बीएचयू के छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज की पहली बरसी पर काला दिन, एबीवीपी छात्राओं से मारपीट, गुंडागर्दी का आरोप

बीएचयू के छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज की पहली बरसी पर काला दिन, एबीवीपी पर छात्राओं से मारपीट, गुंडागर्दी का आरोप...

बीएचयू के छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज की पहली बरसी पर काला दिन, एबीवीपी पर छात्राओं से मारपीट, गुंडागर्दी का आरोप

लखनऊ, 24 सितंबर। पिछले वर्ष 23 सितंबर को बीएचयू के छात्राओं-छात्रों पर हुए लाठीचार्ज की पहली बरसी पर काला दिन के रूप में याद करते हुए कल शाम को एक कार्यक्रम बीएचयू की छात्राओं ने तय किया था। आरोप है कि जिसे एबीवीपी ने व्यवधान उत्पन्न कर भंग कर दिया, मारपीट व गाली गलौज की, जिसके विरोध में छात्राएं एमएमवी गेट के बाहर बैठ गयीं

भगत सिंह छात्र मोर्चा की आकाँक्षा आजाद ने फेसबुक पर लिखा कि

“बीएचयू में लड़कियों के आंदोलन के 1 साल पूरे होने के अवसर नुक्कड़ नाटक व सभा करती छात्र- छात्राओं पर ABVP के गुंडो द्वारा हमला किया गया। छात्राओं को महिला विरोधी गालियां दी गई हैं और सेक्सुअल हरासमेंट की गई है।“

आकाँक्षा ने लिखा

“नारी शक्ति ज़िदाबाद!!!!

इंकलाब जिंदाबाद!!!

पिछले वर्ष, ठीक इसी दिन बीएचयू कैंपस में लड़कियों का ऐतिहासिक आंदोलन छेड़खानी, कैंपस में उत्पीड़न व प्रशासन के पितृसत्तात्मक रवैया के खिलाफ हुआ था।

जिसमें प्रशासन द्वारा 50 घंटे से धरनारत छात्र - छात्राओं पर बेरहमी से लाठीचार्ज किया गया था। उस आंदोलन की प्रमुख माँगे थीं-

. छेड़खानी के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाहीं की जाय ।

• परिसर के सभी प्रशासनिक कर्मचारियों एवं अध्यापकों में लैंगिक संवेदनशीलता लायी जाए।

• सभी छात्राओं के लिए छात्रावास कर्फ्यू टाइमिंग्स हटाई जाएं।

.महिला छात्रावास में खाने के व्यंजन एवं सभी आहारों में समता हों।

.GSCASH(Gender Sensitisation Committee and Sexual Harassment ) स्थापना की जाय।

.परिसर में प्रत्येक संकाय या संस्थान स्तर पर लैंगिक संवेदनशीलता के प्रसार के कार्यक्रम अनिवार्य करना आदि।

आज ठीक एक साल बाद जब लड़कियाँ उस आंदोलन के जज्बे को सलाम करते शांतिपूर्ण तरीके से सभा कर रही थी तब ABVP के लम्पटों समेत कई अन्य गुंडो द्वारा लड़के - लड़कियों पर हमला बोला गया। सभी गुंडे जय श्री राम, भारत माता की जय, वन्दे मातरम के नारे लगा रहे थे। हमले में लड़कियों को बुरी तरह मारा गया, भद्दी गालियां व धमकी दी गई। लड़कियों के साथ छेड़खानी , सेक्सुअल हरैसमेंट की और उस दौरान प्राॅक्टर बोर्ड और पुलिस तमाशा देख रही थी। गुंडो ने छात्राओं पर लाठी से भी हमला करने की कोशिश की। जिसके बाद चीफ प्रॉक्टर और गार्डों द्वारा छात्र- छात्राओं पे ठीक पिछले साल की तरह ही बेरहमी से लाठीचार्ज किया गया जिसमें छात्र-छात्राएँ गंभीर रूप से घायल हुए है। इस दौरान पत्रकारों से भी गुंडो ने बदसलूकी की की।

 

बीएचयू प्रशासन का महिला विरोधी, छात्र विरोधी रवैया फिर से सामने आया है। सवाल ये है कि जब एक घंटे से ABVP व अन्य गुंडो द्वारा कार्यक्रम को रोकने के लिए छात्रों से हाथापाई की जा रही थी तब गार्ड मूकदर्शक क्यों बने बैठे थे। गुंडो को रोकने के बजाय छात्राओं पे बेरहमी से लाठीचार्ज कैसे किया गया। प्रशासन का ये रवैया दिखाता है कि छात्राओं पे हमला उनके द्वारा ही प्रायोजित था जिसमें उनके द्वारा पाले गए लम्पटों और गुंडो का सहारा लिया गया।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आज फिर से कैंपस में महिला शक्ति की नई मिसाल देखने को मिली।

इस दौरान छात्र-छात्राओं ने गुंडो और प्रशासन के खिलाफ जबरदस्त संघर्ष किया और प्रशासन द्वारा छात्राओं के दमन की पूरी कोशिश की गई जिसका उन्होंने भरपूर विरोध किया। छात्राओं द्वारा गुंडो की पहचान कर ली गई है।”

एक अन्य छात्रा अनन्या कश्यप ने फेसबुक पर लिखा –

“Bhu एक बार फिर शर्मसार हुआ।

एक शांतिपूर्ण चल रहे कार्यक्रम को सह पाने की क्षमता भी नहीं है एबीवीपी के लोगो के पास। "वापस जाओ" और "खाओ पिओ और हमारे संग लोटो" के नारे लगाते हुए इन्हें एक बार भी अपने इंसानियत पर संदेह नहीं हुआ। किस मुंह से ये अनेक यूनिवर्सिटीज में विकास के नारे लगाते हैं और वोट मांगते हैं? आज जो इन लोगो ने किया उससे भी ज्यादा शर्मसार मुझे BHU का administration करता है। घंटे भर से जब ये लोग हमारे कार्यक्रम को रोकने की कोशिश कर रहे थे तो proctorial board खड़े होकर तमाशा देख रहा था और इंतजार कर रहा था, स्थिती के हाथ से निकलने की, ताकि ये अपने नपुंसकता कि लाठी निकाले और बरसा दे लड़कियों पर एक बार फिर और लहरा दे पितृसत्ता का परचम एक बार फिर BHU पर!

परंतु सबसे ज्यादा अगर किसी ने अभिमान खोया है तो वो है cheif proctor रोयना सिंह। एक साल पहले इसी आंदोलन के बाद इनपर बहुत भरोसा कर के इन्हें cheif proctor बनाया गया था। पर तब से आजतक जब भी मेरी मुलाक़ात हुई है इनसे, ये उसी पुरानी दकियानूसी सोच को अंग्रेज़ी के चोले में छुपाकर हमारे सामने ऐसे प्रस्तुत करती हैं जैसे इनसे ज्यादा मॉडर्न और रेशनल कोई है ही नहीं। आज भी बड़े आराम से इन्होंने हमारे छोटे से प्रोग्राम को गलत कर दिया ये बोलते हुए की परमिशन नहीं लिया था। पर परमिशन लिख कर मांगने पर बड़े आराम से मुंह फेर कर चली गई।

कल तक जिस आंदोलन के बारे में असहज और अनिश्चित थी मै, आज की घटना के बाद उतनी ही निश्चित हूं कि यहां जरूरत है तो एक क्रांति की जो समझाए काले रुमालों के पीछे छुपे चेहरों को की निडर होकर सड़क पे उतरना क्या होता है। कि बिना आवाज़ उची किए, बिना डरे, बिना हिंसात्मक हुए लोगो तक अपने विचारो को पहुंचाना क्या होता है।

आज मुझे गर्व है हर उस लड़की पर जिसने वहां खड़े रहकर अपने आवाज़ को नीचा होने नहीं दिया और हर उस नौजवान पर जो हमारे साथ खड़ा था। हमारा प्रयास व्यर्थ नहीं जाएगा।

# longlivetherevolution”

ज़रा हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।