पटाखों के प्रदूषण से बच्चों को बचाएं, उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाएं

वायु गुणवत्ता एवं मौसम पूवार्नुमान अनुसंधान प्रणाली (एसएएफएआर) के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता बदतर हो गई है और न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री नीचे रहा है।...

पटाखों के प्रदूषण से बच्चों को बचाएं, उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाएं

Save children from "pollution of firecrackers", make them responsible citizensनई दिल्ली, 8 नवंबर। राजधानी दिल्ली में गुरुवार सुबह धुंध छाई रही और न्यूनतम तापमान 10.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दीपावाली के एक दिन बाद दिल्ली की वायु गुणवत्ता का स्तर 'गंभीर' हो गया है।

वायु गुणवत्ता एवं मौसम पूवार्नुमान अनुसंधान प्रणाली (एसएएफएआर) के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता Air quality in national capital region बदतर हो गई है और न्यूनतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री नीचे रहा है।

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के एक अधिकारी ने कहा,

"सुबह के समय धुंध रहने के साथ आसमान साफ रहेगा।"

दिल्ली में बुधवार को वायु गुणवत्ता में थोड़ा सुधार देखा गया था। वायु गुणवत्ता मंगलवार सुबह 'आपातकाल' स्तर में पहुंचने के बाद बुधवार को 'खराब' स्तर में आ गई थी।

वरिष्ठ पत्रकार पंकज चतुर्वेदी ने बताया कि पटाखे "firecrackers" जलाने से निकले धुएं में सल्फर डाईऑक्साइड, नाइट्रोजन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, सीसा, आर्सेनिक, बेंजीन, अमोनिया जैसे कई ज़हर सांस के जरिये शरीर में घुलते हैं। इनका कुप्रभाव परिवेश में मौजूद पशु-पक्षियों पर भी होता है। यही नहीं इससे उपजा करोड़ों टन कचरे का निबटान भी बड़ी समस्या है। यदि इसे जलाया जाए तो भयानक वायु प्रदूषण होता है। यदि इसके कागज वाले हिस्से को रिसाइकल किया जाए तो भी जहर प्रकृति में समाता है और यदि इसे डंपिंग में यूं ही पड़ा रहने दिया जाए तो इसके विषैले कण जमीन में जज्ब होकर भूजल और जमीन को स्थाई और लाइलाज स्तर पर जहरीला कर देते हैं।

पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि वैसे तो ढेर सारी कानून पहले से मौजूद हैं लेकिन आतिशबाजी एक सामाजिक कुरीति है और इसका हल समाज के पास ही है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अध्ययन के अनुसार दुनिया के सबसे प्रदूषित वायु वाले 20 शहरों में देश के 13 शहर हैं। दिवाली के दिनों में तो वायु प्रदूषण  air pollution कई गुना बढ़ जाता है। साथ ही दूसरे दिन शहर की सड़कों पर कई मीट्रिक टन अतिरिक्त कचरा भी मिलता है।

यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी, गाज़ियाबाद के प्रबंध निदेशक डॉ. पी.एन. अरोड़ा ने बताया कि पटाखों के प्रदूषण से अस्थमा, मिर्गी और कैंसर का खतरा बढ़ता है। उच्च रक्तचाप high blood pressure/ hypertension व हृदयरोग के मरीज Cardiovascular patients पटाखे फूटने से असहज हो जाते हैं। इसमें भरा जाने वाला सीसा व पारा किडनी, फेफड़ों व नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचाता है। पटाखों से खांसी का अटैक होता है। आंखों में एलर्जी होने से पानी निकलने की समस्या हो सकती है।

डॉ. पी.एन. अरोड़ा ने बताया कि पटाखों का शोर छोटे बच्चों को विचलित करता है। उनके नर्वस सिस्टम को नुकसान होता है। 

डॉ. अरोड़ा ने कहा कि विषैले तत्त्वों से सुरक्षा हेतु कई शोधों में यह बात साबित हो चुकी है कि पटाखों की भयानक आवाज न केवल बुजुर्गों की श्रवण क्षमता को कमजोर करती है, वहीं इससे हार्ट अटैक के मामलों में भी वृद्धि हुई है। ऐसे में पटाखों के विकल्प के तौर पर सूखे पत्ते, घास और डालियां जैसी चीजों से बोनफायर जला कर रोशनी के इस त्योहार को किसी खुली जगह पर सबके साथ मनाएं। अगर बच्चे पटाखे जलाने की जिद करें तो उन्हें प्राकृतिक पटाखे जलाने के लिए दें। ये पटाखे रिसाइकिल पेपर से बनते हैं और इनसे शोर बहुत कम होता है। अगर फिर भी बच्चे बाजार के पटाखे जलाने के लिए जिद करें तो आप कई बच्चों का एक समूह बनाकर किसी मैदान या खुली जगह पर अपनी देखरेख में पटाखे जला सकते हैं, आतिशबाजी कर सकते हैं। इस तरह आप बच्चों को पटाखों के खतरे से तो बचाएंगे ही और उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक भी बनाएंगे।

डॉ अरोड़ा ने बताया कि सामान्यत: एक व्यक्ति 60 डेसिबल तक आवाज सुन सकता है। इसके बाद हर 3 डेसिबल आवाज की वृद्धि खतरनाक होती है। कई पटाखों जैसे रस्सी बम आदि से शोर 115 डेसिबल से भी ज्यादा होता है। एक अध्ययन के मुताबिक दिवाली के दौरान ज्यादा शोर श्रवण शक्ति को क्षति पहुंचाता है।

क्या भाजपा और “अजय सिंह बिष्ट” उर्फ “योगी आदित्यनाथ” हिन्दूविरोधी और ब्राहमण विरोधी हैं

दीपावली पर त्वचा को कैसे रखें सुरक्षित

जानलेवा साबित होता वायु प्रदूषण और सोती सरकार

 दीपावली पर प्रदूषण : एक सामाजिक कुरीति है आतिशबाजी

क्या यह ख़बर/ लेख आपको पसंद आया ? कृपया कमेंट बॉक्स में कमेंट भी करें और शेयर भी करें ताकि ज्यादा लोगों तक बात पहुंचे

कृपया हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करें

Related topics - central government survey about firecrackers, what are the 5 step that you will take to create awareness among people to stop them burning fire crackers during the festival and events,

हस्तक्षेप से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें
facebook फेसबुक पर फॉलो करे.
और
facebook ट्विटर पर फॉलो करे.
"हस्तक्षेप"पाठकों-मित्रों के सहयोग से संचालित होता है। छोटी सी राशि से हस्तक्षेप के संचालन में योगदान दें।