अखिलेश के चेले ने शिवपाल को धोया, शिवपाल के प्रवक्ता मिमियाकर पढ़ाते रहे समाजवाद का पाठ

पवन पांडेय के आरोपों का उत्तर किसी बौद्धिक से न दिलवाकर किसी हार्डकोर पॉलिटिशयन से दिलवाया गया होता तो पवन पांडेय के आरोपों से स्वयं अखिलेश यादव पर गंभीर सवालिया निशान लगते...

अखिलेश के चेले ने शिवपाल को धोया, शिवपाल के प्रवक्ता मिमियाकर पढ़ाते रहे समाजवाद का पाठ

लखनऊ, 18 सितंबर। आज विधिवत् रूप से समाजवादी पार्टी और समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के बीच म्यान से तलवारें निकल आईं। अखिलेश के नज़दीकी समझे जाने वाले पूर्व मंत्री तेजनारायण पांडेय उर्फ पवन पांडेय ने प्रेस कांफ्रेंस कर शिवपाल सिंह यादव पर जोरदार हमला बोला तो पांच घंटे बाद शिवपाल के मोर्चे ने भी प्रेस कांफ्रेंसकर पलटवार किया। लेकिन पहली ही मीडिया वार में शिवपाल का मोर्चा अखिलेशियन के सामने पिछड़ता नज़र आया।

पवन पांडेय ने जहां शिवपाल सिंह यादव पर जोरदार हमला बोला तो शिवपाल के मोर्चा के दीपक मिश्रा ने पलटवार किया, लेकिन दीपक मिश्रा निठल्ले बौद्धिक समाजवादियों की तरह समाजवाद का पाठ  पढ़ाते नज़र आए और पवन पांडेय के आरोपों का उत्तर न दे सके। यहां तक कि दीपक मिश्रा के साथ बैठे बाकी प्रवक्ता या तो बोले नहीं या फिर उन्हें बोलने नहीं दिया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है यदि पवन पांडेय के आरोपों का उत्तर किसी बौद्धिक से न दिलवाकर किसी हार्डकोर पॉलिटिशयन से दिलवाया गया होता तो पवन पांडेय के आरोपों से स्वयं अखिलेश यादव पर गंभीर सवालिया निशान लगते, क्योंकि पांडेय ने जो कहा उससे भाजपा के ये आरोप सच साबित होते हैं कि अखिलेश नाकारा मुख्यमंत्री थे। लेकिन दीपक मिश्रा पत्रकारों को समाजवाद पर भाषण देते रहे, शिवपाल का महिमागान भी करते रहे, परंतु पवन पांडेय का उचित जवाब नहीं दे पाए।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जमीन पर शिवपाल, अखिलेश के मुकाबले बहुत मजबूत हैं, लेकिन उन्हें मीडिया के लिए भी तेजतर्रार टीम तैयार करनी होगी। राजनीतिक विश्लेषकों ने आश्चर्य जताया है कि प्रो. सीपी राय, शाहिद, प्रेम प्रकाश वर्मा, रघुनंदन सिंह काका, राजीव गुप्ता और अरविन्द विद्रोही जैसे मीडियोन्मुख लोगों को अभी तक शिवपाल ने अपनी टीम में शामिल क्यों नहीं किया है ? अगर आज जैसा ही शिवपाल के मोर्चे का मीडिया में प्रदर्शन होगा तो स्थिति अच्छी नहीं रहेगी।    

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