसके जनपद के महत्वपूर्ण महाविद्यालय में इतनी दुर्दशा क्यों है?

उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल्य सोनभद्र जनपद देश के बीस और प्रदेश के पांच सर्वाधिक पिछड़े जनपदों में आता है। इसके विकास को प्राथमिकता में रखने की बात केन्द्र व राज्य सरकारें करती है। ऐसे में आज तक इस क्षेत्र में एक विश्वविद्यालय तक क्यों नहीं है। हालत यह है कि मिर्जापुर, भदोही तक में विश्वविद्यालय नहीं है। इसलिए इस जनपद में विश्वविद्यालय खोलने की छात्रों की मांग भी जायज है और इस पर प्रदेश सरकार को कार्यवाही करनी चाहिए।

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