प्रो.भीमसिंह की सेना प्रमुख को सलाह, भारतीय संविधान की मर्यादा का पालन करें सियासी पचड़ों में न पड़ें

प्रो.भीमसिंह ने सेना प्रमुख से की अपील, छोड़ें राजनीतिक उलझनों को संसद पर, देखें सेना की भूमिका

नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक, नेशनल लीगल एड कमेटी के चेयरमैन एवं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रो.भीमसिंह ने सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत से अपील की है कि वे भारत में या भारत के किसी राज्य में चाहे वह जम्मू-कश्मीर क्यों न हो, उस क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों को अपनी भूमिका में शामिल न करें और राजनीतिक उथलपुथल और समस्याओं को चाहे वह शिक्षा विभाग से जुड़ी हों या किसी अन्य संस्थाओं से और उन समस्याओं को सुलझाने के लिए देश में विधायिका और संसद की ही भूमिका है।

प्रो.भीमसिंह ने कहा कि वे विश्व के विख्यात डोगरा जनरल जोरावर सिंह के परिवार से आते हैं और उनके पिताजी भी ब्रिटिश आर्मी में रहे थे और उनके पांच भाईयों में से चार भाई भारतीय सेना में अपनी सेवा दे चुके हैं। पैंथर्स सुप्रीमो ने जनरल रावत को याद दिलाया कि वे सेना के हितैशी ही नहीं बल्कि इसके प्रशंसक भी हैं, क्योंकि सेना ने विशेषकर जम्मू-कश्मीर की सीमाओं की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रो.भीमसिंह ने कहा कि सेना को भारतीय संविधान में एक बहुत ही कठिन भूमिका निभाने की जिम्मेदारी दी गयी है और उसमें हमारी सेना ने महत्वपूर्ण कुर्बानियों देकर देश की रक्षा की है, एक तरफ चीन और दूसरी तरफ पाकिस्तान के आक्रोश के खिलाफ। इसके बावजूद भी 1947 से पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर की 32000 वर्गमील भूमि पर गैरकानूनी कब्जा जमाए हुए है और दूसरी तरफ से चीन ने जम्मू-कश्मीर की 20000 वर्गमील भूमि पर पूर्व में आधिपत्य जमाया हुआ है।

पैंथर्स सुप्रीमो ने कहा कि मंदिर, मस्जिद या शैक्षणिक संस्थानों के कारोबार के लिए हमारे संविधान ने भारतीय संसद को वहां के प्रशासन को चलाने की जिम्मेदारी दी है। इसमें सेना की भूमिका देश की रक्षा करने को है, जो सेना ने बड़ी बहादुरी और समझदारी से सम्भाल रखा है।

प्रो.भीमसिंह ने जनरल रावत के उस वक्तव्य का हवाला भी दिया, जिसमें उन्होंने पिछले दिन जम्मू-कश्मीर के बारे में अपने वक्तव्य में कहा था कि, ‘‘सोशल मीडिया ने हमें बहुत क्षति पहुंचायी है, जम्मू-कश्मीर के बारे में सोशल मीडिया ने गलत सूचना फैलाकर जम्मू-कश्मीर में युवा पीढ़ी को गुमराह कर रखा है और जम्मू-कश्मीर के स्कूल भी वही कर रहे हैं। मदरसा और मस्जिदों में गलत अफवाहें फैलायी जा रही हैं और उनको दूर करने के लिए हमें शीघ्र कदम उठाने होंगे। शिक्षा प्रणाली में एक परिवर्तन लाना होगा, जो भ्रष्ट बन चुकी है।‘‘

पैंथर्स सुप्रीमो ने कहा कि यदि यह वक्तव्य कोई राजनीतिज्ञ देता या कोई राजनीतिक दल देता तो बात समझ आ सकती है, परंतु यह वक्तव्य भारत के सेना प्रमुख की आवाज या कलम से आना भारतीय संविधान की मर्यादाओं के विपरीत लगता है। उन्होंने सेना प्रमुख से जोर देकर अपील की है कि वे देश की अन्तर्राष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा की रक्षा के लिए अपना ध्यान केन्द्रित करें, जो आज तक हमारी सेना करती आयी है।

प्रो.भीमसिंह ने भारत के राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि वे जम्मू-कश्मीर की बिगड़ती हुई स्थिति पर अंकुश लगाने के लिए वहां तुरंत राज्यपाल शासन लागू करें, जो जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल राष्ट्रपति की सलाह पर ही लागू कर सकते हैं। इसके साथ ही धारा 370 में संशोधन और 35(ए) को हटाना देश की एकता, अखंडता, समृद्धि और शांति के लिए अत्यंत आवश्यक है।

     

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