गर्व से कहो हम हिन्दू हैं ! इतना गंभीर प्रदूषण का स्तर कि मापने वाली मशीनों की सीमा समाप्त हो गई !

जमकर हुई सर्वोच्च न्यायालय के दिवाली के आदेश की अवहेलना, दिल्ली की हवा 'खतरनाक'...

इतना गंभीर प्रदूषण का स्तर कि मापने वाली मशीनों की सीमा समाप्त हो गई

जमकर हुई सर्वोच्च न्यायालय के दिवाली के आदेश की अवहेलना, दिल्ली की हवा 'खतरनाक'

North India pollution updates: Delhi’s air quality continues to be ‘severe’

नई दिल्ली, 09 नवंबर। दिवाली पश्चात् दिल्ली-एनसीआर की वायु गुणवत्ता में खतरनाक गिरावट दर्ज की गई।  केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दिल्ली-एनसीआर में ट्रकों के प्रवेश पर प्रतिबंध की सिफारिश की है क्योंकि दिल्ली में 25 क्षेत्रों में हवा की 'बहुत खराब' गुणवत्ता दर्ज की गई है

पर्यावरणविद् वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सीमा जावेद ने बताया कि उत्तरी भारत में पीएम 2.5 स्तर 2000 दर्ज किया गया। लोगों ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक पटाखे जलाने की समय सीमा के आदेश की खुलकर अवहेलना की।

दिल्ली की वायु गुणवत्ता शुक्रवार की सुबह आनंद विहार में 463 एक्यूआई, नेहरू नगर में 469 एक्यूआई और पटपड़गंज में 449 एक्यूआई के साथ 'गंभीर' दर्ज की गई है। यह शुक्रवार और शनिवार को भी 'गंभीर' श्रेणी में रहने की आशंका है।

दिवाली के बाद पिछले साल की तुलना में दिल्ली का प्रदूषण स्तर लगभग दोगुना हो गया, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय के शाम 8 बजे से शाम 10 बजे के समय तय किए जाने से पहले लोगों ने जमकर पटाखे फोड़े।

वरिष्ठ पत्रकार और पर्यावरणविद् पंकज चतुर्वेदी ने बताया कि दीपावली की अगली सुबह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आंकड़े जारी कर दिल्ली की औसत वायु गुणवत्ता एक्यूआई ( एवरेज एयर क्वालिटी इंडेक्स - Average air quality index ) को 329 मापा, जो कि छठे स्तर का प्रदूषण है और बहुत घातक स्तर का माना जाता है।

अंतरराष्ट्रीय संस्था सफर यानी सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च का कहना था कि दिल्ली एनसीआर के हालात एक्यूआई के मापदंड से कही बहुत अधिक खराब हैं। यह बात इस लिए भी सच लगती है क्योंकि मध्य दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय के करीबी मेजर ध्यानचंद स्टेडियम के पास और दिल्ली की सीमा से सटे आनंद विहार पर हवा की गुणवत्ता बराबर थी - 999 अर्थात वायु में जहर के आपातकाल की सीमा से भी कई गुणा ज्यादा। चाणक्यपुरी जैसे हरियाली और कम आबादी वाले इलाके की हवा 459 स्तर पर जहरीली थी। गाजियाबाद और नोएडा में तो प्रदूषण का स्तर इतना ऊंचा था कि वहां मापने वाली मशीनों की सीमा समाप्त हो गई।

वायु प्रदूषण बच्चों के स्वास्थ्य के लिये सबसे बड़ा खतरा बन गया है। पांच साल से कम उम्र के 10 बच्चों की मौत में से 1 बच्चे की मौत प्रदूषित हवा की वजह से हो रही है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की वायु प्रदूषण और बच्चों के स्वास्थ्य पर जारी नयी रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 18 साल से कम उम्र के 93% प्रदूषित हवा में सांस लेने को मजबूर हैं। ‘वायु प्रदूषण और बाल स्वास्थ्य: स्वच्छ वायु निर्धारित करना’ नाम से जारी इस रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2016 में, वायु प्रदूषण से होने वाले श्वसन संबंधी बीमारियों की वजह से दुनिया भर में पांच साल से कम उम्र के 5.4 लाख बच्चों की मौत हुई है।

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