सुनो सरकार ! हम जमीन देंगे ही नहीं ! नहीं का मतलब नहीं !

पेसा कानून में बदलाव संबंधी राज्यपाल के अध्यादेश के विरोध में उलगुलान का ऐलान...आदिवासी जनता के हितों को नज़रअंदाज कर उनके हितों को कुचलने वाला यह अध्यादेश संविधान विरोधी है।...

हाइलाइट्स

भूमिपुत्र बचाव आंदोलन दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारे, बुलेट ट्रेन, एक्सप्रेस वे, वाढवन बंदर, नारगोल बंदर के खिलाफ संघर्षरत जनमोर्चो का साझा मंच है। भूमिपुत्र बचाव आंदोलन द्वारा विगत 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस /अगस्त क्रांति दिवस पर रैली एवं जनसभा का आयोजन किया गया था। इस जनसभा - प्रकृति एवं समाज संवर्धन परिषद- में 50000 से भी ज्यादा संख्या में किसान, आदिवासी, मछुवारे में शामिल हुए थे। भूमिसेना के नेता कालूराम काका धोदडे की अध्यक्षता में संपन्न इस परिषद ने विनाशकारी प्रकल्पों को "चले जावं" की चेतावणी दी थी।

पालघर( महाराष्ट्र) की आदिवासी, किसान, मछुआरों की भूमिका...

पेसा कानून में बदलाव संबंधी राज्यपाल के अध्यादेश के विरोध में उलगुलान का ऐलान...

27 दिसंबर 2017 को पालघर जिला कचहरी पर पेसा कानून में संशोधन के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा जारी अध्यादेश को रद्द करने की मांग लेकर पालघर जिले के 10000 से भी ज्यादा संख्या में आदिवासी, किसान, मछुवारे भूमिपुत्र बचाव आंदोलन के झंडे तले इकठ्ठा हुए।

भूमिपुत्र बचाव आंदोलन दिल्ली मुंबई औद्योगिक गलियारे, बुलेट ट्रेन, एक्सप्रेस वे, वाढवन बंदर, नारगोल बंदर के खिलाफ संघर्षरत जनमोर्चो का साझा मंच है। भूमिपुत्र बचाव आंदोलन द्वारा विगत 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस /अगस्त क्रांति दिवस पर रैली एवं जनसभा का आयोजन किया गया था। इस जनसभा - प्रकृति एवं समाज संवर्धन परिषद- में 50000 से भी ज्यादा संख्या में किसान, आदिवासी, मछुवारे में शामिल हुए थे। भूमिसेना के नेता कालूराम काका धोदडे की अध्यक्षता में संपन्न इस परिषद ने विनाशकारी प्रकल्पों को "चले जावं" की चेतावणी दी थी।

9 अगस्त के बाद महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान में किसान समूहों, आदिवासी समाज की बैठकों-आंदोलनों का क्रम जारी है। लोवरे (पालघर) में जबरदस्ती हाय वे के लिए भू सर्वेक्षण का प्रयास किया गया, जिसे आदिवासी एकता परिषद, शेतकरी संघर्ष समिति, युवा भारत द्वारा रोका गया। वसई में 15 नवंबर बिरसा मुंडा दिवस से अगले सात दिनो तक जिले में जनजागृति यात्रा निकाली गयी। वही गुजरात में खेडूत समाज के तत्वावधान में "लोकशाही बचाव संविधान बचाव" यात्रा निकाली गयी। राष्ट्रीय हरित लवाद, डहाणू प्राधिकरण में इन परियोजनाओ के संदर्भ में गुजरात, महाराष्ट्र की जनता लड़ रही है। आदिवासी अनुसूचित क्षेत्र की पेसा अंतर्गत आणेवाली ग्राम पंचायतों द्वारा विरोध के प्रस्ताव भी भेजे गये हैं।

जनता के स्तर पर हो रहे विरोध एवं पेसा अंतर्गत की ग्राम सभाओं द्वारा विरोध के प्रस्तावों को देख उनकी सकारात्मक सुध लेने की बजाय जनता के विरोध को दरकिनार कर पेसा एक्ट में संशोधन अध्यादेश को लाया गया है।

आदिवासी जनता के हितों को नज़रअंदाज कर उनके हितों को कुचलने वाला यह अध्यादेश संविधान विरोधी है। राज्यपाल राज्य के पालक हैं एवं उन्हें इस बात ध्यान भी रखना चाहिये था। 15 नवंबर के दिन आदिवासी जन-गण के नेता, धरती के आबा बिरसा मुंडा दिवस पर राज्यपाल द्वारा लाया गया संविधान विरोधी अध्यादेश आदिवासी जनता के अधिकार का मृत्यु अभिलेख होने की बात सुनिल पराड, ब्रायन लोबो ने कही।

महाराष्ट्र के राज्यपाल द्वारा इस अधिसूचना को वापस नहीं लिए जाने की स्थिति में गुजरात में आंदोलन छेडने की चेतावणी खेडूत समाज गुजरात के अध्यक्ष जयेश पटेल द्वारा दि गयी। कृष्णकांत ने इस मौके पर "हिंदी, मराठी हो या गुजराती,  लड़ने वालों की एक ही जाति" का नारा बुलंद किया। राजस्थान के साथी एवं प्रकृति मानव जनआंदोलन के साथी घनश्याम डेमोक्रेट ने राजस्थान में दिल्ली मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर के विरोध में चल रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए महामोर्चा को अपना समर्थन जाहिर किया।

एमएमआरडीए के विकास प्रारूप के खिलाफ संघर्षरत पर्यावरण संवर्धन समिति के नेता समीर वर्तक ने पेसा में संशोधन को गैरकानूनी करार दिया एवं पालघर जिले में केंद्रित सभी विनाशकारी परियोजनाओं के खिलाफ काका धोदडे के नेतृत्व में लड़ीई जीते जाने तक संघर्ष जारी रखने की अपनी भूमिका को दोहराया।

शेतकरी संघर्ष समिति के अध्यक्ष संतोष पावडे ने पेसा एक्ट में संशोधन जनता के विरोध को पचा नहीं पाने के कारण बदले की भावना रख किए जाने की बात कही। उन्होंने आगे जोड़ा कि आदिवासी, मछुवारे एवं किसान उसके हितों के विरुद्ध किए जा रहे हर प्रयास को संगठित रूप में मुंहतोड़ जवाब देगा।

वाढवण बंदर संघर्ष समिति के वैभव वझे ने जय आदिवासी,  जय मछुवारे का नारा बुलंद किया। आजीविका के ऊपर का संकट सबसे बड़ा संकट है, साथ ही उससे बड़ा संकट पर्यावरण का संकट है। आजीविका और पर्यावरण को नष्ट करने वाली नीतियों के विरोध में संघर्ष जारी रखने एवं परियोजना को रोकने की लड़ाई को तेज करने का आवाहन किया।

राजापुर रिफायनरी विरोधी संघर्ष समिति के सदानंद पौल,  पूर्व मंत्री राजेंद्र गावित ने अपना समर्थन जारी किया। सूर्या पानी बचाव आंदोलन के रमाकांत पाटील, मछुआरों के नेता नारायण पाटील, नेत्री पूर्णिमा मेहेर, सगुणा संगठन के अरुण करांडे, युवा भारत के दयानंद कनकदंडे,  अखिल भारतीय महिला परिषद एवं मुंबई एअरपोर्ट विस्तारीकरण विरोधी आंदोलन की नेत्री जयश्री घाडी, भारतीय पर्यावरण चलवल(आंदोलन) के कुंदन राऊत, शेतकरी संघर्ष समिति के कमलाकर अधिकारी आदि भी उपस्थित रहे।

ग्राम सभा के अधिकार के कारण सरकार किसानों से, आदीवासी से जमीन खींच नहीं पा रही है। इसलिए जिस संविधानिक अधिकार को लेकर लोग लड़ रहे हैं उसे ही खत्म करने का काम किया गया है एवं इसी काम के लिए यह अधिसूचना जारी किए जाने की बात युवा भारत के शशी सोनवणे ने कही।

सभा का समापन काका धोदडे के संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा,  "सरकार अगर उसी की निर्देशों के अनुरूप ली गयी ग्रामसभा के प्रस्तावों को नहीं मानना चाहती है और अपने ही द्वारा बनाये गये कानून में पूंजीपति के दबाव में संशोधन लाती है तो उसे हमारी सरकार कहलाने का अधिकार समाप्त हो जायेगा। इसलिये उसको अपनी खुद की अधिमान्यता बचानी चाहिए। अगर सरकार उसी के द्वारा स्थापित ग्रामपंचायत की ग्रामसभाओं के निर्णय को रद्द करने हेतु संशोधन लाता है एवं जनता के आक्रोश के बावजूद भी संशोधन वापस नहीं लेता है तो हम लोगों को "लोकसभा न विधानसभा, सबसे बडी ग्रामसभा" की तर्ज पर अपनी ग्रामसभा और उसके शासन को कायम करना पड़ेगा।"

शशी सोनवणे बताते हैं कि एक तरफ जहां मोदी सरकार का एक मंत्री संविधान को बदलने की बात ईमानदारी से कर रहा है, उसका स्वागत करना चाहिए क्यों कि वे जो काम कर रहे है वही बात मंत्री ने की है। संविधान का सीधा-सीधा उल्लंघन करने वाली 15 नवम्बर 2017 को मा. राज्यपाल ने अधिसूचना जारी की है। यह अधिसूचना अनुसूचित क्षेत्र के आदिवासियों के पारंपरिक अधिकार,  ग्रामसभा के माध्यम से जमीन,  जंगल को लुटेरों से बचाने के आदिवासियों के अधिकार को खत्म कर देती है। वर्तमान सरकार भी कॉरपोरेट माफिया के लिए आदिवासी,  भूमिपुत्र को बर्बाद करने का काम,  संविधान को दरकिनार करने काम मोदी सरकार भी बढ़-चढ़कर,  जोरशोर से कर रही हैं। इस लूट के विरोध में महाराष्ट्र गुजरात,  राजस्थान,  पंजाब,  हरियाणा,  उत्तर प्रदेश के आदिवासी,  खेडुत किसान,  मछुआरे तमाम भूमिपुत्र संगटित हो रहे हैं. पालघर जिले में भूमिपुत्र बचाव आंदोलन द्वारा किए जा रहे संघर्ष के परिणामस्वरुप विनाशकारी प्रकल्प परियोजनाओं को जमीन मिलने नहीं मिली है। 27 दिसंबर के इस महामोर्चा के पहले 19 दिसंबर को इस सबंध में धरना प्रदर्शन किया गया था। इस बीच वाघोली से वाघोबा तक यात्रा भी निकाली गयी।

पालघर में 11 बजे तक लोग अलग यातायात वाहनो से पालघर पहुँचे। चौरास्ता से हुतात्मा स्मारक होते हुए महामोर्चा पालघर जिला कचहरी पर दाखिल हुआ।

जिलाधीश अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं थे। शशी सोनवणे एवं समीर वर्तक की मानें तो 18 तारिख को एक्सप्रेस वे को लेकर उन्ही के द्वारा बुलाई गई बैठक में भी वे उपस्थित नहीं थे।

अधिसूचना वापस नहीं लिए जाने तक एवं परियोजना को वापस लिए जाने तक संघर्ष को जारी रखा जायेगा। आंदोलन को गुजरात, राजस्थान होते हुए दिल्ली तक पहुंचाने की इच्छा नेताओं ने जाहिर की। सभा का प्रास्ताविक दत्ता करभट, संचालन विनोद धुमाडा एवं आभार राजू पांढरा द्वारा किया गया।

- दयानंद कनकदंडे, मुक्त पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता की रिपोर्ट

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