पैंथर्स सुप्रीमो की नाराज हुर्रियत नेतृत्व से पंचायत चुनाव में शामिल न होने के निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील

Panthers Supremo appeals to angry Hurriyat leadership reconsider decision not to join panchayat elections...

पैंथर्स सुप्रीमो की नाराज हुर्रियत नेतृत्व से पंचायत चुनाव में शामिल न होने के निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील

जम्मू, 26 सितंबर। नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक प्रो. भीमसिंह ने हुर्रियत कांफ्रेंस नेतृत्व से कश्मीर घाटी में होने वाले पंचायत एवं नगर निगम चुनावों का बहिष्कार करने के निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की है।

पैंथर्स सुप्रीमो प्रो. भीमसिंह ने हुर्रियत कांफ्रेंस से कहा कि उसे पूर्व सत्तारूढ़ दलों का, जो लगभग सात दशकों से राज्य के लोगों को लूट रहे हैं और पंचायत एवं नगर निगम चुनावों का बहिष्कार करने का तथाकथित निर्णय से मासूम कश्मीरियों के साथ चालबाजी कर रहे हैं, पर्दाफाश करना चाहिए।

प्रो. भीमसिंह ने हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं सहित जम्मू-कश्मीर के नेतृत्व को याद दिलाया कि वे नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी, कांग्रेस और अब भाजपा के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से सड़कों से सुप्रीम कोर्ट तक संघर्ष करता रहा हूं, जिसके कारण मैं स्वयं (भीमसिंह) जम्मू-कश्मीर की लगभग सभी जेलों में गैरकानूनी रूप से कैद रहा हूं।

उन्होंने कश्मीरी लोगों, खासतौर पर कश्मीरी नौजवानों से अपील की कि वे इन चुनावों में जनविरोधी राजनीतिक दलों का शामिल न होने का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि ये राजनीतिक दल पंचायत एवं नगर निगम चुनाव के बहिष्कार करने का ढोल इसलिए पीट रहे हैं, क्योंकि वे यह जानते हैं कि नई पीढ़ी और लोग इन चुनावों में उन्हें मतदान नहीं देंगे।

पैंथर्स सुप्रीमो ने कहा कि कामयाब पंचायत एवं नगर निगम चुनाव से नई पीढ़ी के समाने एक नई राजनीतिक नेतृत्व उभरकर आएग, इसी कारण जम्मू-कश्मीर की मुख्य राजनीतिक दल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 35-ए के बहाने चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अनुच्छेद 35-ए का सही तरीके से अध्ययन करना चाहिए और उन्हें यह बात समझनी चाहिए कि इसे भारत के राष्ट्रपति ने 1954 में एक अध्यादेश जारी करके अनुच्छेद 35-ए को लागू किया था ना कि भारतीय संसद ने। अनुच्छेद 35-ए को सिर्फ इसलिए लाया गया था कि 1953 में शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को जम्मू-कश्मीर के वजीर-ए-आजम के पद से हटाया जा सके। उन्होंने कश्मीरी नौजवानों खासतौर पर जम्मू-कश्मीर के नौजवानों से एक आवाज में कहा है कि न्याय हमारा अधिकार है और इसे हासिल करने का इस समय चुनाव ही एक रास्ता है, जिसमें शामिल होने से पूरी दुनिया का समर्थन मिलेगा।

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