सरकार ने वायु प्रदूषण से निपटने को जारी की योजना, विशेषज्ञों ने उठाए महत्वाकांक्षा की गंभीरता पर सवाल

दुनिया के 15 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से 14 नगर भारत में स्थित हैं। लांसेट प्लेनेटरी हेल्थ जर्नल के मुताबिक वर्ष 2017 में भारत में हुई 1240000 लोगों की मौतें वायु प्रदूषण के कारण हुई...

नई दिल्ली, 11 जनवरी। भारत के विभिन्न शहरों में वायु प्रदूषण के चरम स्तर को कम करने की कोशिश के तहत केंद्रीय पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने बहुप्रतीक्षित नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) जारी किया। इस योजना का उद्देश्य (The aim of the National Clean Air Program) वर्ष 2024 तक प्रमुख प्रदूषकों पीएम 2.5 और पीएम 10 के संघनन में 20 से 30% तक की कटौती करना है। इसके लिए वर्ष 2017 को आधार वर्ष माना गया है। एनसीएपी (NCAP) पांच वर्षीय कार्य योजना है और वर्ष 2019 उसका प्रथम वर्ष होगा। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय (Union Environment Ministry) ने देश के 102 शहरों में वायु प्रदूषण (air pollution) की समस्या से निपटने के लिए अगले 2 साल के लिए 4.50 करोड़ डॉलर का बजट घोषित किया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन 102 शहरों को ऐसे नगरों के तौर पर चयनित किया है जहां पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment and Climate Change) द्वारा प्रदूषण से संबंधित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार व पर्यावरणविद् डॉ. सीमा जावेद ने यह जानकारी देते हुए बताया कि सरकार की यह योजना एक स्वागत योग्य कदम है, क्योंकि इससे वायु प्रदूषण की उस समस्या को देशव्यापी मान्यता मिलेगी  जिसकी चपेट में इस वक्त पूरा देश है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के 2018 के डेटाबेस के मुताबिक दुनिया के 15 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में से 14 नगर भारत में स्थित हैं। उन्होंने बताया कि लांसेट प्लेनेटरी हेल्थ जर्नल के मुताबिक वर्ष 2017 में भारत में हुई 1240000 लोगों की मौतें वायु प्रदूषण के कारण हुई इनमें से 107000 की मौत कोयले से होने वाले प्रदूषण के कारण हुई।

डॉ. सीमा जावेद ने कहा कि हालांकि एनसीएपी एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसमें किसी भी तरह की कानूनी बाध्यता का प्रावधान नहीं किया गया है। इसके अलावा दो साल के दौरान मात्र 4.50 करोड़ डॉलर यानी 300 करोड़ का बजट बेहद कम है और इससे इस योजना की महत्वाकांक्षा की गंभीरता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना में प्रदूषण के सभी प्रमुख स्रोतों को दायरे में लिया गया है। खासकर उद्योग परिवहन कृषि घरेलू प्रदूषण और वनों की कटाई की समस्या के निदान आदि का जिक्र किया गया है, मगर इसकी कामयाबी बहु क्षेत्रीय समन्वय और क्रियान्वयन की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगी।

क्लाईमेट ट्रेन्ड्स (Climate Trends) की निदेशक आरती खोसला ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अगर शीर्ष नेतृत्व में तीव्र इच्छाशक्ति है तो वायु गुणवत्ता (Air quality) की समस्या का समाधान तेजी से किया जा सकता है। विकास होना चाहिए और जारी भी रहना चाहिए, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं होना चाहिए। विकास की इस प्रक्रिया से दुनिया के अधिकांश देश गुजरते हैं और हमें भी होना चाहिए। आज दुनिया बदल रही है। अक्षय़ और शून्य उत्सर्जन प्रद्योगिकीयों का बडे पैमाने पर उपयोग होने लगा है। कोयला, तेल और गेस जेसे प्रदूषणकारी ईंधन से ध्यान हटाकर न केवल प्रदूषण में सुधार होगा, बल्कि बैलेंस शीट में भी सुधार होगा। कोई भी सरकार इस अवसर को अनदेखा नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि अब सरकार को NCAP के अनुपालन को मजबूत करना चाहिए।

क्या यह ख़बर/ लेख आपको पसंद आया ? कृपया कमेंट बॉक्स में कमेंट भी करें और शेयर भी करें ताकि ज्यादा लोगों तक बात पहुंचे

कृपया हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें

Government plans to continue tackling air pollution, experts question the severity of ambition

 

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।