सर्वोच्च न्यायालय की आंतरिक जांच प्रक्रिया का टेस्ट केस - प्रशांत भूषण

बल ने जज लोया मामले और सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कांफ्रेंस की रिपोर्टिंग के मुख्यधारा मीडिया के तरीकों की कड़ी आलोचना की।...

अगर उच्चतर न्यायपालिका में गड़बड़ी होगी, तो निचली अदालतों में हालत और खराब होगी

नई दिल्ली। वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा है कि प्रधान न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्र पर लगे आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जजों को सौंपी गई याचिका सर्वोच्च न्यायालय की आंतरिक जांच प्रक्रिया का टेस्ट केस है।

नागरिक अधिकार संगठनों- जन हस्तक्षेप और पीयूसीएल की तरफ से आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए भूषण ने प्रधान न्यायाधीश पर लगे कई आरोपों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेज घोटाले में जस्टिस दीपक मिश्र की भूमिका संदेहों के घेरे में आई है, जिस पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। भूषण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में जो मुद्दे उठाए, उससे  जस्टिस मिश्र पर न्यायिक शक्तियों के दुरुपयोग का इल्जाम भी लगा है। इससे सामने आया कि विभिन्न महत्त्वपूर्ण मामलों में जजों की बेंच तय करने में चीफ जस्टिस ने मनमानी दिखाई।

इसके अलावा उन्होंने एक पुराने मामले का जिक्र किया, जब जस्टिस मिश्र ओडीशा में अधिवक्ता थे। आरोप है कि तब उन्होंने गलत हलफनामा देकर चरागाह के लिए सरकारी जमीन हासिल करने की, जिसमें बाद में प्रशासन ने आवंटन रद्द किया था।

प्रशांत भूषण ने कहा कि इन आरोपों के बारे में सच्चाई सामने आना जरूरी है, वरना सरकार प्रधान न्यायाधीश और उनके जरिए सुप्रीम कोर्ट को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर सकती है। उस हाल में सरकार की सुप्रीम कोर्ट को नियंत्रित करने की मंशा पूरी हो सकती है।

सभा में वरिष्ठ पत्रकार हरतोष सिंह बल ने बहुचर्चित सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे जज बृजगोपाल लोया की संदिग्ध स्थितियों में हुई मौत को लेकर जारी विवाद की चर्चा की।

बल कारवां मैगजीन के वरिष्ठ संपादक हैं, जिसने इस मामले का खुलासा किया था।

श्री बल ने उल्लेख किया कि इसी प्रकरण से संबंधित याचिका पर बेंच का गठन विवाद का वो आखिरी मामला बना, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जजों ने सार्वजनिक रूप से अपनी बात कहने का फैसला किया।

बल ने जज लोया मामले और सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कांफ्रेंस की रिपोर्टिंग के मुख्यधारा मीडिया के तरीकों की कड़ी आलोचना की। कहा कि टीवी चर्चाओं और अखबारी रिपोर्टों के जरिए मुख्य मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश की गई है। मुद्दों को भटकाने का सुविचारित प्रयास मीडिया ने किया है। लेकिन चार जजों की प्रेस कांफ्रेंस से जज लोया की संदिग्ध मृत्यु का मुद्दा उठ खड़ा हुआ है। उन्होंने जागरूक पत्रकारों से ऐसी खबरों को उजागर करते रहने का संकल्प लेने की अपील की।

प्रगतिशील महिला संगठन की महासचिव पूनम कौशिक ने न्यायपालिका में मौजूद वर्गीय एवं लैंगिक पूर्वाग्रहों का विस्तार से ब्योरा दिया। कहा कि अगर उच्चतर न्यायपालिका में गड़बड़ी होगी, तो निचली अदालतों में हालत और खराब होगी।

पीयूसीएल दिल्ली के अध्यक्ष एनडी पंचोली ने न्यायपालिका को सरकार और सत्ताधारी दल की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्ध बनाने की अतीत में हुई और अब हो रही कोशिशों के प्रति देश को आगाह किया।

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