चुटका परियोजना को लेकर सुगबुगाहट :केन्द्र सरकार दे सकती है मंजूरी, 2000 मछुआरों के परिवार की जिन्दगी पर संकट

लोगों को कहना है कि ये प्लांट उनके लिए दुबारा विस्थापन का दर्द ले कर आएगा। मंडला क्षेत्र के डेढ़ सौ से ज्यादा गांव 90 के दशक में बरगी बांध से उजड़ चुके हैं। उन्हें आज तक न तो पर्याप्त मुआवजा मिला है, न ...

 नई दिल्ली। विकास परियोजनाओं को लेकर लेकर दी जाने वाली मंजूरी को लेकर केन्द्र सरकार जनसंगठनों के लगातार निशाने पर बनी हुई है, सरदार सरोवर के बांध के गेट बंद करने के लेकर जीएम सरसों को मंजूरी देने या न देने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, इसी बीच मध्य प्रदेश के मंडला जिले में चुटका परमाणु प्लांट का मामला भी गर्मा गया है।

जानकारी के अनुसार 16 मई को हो रही बैठक में कई परियोजना को मंजूरी दी जा सकती है।

उल्लेखनीय है, कि मंडला जिले के चुटका में परमाणु प्लांट (बिजली) का प्रस्ताव पास हो चुका है। इसकी क्षमता 1,400 मेगावाट की है। इसके लिए दो परमाणु संयंत्र लगाने की बात कही जा रही है, पर स्थानीय लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है।

लोगों को कहना है कि ये प्लांट उनके लिए दुबारा विस्थापन का दर्द ले कर आएगा। मंडला क्षेत्र के डेढ़ सौ से ज्यादा गांव 90 के दशक में बरगी बांध से उजड़ चुके हैं। उन्हें आज तक न तो पर्याप्त मुआवजा मिला है, न ही ज़मीन।

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एक तरफ मध्य प्रदेश सरकार नर्मदा नदी को जीवित इनसान का दर्जा देने का कानून पास कर रही है, दूसरी तरफ इस परियोजना से सबसे अधिक नुकसान नर्मदा को ही होने वाला है, क्योंकि यह नर्मदा नदी और बरगी बांध के पास है।

चुटका परमाणु प्लांट से तीन गांव विस्थापित होंगे। यहां तक कि एक गांव को आवासीय कॉलोनी के लिए उजाड़ा जाएगा। करीब 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाले कई गांव इससे प्रभावित होंगे।

इस परियोजना के लिए 1984 में परमाणु ऊर्जा आयोग का विशेष दल स्थल निरीक्षण एवं जांच हेतु आया था। केन्द्र सरकार द्वारा अक्टूबर 2009 में इसकी मंजूरी प्रदान की गई। न्यूक्लीयर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा इस परमाणु बिजली घर का निर्माण किया जाएगा। 700 मेगावाट की दो यूनिट से 1400 मेगावाट बनाने के बाद जल्द ही इनका विस्तार कर 2800 मेगावाट बिजली बनाने का प्रस्ताव है।

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इस परियोजना के लिए 650 हेक्टेयर भूमि तथा 7 किमी. की दूरी पर स्थित ग्राम सिमरिया के पास टाऊनशिप के लिए 75 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित है। इस योजना की प्रारंभिक लागत 16,500 करोड़ की है।

इस संयंत्र में नेचुरल यूरेनियम तथा कुछ मात्रा में थोरियम का उपयोग किया जाएगा। संयंत्र हेतु बरगी जलाशय से 128 क्युसेक पानी लिया जाएगा।

इस संयंत्र के कारण 11 वर्ग किमी के दायरे में 54 आदिवासी गांव में विकिरण का खतरा उत्पन्न हो गया है। इस संयंत्र के कारण जलाशय के जरिए जीविकोपार्जन करने वाले 2000 मछुआरों के परिवार की जिन्दगी पर संकट खड़ा हो गया है।

 

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