UP : सात जनपदों में बिजली आपूर्ति के निजीकरण का विरोध

निजीकरण के टेण्डर एक सप्ताह में वापस न लिये गये तो प्रान्तव्यापी संघर्ष के कार्यक्रमों का ऐलान...

हाइलाइट्स

संघर्ष समिति को जिम्मेदारी दी जाये तो एक साल में सुधार का दावा

निजीकरण के टेण्डर एक सप्ताह में वापस न लिये गये तो प्रान्तव्यापी संघर्ष के कार्यक्रमों का ऐलान

लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उप्र की बैठक में पावर कारपोरेशन प्रबन्धन द्वारा एकीकृत सेवा प्रदाता (इन्टीग्रेटेड सर्विस प्रोवाईडर) के नाम पर सात जनपदों में मण्डलों की विद्युत आपूर्ति निजी कम्पनियों को सौंपने की प्रक्रिया के विरोध में निर्णायक संघर्ष का संकल्प लिया गया।

समिति ने प्रमुख सचिव (ऊर्जा) और उप्र पावर कारपोरेशन लि के चेयरमैन को पत्र भेजकर कहा है कि यदि समिति को स्वायत्त उत्तरदायित्व दिया जाये तो समिति एक साल में मापदण्डों के अनुरूप सुधार करने हेतु समक्ष है।

समिति ने पत्र में यह भी कहा कि यदि लक्ष्य सचमुच सुधार है तो बिजली कर्मचारी व अभियन्ता इसे कर दिखाने में सक्षम हैं किन्तु यदि लक्ष्य मात्र निजीकरण है तो इसका पुरजोर विरोध किया जायेगा। समिति ने निजीकरण के टेण्डर तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए कहा है कि यदि एक सप्ताह में निजीकरण की प्रक्रिया रद्द न की गयी तो समिति प्रान्तव्यापी आन्दोलन के कार्यक्रमों की घोषणा कर देगी जिसकी सारी जिम्मेदारी प्रबन्धन की होगी।

            संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि बिजली चोरी व राजस्व वसूली न हो पाने का सबसे बड़ा कारण स्थानीय राजीतिज्ञों की दखलंदाजी है। आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि ए टी एन्ड सी हानियां उन्हीं जनपदों में अधिक है जहां राजनीतिक हस्तक्षेप अधिक है और बिना मीटर के 24 घण्टे बिजली दी जा रही है।

समिति ने कहा कि यदि बिजली चोरी रोकने और राजस्व बढ़ाने हेतु इन जनपदों की बिजली व्यवस्था समिति को सौंप दी जाये और राजनीतिक हस्तक्षेप बन्द हो जाये तो एक साल में ही परिणाम सामने आ जायेंगे। अधिक बिजली चोरी वाले इलाकों में पटियाला माॅडल लागू कर उपभोक्ताओं के मीटर पोल पर लगाने का सुझाव संघर्ष समिति सभी सरकारों को देती रही है और वर्तमान सरकार को भी यह सुझाव लिखित तौर पर दिया जा चुका है।

समिति ने कहा कि मायावती सरकार के समय 09 वर्ष पूर्व 2009 में इसी प्रकार आगरा और कानपुर के विद्युत वितरण को निजी फ्रेन्चाइजी को सांपने का करार किया गया था। आगरा का विद्युत वितरण टोरेन्ट कम्पनी को 01 अप्रैल 2010 को दिया गया। जबकि कर्मचारियों के विरोध के चलते केस्को का विद्युत वितरण पावर कारपोरेशन के पास ही रहा। विगत 08 वर्ष के आंकड़ों से स्पष्ट है कि केस्कों में राजस्व वसूली की वृद्धि आगरा की तुलना में कहीं अधिक है। आगरा में फ्रेन्चाइजी करार देने में अरबों रूपये का घोटाला हुआ जिसको सी ए जी रिपोर्ट में भी खुलासा किया गया है।

            समिति ने कहा कि एकीकृत सेवा प्रदाता के नाम पर निजीकरण कर बड़े घोटाले की तैयारी की जा रही है जिसका पुरजोर विरोध किया जायेगा और प्रक्रिया व टेन्डर निरस्त न किये गये तो 11 फरवरी को संघर्ष समिति प्रान्तव्यापी आन्दोलन के कार्यक्रमों की घोषणा कर देगी।

            संघर्ष समिति की बैठक में राजीव सिंह, गिरीश पाण्डेय, सदरूद्दीन राना, सुहैल आबिद, बिपिन प्रकाश वर्मा, राजेन्द्र घिल्डियाल, महेन्द्र राय, पी एन तिवारी, पी एन राय, करतार प्रसाद, परशुराम, मो0 इलियास, ए के श्रीवास्तव, शम्भू रत्न दीक्षित, भगवान मिश्र, पूसेलाल, मुख्यतया उपस्थित थे।

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