उन प्रमुख लोगों में से थे असगर अली इंजीनियर, जो धार्मिक कट्टरता के खिलाफ थे

हर समाज में उस समाज की कुप्रथाओं, कुरीतियों और अंधविश्वास का प्रतिकार उसी समाज के प्रगतिशील लोग करें तो ज़्यादा कारगर होगा...

आज पुण्यतिथि है डॉ. असगर अली इंजीनियर की

गोपाल राठी

सुधारवादी बोहरा समुदाय के नेता, समाजकर्मी और चिंतक डॉ. असगर अली इंजीनियर की आज पुण्यतिथि है। 10 मार्च 1939 को जन्मे असगर अली इंजीनियर उदयपुर (राजस्थान) के सलुंबर तहसील के रहने वाले थे और उनका परिवार दाउदी बोहरा संप्रदाय का अनुयायी था. सत्तर के दशक में दाउदी बोहरा की कट्टरता और दकियानूसी परंपराओं के खिलाफ जो सुधारवादी आंदोलन शुरू हुआ इंजीनियर उसके एक प्रमुख स्तंभ थे. इस वैचारिक और खूनी संघर्ष के बाद ही बोहरा संप्रदाय दो भागों में विभाजित हुआ. सुधारवादी गुट ने खुद को प्रगतिशील बोहरा समुदाय कहाl

इस संघर्ष और विभाजन के बाद ही उदयपुर और मुंबई में बोहरा समुदाय, जहां कि उनकी सबसे ज्यादा आबादी है, ने खुल कर सांस ली, स्कूल-कॉलेज व अस्पताल खुले, लड़कियां स्कूल गई और कई सुधारवादी कार्यक्रम शुरू हुए।

हर समाज में असगर अली साहेब जैसे समाजसुधारक हों तभी कुछ सुधार हो सकता है। हमें हर समाज के ऐसे व्यक्तियो का साथ देना चाहिए। आजकल हो यह रहा है कि हिन्दू समाज की कुरीतियों के लिए मुसलमानों के पेट में दर्द हो रहा है और मुसलमानों की तीन तलाक जैसी कुप्रथा को दूर करने के लिए हिन्दुओं के सिर में दर्द हो रहा है। हर समाज में उस समाज की कुप्रथाओं, कुरीतियों और अंधविश्वास का प्रतिकार उसी समाज के प्रगतिशील लोग करें तो ज़्यादा कारगर होगा। जैसे सती प्रथा खत्म करने की आवाज़ कहीं और से नहीं हमारे अंदर से ही उठी थी और अंतत: खत्म हुई।

असगर अली इंजीनियर भारत के उन प्रमुख लोगों में से थे जो देश में धार्मिक कट्टरता के खिलाफ थे और एक धर्मनिरपेक्ष देश का सपना रखते थेl

समाजसुधारक एवम् विचारक असगर अली इंजीनियर जी को बरसी के मौके पर सादर नमन।

गोपाल राठी की एफबी टिप्पणी

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