बहनजी को पीएम बनाने की इच्छा जताने वाले चौटाला के घर में लगने वाली है मुलायम के घर सी आग !

ये इत्तेफाक नहीं है कि बहनजी और चौटाला दोनों ही भाजपा के सहयोगी रहे हैं। और चौटाला के गुणगान करने वाले शंकर सिंह वाघेला भी भाजपाई रहे हैं।...

बहनजी को पीएम बनाने की इच्छा जताने वाले चौटाला के घर में लगने वाली है मुलायम के घर सी आग !

इनेलो (इंडियन नेशनल लोकदल) अध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला शिक्षक भर्ती घोटाले मामले में 10 साल की कैद काट रहे हैं। पैरोल पर दो सप्ताह के लिए जेल से बाहर आए हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने पिता और इनलो के वरिष्ठ नेता देवी लाल की 105वीं जयंती पर गोहाना में आयोजित रैली में भाग लेते हुए घोषणा की कि बसपा सुप्रीमो मायावती को 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद अगला प्रधानमंत्री बनाने के लिए उनकी पार्टी विपक्षी दलों को एकसाथ लाने की दिशा में काम कर रही है। लेकिन बहनजी को पीएम का सपना संजोने वाले चौटाला के घर में सपा मुखिया मुलायम सिंह के घर में लगी आग जैसी चिंगारियां इस रैली में दिखाई दीं। वैसे ये इत्तेफाक नहीं है कि बहनजी और चौटाला दोनों ही भाजपा के सहयोगी रहे हैं। और चौटाला के गुणगान करने वाले शंकर सिंह वाघेला भी भाजपाई रहे हैं।

वैसे सनद रहे चौधरी देवीलाल के समय से ही उनके बेटों ओमप्रकाश चौटाला और रणजीत सिंह चौटाला में विरासत को लेकर झगड़ा रहा और विरासत मिली ओमप्रकाश चौटाला को। अभी कुछ दिन पहले ही रणजीत सिंह चौटाला का बयान आया था कि अभय चौटाला, ओमप्रकाश चौटाला के उत्तराधिकारी नहीं बन सकते। क्या फिर इतिहास खुद को दोहराने जा रहा है ?

बहरहाल हरियाणा में लंबे समय तक पत्रकारिता कर चुके धीरेश सैनी ने अपनी फेसबुक टाइमलाइन पर चौटाला परिवार की कलह पर लंबी टिप्पणी की है। पढ़ते हैं धीरेश सैनी की टिप्पणी -

"हरियाणा मोह

इंडियन नैशनल लोकदल (इनेलो) के सुप्रीमो व हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला को शायद ही यह गुमान भी रहा हो कि उनकी पार्टी की रैली में उनकी उपस्थिति में उनके ही लोग हंगामा भी कर सकते हैं। रविवार की गोहाना (सोनीपत) रैली से फेसबुक पर मिल रही खबरें मेरे लिए भी चौंकाने वाली रहीं।

जेबीटी टीचर भर्ती घोटाले में जेल काट रहे चौटाला इन दिनों पैरोल पर हैं। गोहाना रैली में भारी भीड़ देखकर उन्हें जो खुशी हुई होगी, उससे ज्यादा ग़म उन्हें अपने घर के भीतर के घमासान के इस तरह सार्वजनिक हो जाने से हुआ होगा। उनके बेटे इनेलो विधायक दल के नेता अभय सिंह चौटाला बोल रहे थे तो मंच के आगे खड़े युवाओं का झुंड़ लगातार हूटिंग कर रहा था। दुष्यंत-दुष्यंत चिल्ला रहे ये युवा ओमप्रकाश चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला के सांसद पुत्र दुष्यंत चौटाला के समर्थक थे। जेबीटी टीचर घोटाले में अजय भी अपने पिता के साथ सजा काट रहे हैं।

अजय को अपने पिता और छोटे भाई अभय की अपेक्षा विनम्र कहा जाता है। ओमप्रकाश चौटाला अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर उन्हें ही ज्यादा महत्व देते रहे थे। ओमप्रकाश चौटाला और अजय के जेल में जाने के बाद पार्टी के नेतृत्व को लेकर परिवार में तनाव की चर्चाएं अक्सर चलती रहती थीं लेकिन वे कभी इस तरह सतह पर नहीं आई थीं।

अजय चौटाला के दोनों बेटे दुष्यंत और दिग्विजय छात्रों और युवाओं के बीच अपना आधार बनाने में खासे सफल भी रहे थे लेकिन पार्टी के विधायक, सांसद और संगठन के पदाधिकारी अभय चौटाला के समर्थन मे्ं माने जाते हैं।

अपने शॉर्ट टेम्पर के लिए जाने जाते रहे अभय रविवार की रैली में अपनी हूटिंग के दौरान आश्चर्यजनक ढंग से शांत बने रहे। यूँ खेल वे भी कर चुके थे। दुष्यंत की तस्वीर मंच पर लगे होर्डिंग पर नहीं थी।

अभय की हूटिंग के दौरान ओमप्रकाश चौटाला अपने पोते दुष्यंत से नाराजगी जताते रहे। वे खुद बोलने खड़े हुए तो कुछ देर तक खामोश रहे। फिर उन्होंने हंगामा करने वालों को यह कहते हुए पार्टी से बाहर करने की चेतावनी दी कि वे जानते हैं कि यह सब कौन कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं। दुष्यंत और दिग्विजय को लग रहा होगा कि पिछले कई साल से उन्होंने जो ताना-बाना बुना था, उसे उनकी ही अधीरता ने तोड़ दिया।

ओमप्रकाश चौटाला राजनीतिक उत्तराधिकार के लिए राजनीतिक परिवारों में होने वाली उठापटक से अपरिचित नहीं हैं। खुद उन्हें चौ. देवीलाल ने अपनी विरासत इतनी आसानी से नहीं सौंपी थी। यह चौटाला थे जिन्होंने अपने भाइयों को पीछे छोड़ दिया था। बेहद कड़े किस्म के नेता चौटाला के पासे 2004 के बाद सीधे नहीं पड़े हैं। भाजपा को अकेले मजबूत हो जाने के चलते उनकी बारगेनिंग करने की स्थिति भी नहीं है। उलटे उनके छोटे बेटे अभय चौटाला पर आय से ज्यादा संपत्ति के मामले में तलवार लटकी हुई है। पिछले दिनों विधानसभा में भाजपा के साथ उलझ रहे कांग्रेस नेता कर्ण सिंह दलाल के साथ अभय सिंह का भिड़ जाना इसी दबाव का नतीजा माना गया था।

दिलचस्प यह है कि ऐसी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद ओमप्रकाश चौटाला अपने समर्थकों के बीच अपने हौसले का ही परिचय देते रहे हैं। बतौर पत्रकार उनसे पहली मुलाकात जुलाई 1999 में हुई थी जब भाजपा ने अचानक तत्कालीन मुख्यमंत्री चौ.बंसीलाल से समर्थन वापस लेकर ओमप्रकाश चौटाला को मुख्यमंत्री बना दिया था। चौटाला दिल्ली से शपथ लेने के लिए चंडीगढ़ जाते वक़्त करनाल में जीटी रोड पर अपने एक समर्थक की पेंट फैक्ट्री पर रुके थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनका जलवा यह था कि उनसे सवाल काफी घुमा-फिराकर ही किए जा रहे थे। हरियाणा में `अमर उजाला` तभी लॉन्च हुआ था और उन्हें उस वक़्त के `अमर उजाला` के वेस्ट यूपी स्टाइल के सीधे सवाल नागवार गुजरे थे। फिलहाल यह किस्सा किसी और दिन के लिए।

उनका आखिरी भाषण हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान 9 अक्तूबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के चुनावी हलके गढ़ी-सांपला-किलोई के भालोट गांव में कवर किया था। वे मेडिकल के आधार पर जमानत पर थे और चोपर से भालोट की रैली में पहुंचे थे।

उस भाषण में उन्हें भूपेंद्र सिंह हुड्डा के दादा मातूराम और पिता रणवीर सिंह की हैसियत और अपने पिता देवीलाल की दानवीरता की तुलना करने के बाद हुड्डा को `पाखाने की ईंट` कहकर तसल्ली हुई थी।

चौटाला ने कहा था, ``...ये खरना आपने देख कोन्नी रखा था। आप क्या सोचकर इसके (हुड्डा के) पीछे लगे? कोई तो गुण हो? आकंठ अवगुण में डूबे आदमी को आपने उठा दिया? ...पाखाने की ईंट को चौबारे पर लगा दिया।``

जाहिर था कि चौटाला जीत-हार के लिहाज से नहीं बल्कि हिसाब चुकता करने के लिए यही कहने वहां पहुंचे थे।

किस्सा कोताह, कड़ियल चौटाला को गोहान रैली में अपने वंशजों के `पराक्रम` ने हिला जरूर दिया होगा। घर की कलह रंज भी देती है।"

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