दक्षिण भारत में चल रही भाजपा-विरोधी आंधी का 2019 के लिए साफ संकेत है

दक्षिण भारत में चल रही भाजपा-विरोधी आंधी का 2019 के लिए साफ संकेत है...

दक्षिण भारत में चल रही भाजपा-विरोधी आंधी का 2019 के लिए साफ संकेत है

Karnataka Legislative Assembly election, 2018

नई दिल्ली, 07 नवंबर। कर्नाटक के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को करारी हार पर जहां प्रदेश कांग्रेस ने कहा है कि भारत सांप्रदायिक बीजेपी से तंग आ गया है! धर्मनिरपेक्षता के लिए यह एक बड़ी जीत है। वहीं सियासी गलियारों में भी भाजपा की हार को पांच राज्यो के आगामी विधानसभा चुनाव में भी जनादेश और 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए संकेत माना जा रहा है।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक अरुण माहेश्वरी ने कहा कि कर्नाटक के उपचुनाव में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की भारी जीत दक्षिण भारत में चल रही भाजपा-विरोधी आंधी का साफ संकेत है।

दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर आशुतोष कुमार ने कहा कि यह न कहिएगा कि कर्नाटक में जो हुआ, वह रामजी की मर्जी नहीं थी, भगवान अयप्पा का आशीर्वाद नहीं था, सर्जिकल स्ट्राइक डे का कमाल नहीं था, सरदार पटेल का प्रताप नहीं था, नोटबंदी का नतीजा नहीं था।

प्रोफेसर आशुतोष कुमार ने कहा बैलेट बक्से से निकली आकाशवाणी सुन लीजिए। दीनबन्धु दीनानाथ चुनाव सामग्री बनाए जाने से अप्रसन्न हैं।

पद्म श्री गिरिराज किशोर ने फेसबुक पर लिखा,

“कर्नाटक में हुए उपचुनावों में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन ने एक लोकसभा और तीन विधानसभा की सीट जीत ली है, विधानसभा की सीटें पहले भी गठबंधन के पास थीं लेकिन लोकसभा की दोनों सीटें भाजपा के पास थीं एक पर येदयुरप्पा (शिमोगा) और दूसरी पर श्रीरामुलु (बेल्लारी) सांसद थे। बेल्लारी सीट पर गठबंधन प्रत्याशी ने 2 लाख 43 हजार वोटों से जीत दर्ज की है ये जीत दो लिहाज से महत्वपूर्ण है पहला की डीके शिवकुमार का मैनेजमेंट अभी तक अभेद है और दूसरा की गठबंधन का अंकगणित एकदम दुरुस्त था। पिछले चुनावों में जितना वोट दोनों को अलग-अलग मिला था वो इस बार गठबंधन के प्रत्याशी को उतना जोडकर मिला है। कांग्रेस को लेकर क्षेत्रीय दलों की एक शिकायत रही है कि वो अपना वोट ट्रांसफर नहीं करा पाती है जबकि रीजनल पार्टियां ये करने में सफल रहतीं हैं लेकिन राहुल गांधी के नेतृत्व में अब ऐसा संभव दिख रहा है कांग्रेस का वोटर पूरी निष्ठा के साथ गठबंधन का साथ दे रहा है। मीडिया अमित शाह को हर जीते चुनाव के बाद चाणक्य साबित कर देने पर अमादा रहती है लेकिन अमित शाह तब तक ही सफल दिखते हैं जब सामने को बेहतर रणनीतिकार नहीं दिखता है, गुजरात में वो चुनाव जरुर जीते लेकिन अशोक गहलोत ने पसीने छुड़ा दिये, कर्नाटक में डीके शिवकुमार ने सरकार बनाकर और उपचुनाव हराकर दिखा दिया, मध्यप्रदेश में भी कमलनाथ उन्नीस नहीं दिख रहे हैं बाकी चुनाव अभी बाकी है। ये चुनाव गठबंधन के संभावित साथियों के लिए भी एक संदेश है कि साथ रहेंगे तो जीत आसान होगी और साथ रहने के लिए भरोसा सबसे आवश्यक है। 2018 में अब तक लोकसभा के 13 सीटों पर उपचुनाव हुआ है जिसमें से भाजपा खाली शिमोगा और पालघर ही जीत पायी है क्योंकि बाकी सब जगह उसे गठबंधन से लडना पड़ा।

मेरी संवेदनाएं उन बेचारे गोदी मीडियाकर्मियों के साथ है जिन्होंने इस त्यौहार के दौरान दो दिन मेहनत करके "राहुल गांधी की बड़ी हार" वाले आइडियाज पर क्रियेटिव, वीडियो और विश्लेषण तैयार किये थे वो अब काम नहीं आ पायेंगे, दीन दयाल मार्ग वालों इसके लिए उनका बोनस मत रोकना उन्होनें तुम्हारी इज्जत बचाने के लिए बहुत मेहनत की थी लेकिन अब जाकर चुनाव तो लड़ नहीं सकते।

एक बार फिर संगठन के सभी साथियों और कर्नाटक कांग्रेस की टीम को हार्दिक बधाई”

वरिष्ठ पत्रकार उज्ज्वल भट्टाचार्य ने मीडिया के आड़े हातों लेते हुए कहा कि

#कर्नाटक - न्यूज़ चैनलों का मुख्य काम ख़बर छिपाना हो गया है।

युवा पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक हरे राम मिश्र ने कहा कि गुजरात के विकास का तिलिस्म टूट चुका है. अब मोदी-शाह उसका नाम नहीं लेते। आगामी विधान सभा चुनाव में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी विकास का यह आभासी तिलिस्म बेनकाब हो जाएगा। उसके बाद अमित शाह और नरेंद्र मोदी देश की आवाम के सामने कौन सा विकास बेचेंगे? मेरी समझ में नहीं आ रहा है।

उन्होंने कहा कि शायद आम संघी भी नहीं समझ पा रहा है इसीलिए वह मंदिर निर्माण की बेसुरी धुन पर नाचने लगा है।

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