अब तक हमने 1200 कानून खत्‍म किए : प्रधानमंत्री

एसएमएस से तारीख मिले और वीडियोकांफ्रेंसिंग से जुड़ें जेल-अदालतें : मोदी चीफ जस्‍टिस ने एक संकल्‍प के लिए प्रेरित किया है, उसे पूरा करना लक्ष्‍य रहेगा : प्रधानमंत्री...

हाइलाइट्स

एसएमएस से तारीख मिले और वीडियोकांफ्रेंसिंग से जुड़ें जेल-अदालतें : मोदी

चीफ जस्‍टिस ने एक संकल्‍प के लिए प्रेरित किया है, उसे पूरा करना लक्ष्‍य रहेगा : प्रधानमंत्री

देश को आगे ले जाने के लिए 2022 का रोडमैप तैयार करें

इलाहाबाद हाई कोर्ट के 150 साल पूरे होने पर आयोजित समारोह का समापन

इलाहाबाद, 2 अप्रैल।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि अब वक्‍त आ गया है कि लोगों को मोबाइल एसएमएस से मुकदमे की तारीख मिल जाए और जेल को अदालत से जोड़कर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कैदियों की सुनवाई हो जाए। इससे समय और पैसे की बचत होगी। सुरक्षा के खतरे की वाली समस्‍या से निजात मिलेगी।

प्रधानमंत्री इलाहाबाद हाई कोर्ट की स्थापना के 150 साल पूरे होने के समापन दिवस समारोह में रविवार को मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। प्रधानमंत्री ने कहा भारत के न्‍याय विश्‍व में इलाहाबाद हाई कोर्ट 150 साल का पुराना तीर्थक्षेत्र है। इलाहाबाद की इस भूमि में देश के चीफ जस्टिस ने मुझे एक संकल्प के लिए प्रेरित किया है। अब हमारा प्रमुख लक्ष्य उसे पूरा करने का रहेगा।

 मोदी ने कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट में आने को मैं अपना गौरव मानता हूं। साल भर चला ये समारोह समापन के साथ नई ऊर्जा, नई प्रेरणा, नए संकल्प और नए भारत के सपने को पूरा करने की ताकत बन सकता है। चीफ जस्टिस साहब अपना अनुभव सुना रहे थे, मैं मन से सुन रहा था। मुझे यकीन है कि उनके संकल्प पूरे होंगे। जहां तक सरकार का सवाल है, जिस संकल्प को आप प्रेरित कर रहे हैं, हम उसे पूरा करने का प्रयास करेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब इलाहाबाद हाई कोर्ट के 100 साल हुए थे, तब यहां आयोजित समारोह में तत्‍कालीन राष्ट्रपति राधाकृष्णन आए थे। उन्होंने कहा था कि कानून एक ऐसी चीज है, जो लगातार बदलती रहती है। कानून लोगों के स्वभाव और पारंपरिक मूल्यों के अनुकूल होना चाहिए। कानून को चुनौतियों का ध्यान रखना चाहिए। किस तरह की जिंदगी हम गुजारना चाहते हैं, कानून का क्या कहना है। कानून का लक्ष्य है- हर नागरिक का कल्याण। केवल अमीर का ही नहीं। इसे ही पूरा किया जाना चाहिए।"

प्रधानमंत्री ने गांधीजी का उद्धरण दिया। कहा कि गांधीजी कहते थे कि हम कोई भी निर्णय करें तो इसकी कसौटी क्या हो। अगर फैसला लेने में दुविधा हो तो सोचिए कि आखिरी छोर पर बैठे शख्स पर इसका असर क्या होगा। आप सही फैसला ले पाएंगे। गांधीजी ने आजादी के वक्त लोगों की उनकी क्षमता के हिसाब से ढाल दिया था। वकीलों का भी इसमें योगदान रहा है। गांधीजी ने आजादी का जज्बा जगाया।

मोदी ने कहा कि 2022 में आजादी के 75 साल हो रहे हैं। क्या इलाहाबाद से देश को प्रेरणा मिल सकती है। क्या हम कोई रोडमैप तय कर सकते हैं। मुझे नहीं लगता कि लोग ऐसा नहीं कर सकते। 2022 में हम गांधीजी-राधाकृष्णन के मूल्यों पर देश को आगे ले जा सकते हैं। मुझे उम्मीद है कि देश के सवा सौ करोड़ लोगों का सपना देश को सवा सौ करोड़ कदम आगे ले जा सकता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 का चुनाव प्रचार करते हुए मैंने कहा था कि मुझे ये तो नहीं पता कि कितने कानून बनाऊंगा लेकिन रोज एक कानून खत्म करूंगा। और आपको बताऊं कि अब तक हमने 1200 कानून खत्म कर दिए हैं।

मोदी ने कहा, "टेक्नोलॉजी से जीवन आसान हो गया  है। भारत सरकार डिजिटल इंडिया बनाने के लिए काम कर रही है। मोबाइल एसएमएस से तारीख मिलने की सुविधा मिलनी चाहिए। जेल को कोर्ट से जोड़ने से काफी फायदा होगा। जेल से कैदियों को लाने-ले जाने में काफी समय लगता है। बीच में क्‍या क्‍या होता है, आप सब जानते हैं। अब योगी जी आए हैं,। अब वह सब नहीं होगा। उम्मीद है वह इस दिशा में कुछ करेंगे।

 समारोह के विशिष्ट अतिथि मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने कहा कि कानून से बड़ा कोई नहीं है। कानून का स्थान शासक से भी ऊपर है। कोई भी समाज कानून से ही चलता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायालयों में लंबित प्रकरणों को जल्द खत्म करने की पहल न्यायपालिका ने ही की है। वैसे भी कानून से बढ़कर कोई नहीं है। कानून से ही शिकायतों का हल निकलता है। न्यायिक प्रणाली पर चिंतन अमूल्य है। यहां तक कि कानून का स्थान शासक से बढ़कर है। न्याय व विधि एक दूसरे के पूरक हैं और इंसाफ देना सबसे बड़ा धर्म है। कानून से ऊपर कोई भी राजा काम नही कर सकता, कानून से ही शिकायतों का निस्तारण हो पाता है। 

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब-जब लोकतंत्र पर संकट आया, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूरी निष्ठा के साथ उसे बचाया। न्यायालय ने कुछ ऐसे फैसले दिए, जिसने भारतीय समाज को नई दिशा दी। वैसे समाज कानून से चलाता है और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कई ऐतिहासिक फैसले दिए हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट का इतिहास गौरवशाली रहा है।

मुख्यमंत्री बोले, मेरे लिए बहुत हर्ष का विषय है कि मुझे हाईकोर्ट के 150 साल पूरे होने के समापन कार्यक्रम में शामिल होने का मौका मिला। 

इससे पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जगदीश सिंह खेहर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी मन की बात करते हैं। मैं उनसे दिल की बात करता हूं। कहा कि किस तरह जज मुकदमों का बोझ कम कर सकते हैं।  मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि वह छुट्टियों में जजों को काम करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। न्यायिक कार्य में तकनीक का कैसे प्रयोग होगा इसे जस्टिस खेहर ने विस्तार से बताया। मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर ने कहा कि छुट्टियों में होगी ट्रिपल तलाक, आसाम का सिटिजन इश्यू और अन्य मामलों की सुनवाई होनी चाहिए।

केंद्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का इतिहास गौरवमयी रहा है। यहां से जो अलख जगी उसने बार और बेंच का नाम रोशन किया। इस मौके पर राज्‍यपाल राम नाईक, उप मुख्‍यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश के विधि एवं न्‍याय मंत्री बृजेश पाठक, मंत्री नंद गोपाल गुप्‍ता नंदी, सांसद श्‍यामाचरण गुप्‍त, इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्‍यायाधीश व बड़ी संख्‍या में अधिवक्‍ता उपस्थित थे। इससे पहले राज्यपाल राम नाईक तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बमरौली एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री का स्वागत किया।  समारोह स्‍थल पहुंचने पर प्रधानमंत्री ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जजों से मुलाकात की । वंदेमातरम के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

प्रधानमंत्री मोदी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया। इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर का बुके भेंटकर स्वागत किया।

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