जिंदा बच्चे को मृत बताए जाने का मामला : लापरवाही पर रद्द हो सकता है मैक्स अस्पताल का लाइसेंस

-सोमवार तक आएगी रिपोर्ट...

-गरीबों का तय मात्रा में अस्पताल नहीं कर रहा इलाज

-दिल्ली सरकार ने गरीबों के मामले में भेजा है नोटिस : सत्येंद्र जैन

नई दिल्ली, 2 दिसम्बर (देशबन्धु)। मैक्स अस्पताल द्वारा एक जिंदा बच्चे को मृत बताए जाने का मामला प्रकाश में आने से पहले पता चला है कि अस्पताल गरीबों के इलाज को लेकर कोताही बरत रहा है। अस्पताल प्रशासन गरीबों को न तो भर्ती करने में सरकारी तय बेड दे रहा था और न ही ओपीडी में इलाज के लिए गरीब रोगियों को वह अपेक्षित लाभ दे रहा था।

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने इसे स्वीकारते हुए कहा कि इस बाबत अस्पताल को नोटिस पहले ही दिया गया है और मौजूदा मामले में रिपोर्ट तलब की है। जांच में दोषी पाए जाने पर अस्पताल का लाइसेंस तक रद्द किया जा सकता है।

श्री जैन ने कहा कि दिल्ली में मैक्स अस्पताल पर 22 नवम्बर को अस्पताल को गरीबों का इलाज न करने पर अस्पताल को नोटिस दिया है। उन्होने कहा कि एक हफ्ते में स्वास्थ्य विभाग देगा विस्तृत रिपोर्ट। यदि यह साबित होता है कि अस्पताल ठीक से काम नहीं कर रहा है तो उसका लाइसेंस भी रद्द कर सकते हैं। मैक्स के पूरे मामले में जांच की जा रही है और दो दिन में सोमवार तक प्राथमिक जांच रिपोर्ट आ जाएगी। उन्होने माना कि कि अस्पताल गरीबों का ओपीडी में10 प्रतिशत जांच कर रहा था जबकि 25 प्रतिशत इलाज किया जाना चाहिए।

श्री जैन ने मैक्स में जिंदा बच्चे के मृत घोषित करने वाले डॉक्टर पर कार्रवाई पर कहा कि इस बाबत रिपोर्ट को मेडिकल काउंसिल को भेजा जाएगा और तय करेंगे कि सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार सरकारी अस्पतालों को सुधारने में लगी हुई है और सरकारी अस्पतालों में सुधार आने के बाद भी इन निजी अस्पतालों को भी चुनौती मिलेगी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने इस दिशा में अधिक ध्यान नहीं दिया।

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