कल मजदूर-किसान-दलित संगठनों का देशव्यापी आंदोलन, निशाने पर होगी मोदी सरकार

कॉर्पोरेट लूट को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार आम जनता पर हमले कर रही है, उनमें फूट डालने के लिए सांप्रदायिक मुद्दों को उछाल रही है, संसदीय जनतंत्र और संस्थाओं को रौंद रही है, ...

कल मजदूर-किसान-दलित संगठनों का देशव्यापी आंदोलन, निशाने पर होगी मोदी सरकार

रायपुर, 08 अगस्त। सभी बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध कराने तथा न्यूनतम मजदूरी 18000 रूपये करने, सार्वजनिक क्षेत्रों के विनिवेशीकरण-निजीकरण पर रोक लगाने, स्वामीनाथन आयोग के सी-2 फार्मूले के अनुसार लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य देने, खेतिहर मजदूरों व गरीब किसानों को क़र्ज़ से मुक्त करने और 60 वर्ष से ऊपर की आयु के किसानों को 5000 रूपये पेंशन देने, जबरिया भूमि अधिग्रहण रोकने, वनाधिकार कानून, 5वीं अनुसूची और पेसा कनून के प्रावधानों को क्रियान्वित करने, छत्तीसगढ़ में भू-राजस्व संहिता में किए गए किसान-आदिवासी विरोधी संशोधनों को विधानसभा से वापस लेने, अजा-जजा क़ानून को कमजोर करने और आरक्षण के प्रावधानों को निष्प्रभावी बनाने की कोशिशों के खिलाफ और 'वन रैंक, वन पेंशन' की मांग पर कल 9 अगस्त को मजदूर-किसान-दलित संगठन देशव्यापी आंदोलन करेंगे. आंदोलन का आह्वान करने वाले संगठनों में सीटू, किसान सभा, आदिवासी अधिकार मंच, दलित शोषण मुक्ति मंच, अ.भा. अंबेडकर महासभा, भारतीय पूर्व-सैनिक आंदोलन आदि शामिल हैं. "भाजपा – भारत छोड़ो" के नारे के साथ पूरे देश में लाखों लोग धरना, प्रदर्शन, चक्का जाम, सत्याग्रह और गिरफ़्तारी देते हुए मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज उठाएंगे. छत्तीसगढ़ में यह कार्यवाही रायपुर, धमतरी, दुर्ग, राजनांदगांव, कोरबा, बिलासपुर, रायगढ़, कोरिया, सूरजपुर, अंबिकापुर में आयोजित की जायेगी.

इस दिन विभिन्न दलित संगठनों ने भी 'भारत बंद' का आह्वान किया है. विभिन्न आदिवासी संगठन भी 'विश्व आदिवासी दिवस' के आयोजनों के जरिये देश में आदिवासियों पर जारी 'ऐतिहासिक अन्याय' और जल-जंगल-जमीन-खनिज व प्राकृतिक संसाधनों की लूट के खिलाफ अपनी आवाज उठाएंगे. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आयोजित इन सभी संघर्षों को अपना पूर्ण समर्थन दिया है.

माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने कहा है कि जिस तरह कॉर्पोरेट लूट को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार आम जनता पर हमले कर रही है, उनमें फूट डालने के लिए सांप्रदायिक मुद्दों को उछाल रही है, संसदीय जनतंत्र और संस्थाओं को रौंद रही है, उसके खिलाफ 9 अगस्त का आंदोलन देश के बेहतर भविष्य के लिए आम जनता की एकजुटता और संघर्षों का दिन होगा. यह दिन मजदूर-किसानों के मुद्दों पर आधारित वैकल्पिक राजनीति को आगे बढ़ाएगा. माकपा ने कहा है कि इन सघर्षों की अगली कड़ी में 5 सितम्बर को लाखों लोग संसद पर प्रदर्शन करेंगे.

 

 

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।