पैंथर्स सुप्रीमो की हुर्रियत कांफ्रेंस नेताओं से अनुच्छेद 35(ए) के फायदे व नुकसान को समझने की अपील

प्रो.भीमसिंह ने हुर्रियत काफ्रेंस के नेताओं के नाम एक मजबूत अपील में उनसे कहा कि वे इस तानाशाही और गैरकानूनी संशोधन की रक्षा करने से पहले जम्मू-कश्मीर में रहने वाले भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों प...

पैंथर्स सुप्रीमो की हुर्रियत कांफ्रेंस नेताओं से अनुच्छेद 35(ए) के फायदे व नुकसान को समझने की अपील

नई दिल्ली, 18 अगस्त। नेशनल पैंथर्स पार्टी के सुप्रीमो एवं स्टेट लीगल एड कमेटी के कार्यकारी चेयरमैन प्रो.भीमसिंह ने, जो कई बार हुर्रियत काफ्रेंस के नेताओं की गैरकानूनी हिरासत के खिलाफ उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालय में उनकी पैरवी कर चुके हैं, हुर्रियत काफ्रेंस के नेताओं से अपील की है कि वे अनुच्छेद 35(ए) की रक्षा करने से पहले इसके नुकसान या फायदों का अध्ययन करें।

प्रो.भीमसिंह ने हुर्रियत काफ्रेंस के नेताओं के नाम एक मजबूत अपील में उनसे कहा कि वे इस तानाशाही और गैरकानूनी संशोधन की रक्षा करने से पहले जम्मू-कश्मीर में रहने वाले भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर इसके प्रभाव को समझें। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान में जम्मू-कश्मीर में रहने वाले स्थायी नागरिकों सहित सभी भारतीय नागरिकों को मौलिक अधिकारों की गारंटी दी गयी है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में रहने वाले भारतीय नागरिक भी सभी भारतीय नागरिकों के तरह मौलिक अधिकारों के हकदार हैं।

उन्होंने कहा कि 1953 में जब जम्मू-कश्मीर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को हिरासत में लेकर जेल में डाल दिया गया था, तब एक ब्रिटिश वकील श्री डिंगल फुट ने शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की हिरासत को यह कहते हुए जम्मू की अदालत में चुनौती दी थी कि वे भारतीय संविधान में दिये गये सभी मौलिक अधिकारों के हकदार हैं और उन्हें मुकदमा चलाए बगैर तीन महीने से ज्यादा जेल में नहीं रखा जा सकता। इससे भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू के सामने एक शर्मनाक स्थिति पैदा हो गयी, तब उन्होंने तत्काकाली राष्ट्रपति डा. राजेन्द्र प्रसाद को पत्र लिखकर उनसे अनुरोध किया कि वे जम्मू-कश्मीर के स्थायी नागरिकों के लिए मौलिक अधिकार पर प्रतिबंध लगा दें, तब राष्ट्रपति ने एक अध्यादेश जारी करके अनुच्छेद 35 में (ए) जोड़कर संशोधन कर दिया, जिससे जम्मू-कश्मीर के भारतीय नागरिक मौलिक अधिकारों के सुरक्षा कवच से बाहर हो गये और जम्मू-कश्मीर सरकार इसकी शक्ति मिल गयी कि वह जम्मू-कश्मीर के लोगों को मौलिक अधिकारों से वंचित कर सके।

उन्होंने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस, पीडीपी और अन्य अनुच्छेद 35(ए) का जम्मू-कश्मीर के लोगों को न्याय व समानता दिलाने के लिए नहीं बल्कि वह तो जम्मू-कश्मीर के लोगों पर सरकार की शक्ति को फिर से हासिल करने के लिए इसका बचाव कर रहे हैं। इसलिए उन्होंने अनुच्छेद 35(ए) का बचाव करने से पहले हुर्रियत कांफ्रेंस के नेताओं से इसके फायदे और नुकसान के बारे में अध्ययन करने की अपील की।

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