भारत को फिलस्तीन-इजरायल संकट के समाधान के लिए अपनी अंतर्राष्ट्रीय भूमिका फिर से निभानी की जरूरत : भीम सिंह

इजराइल को कम से कम संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के अनुसार यरूशलम खाली करना चाहिए और मस्जिद.-ए-अल-अक्सा के मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है...

‘‘भारत को भावनात्मक और ईमानदारी से कार्य करने की जरूरत है क्योंकि यह 1948 के बाद से ही एक महत्वपूर्ण भमिका निभा रहा है, जब फिलस्तीन को संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव 181 द्वारा विभाजित किया गया था।‘‘

यह वक्तव्य नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक और फिलस्तीनी मामलों के विशेषज्ञ प्रो.भीमसिंह द्वारा दिया गया है।

पैंथर्स सुप्रीमो ने भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से महान भारतीय सभ्यता के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करने की अपील की, क्योंकि भारत ने 1948 में फिलस्तीन के विभाजन का जोरदार विरोध किया था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत और ईरान दोनों ही देश थे, जिन्होंने फिलस्तीन विभाजन का विरोध किया और इस प्रकार यहूदी राज्य का निर्माण हुआ।

प्रो.भीमसिंह ने कहा कि जब चीन फॉर्मूसा तानाशाह के नियंत्रण में था तो फिलस्तीन को विभाजित करके एक यहूदी राज्य बनाने के लिए सुरक्षा परिषद के सभी चार स्थायी सदस्यों के साथ फिलस्तीन के विभाजन का समर्थन किया था।

प्रो.भीमसिंह ने कहा कि इजराइल फिलस्तीन के खिलाफ कहर परपा रहा है और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का उल्लंघन करके फिलिस्तीन के लगभग एक-तिहाई क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया है, जिसमें दूसरे नंबर पर प्रस्ताव संख्या 242, 338 हैं। यह ऐसी घटनाओं की चौंकाने वाली स्थिति थी कि सभी बड़ी शक्तियां इसराइल द्वारा खड़ी हुईं और अब भी बड़ी शक्तियों ने अपने (सुरक्षा परिषद) स्वयं के प्रस्तावों का समर्थन नहीं किया है। ये ऐसे मामलों की चौंकाने वाली स्थिति है कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने फिलीस्तीनी हीरो यासिर अराफात को व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया था और फिलस्तीन और इजराइल के नेता के बीच हाथ मिलाने के लिए मजबूर किया था।

प्रो.भीमसिंह ने कहा कि इजराइल को कम से कम संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के अनुसार यरूशलम खाली करना चाहिए और मस्जिद.-ए-अल-अक्सा के मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है, जो दुनिया में मुसलमानों के सर्वोच्च पूजा स्थलों में से एक है।

नई दिल्ली में कल शाम की एक बैठक में नेशनल पैंथर्स पार्टी ने पिछले हफ्ते यरूशलम में मस्जिद-ए-अल-अक्सा पर इजरायल के आक्रमण की निंदा की और सुरक्षा परिषद द्वारा तत्काल निंदा करने की मांग की, क्योंकि यह फिलस्तीन के मामलों में गंभीर हस्तक्षेप और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव सं. 181, 242, 338 का खुल्लमखुला उल्लंघन है।

प्रो.भीमसिंह ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों के साथ-साथ भारत के नेतृत्व और ईरान सहित अन्य इस्लामी देशों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तत्काल बैठक बुलाए जाने की मांग की, ताकि मस्जिद-ए-अल-अक्सा पर इजरायली हमले की निंदा की जा सके। प्रो.भीमसिंह ने घोषणा की कि भारत-फिलस्तीन मैत्री समिति और पैंथर्स पार्टी फिलस्तीन के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए नई दिल्ली या तेहरान में एक अंतर्राष्ट्रीय बैठक आयोजित करेगी, जो कई दशकों से संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों को कार्यान्वित करने और यरूशलम समेत फिलस्तीन की संपूर्ण भूमि पर इजरायल द्वारा कब्जा किये जाने पर संघर्ष कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यरूशलम फिलस्तीनियों का है और इजरायली सेना को वापस जाना होगा। उन्होंने बड़ी शक्तियों से इजरायल पर सेंसर करने और इजरायल को फिलस्तीन के सभी कब्जे वाले क्षेत्रों से वापस लेने का निर्देश देने के लिए सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने का आहवान किया।

प्रो.भीमसिंह ने घोषणा की कि भारत-फिलस्तीन मैत्री समिति अक्टूबर, 2017 में नई दिल्ली में एक संगोष्ठी आयोजित करेगी--‘‘फिलस्तीन फिलस्तीनियों का है उसी तरह इंग्लैंड अंग्रेजों का और फ्रांस फ्रांसीसियों का है‘‘ जैसे कि महात्मा गांधी ने 1935 में कहा था।

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