नीतीश जी की अंतरात्मा और नैतिकता अभी गहरी नींद में है, जब BJP को छोड़ेंगे तब जागेगी अंतरात्मा

तेजस्वी ने कहा कि जिस दिन से नीतीश ने महागठबंधन तोड़ा है उस दिन से ये बेचैन, बौखहलाट और अपने सहयोगी दल के डर के साये में जी रहे है। बीजेपी इनको जो आईना दिखा रही है उसकी खीझ इनके शब्दों में दिख रही है...

हाइलाइट्स

हमारे यह संस्कार नहीं है कि अपने शब्द दूसरों के मुँह से बुलवाए और ख़ुद संत बने घूमें। हम बहुत स्पष्टवादी है।दिल और दिमाग़ के साफ़ है। मन में कोई छल-कपट और फ़रेब नहीं है। अपने दुर्विचार और दुर्भावनाओं को किसी और की ज़ुबान से कहलवाना जिनकी फ़ितरत है उन्हें जनता जानती है। हम जैसे है वैसे दिखते है। कहीं कोई बनावटीपन नहीं है।

नई दिल्ली, 12 सितंबर। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जोरदार हमला बोला है। तेजस्वी ने कहा कि जिस दिन से नीतीश ने महागठबंधन तोड़ा है उस दिन से ये बेचैन, बौखहलाट और अपने सहयोगी दल के डर के साये में जी रहे है। बीजेपी इनको जो आईना दिखा रही है उसकी खीझ इनके शब्दों में दिख रही है। उन्होंने कहा कि हमारे यह संस्कार नहीं है कि अपने शब्द दूसरों के मुँह से बुलवाएं और ख़ुद संत बने घूमें।

तेजस्वी ने अपने आघिकारिक फेसबुक पेज पर लिखा,

“कल प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा राजद की भागलपुर की जनसभा आत्मघाती नुक्कड़ नाटक था। अब माननीय मुख्यमंत्री को विपक्षी दल द्वारा उनके हज़ारों करोड़ के सृजन महाघोटाले के विरुद्ध की जा रही जनजागरण जनसभाएँ नाटक लगने लगी है। एक तो शब्दों के चयन का ख़ुद ख़याल नहीं रखते और ऊपर से कहते है वो मर्यादित है। मुख्यमंत्री जनसभा को आत्मघाती बताकर हमें धमकी दें रहे है। अपनी धमकी पर मर्यादा का उन्हें ख़्याल नहीं रहता। दरअसल जिस दिन से उन्होंने महागठबंधन तोड़ा है उस दिन से ये बेचैन, बौखहलाट और अपने सहयोगी दल के डर के साये में जी रहे है। बीजेपी इनको जो आईना दिखा रही है उसकी खीझ इनके शब्दों में दिख रही है।“

तेजस्वी ने कहा

“शायद माननीय मुख्यमंत्री जी को अपने दल के हर घंटे में जारी होने वाले आधिकारिक व्यक्तव्यों और उसकी शब्दावली की जानकारी का घोर अभाव है। लोकतंत्र और सार्वजनिक जीवन में मर्यादित टिप्पणी होनी चाहिए लेकिन जब से मुख्यमंत्री अपने दल के अध्यक्ष बने है इन्होंने आधिकारिक टिप्पणी देने वालों को विशेष रूप से ट्रेनिंग देना शुरू किया है। बिहार की जनता जानती है कौन, कब, किससे, क्या बुलवा रहा है?”

राजद नेता ने कहा,

“हमारे यह संस्कार नहीं है कि अपने शब्द दूसरों के मुँह से बुलवाए और ख़ुद संत बने घूमें। हम बहुत स्पष्टवादी है।दिल और दिमाग़ के साफ़ है। मन में कोई छल-कपट और फ़रेब नहीं है। अपने दुर्विचार और दुर्भावनाओं को किसी और की ज़ुबान से कहलवाना जिनकी फ़ितरत है उन्हें जनता जानती है। हम जैसे है वैसे दिखते है। कहीं कोई बनावटीपन नहीं है।

पर उन लोगों का क्या जो बगुले के भेष में कौए बने बैठे है? जो सिर से लेकर पैर तक अनैतिकता के बोझ तले दबे है लेकिन सार्वजनिक जीवन में नैतिकता के पुजारी बनने का ढोंग करते है। बिहार की विवेकशील जनता इनकी सब कारगुज़ारियाँ देख रही है और वक़्त आने पर कड़ा जवाब देगी।“

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा,

“‪बिहार में नीतीश जी का महासुशासन। अंतरात्मा और नैतिकता अभी गहरी नींद में है। जब BJP को छोड़ेंगे तब जागेगी अंतरात्मा।“

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